CEC Gyanesh Kumar Resignation: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन किया। SIR और मतदाता सूची से जुड़े कथित मतभेदों पर सियासी घमासान तेज है। चुनाव आयोग ने सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही है।
चुनाव आयोग को लेकर सियासी टकराव अब सड़कों तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन और मार्च शुरू किया। जम्मू से लेकर असम, चंडीगढ़ और दिल्ली तक कांग्रेस कार्यकर्ता निर्वाचन कार्यालयों की ओर बढ़े। कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।
जम्मू में निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन
जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन भवन का घेराव कर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस सांसद और जम्मू-कश्मीर प्रभारी नासिर हुसैन ने किया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी स्वतंत्र समीक्षा और CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।
यह भी पढ़ें: शी जिनपिंग की पत्नी के लिए Melania Trump का खास कार्यक्रम, बच्चों के गीत पर भावुक हुईं Peng Liyuan
कांग्रेस क्यों मांग रही है ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा?
कांग्रेस का विवाद मुख्य रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी CEC के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्य स्तर पर और 28 सितंबर को जिला स्तर पर विरोध मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है।
विवाद की असली वजह क्या है?
विवाद उस रिपोर्ट के बाद बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में SIR, मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है। यही रिपोर्ट विपक्ष के हमलों का आधार बनी और CEC के इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
चुनाव आयोग ने इन दावों के बीच कहा है कि आंतरिक टिप्पणियां, सवाल और अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक अंतिम आदेश और फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यानी विवाद का एक पक्ष कथित असहमति को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग इसे अपनी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।
महुआ मोइत्रा की शिकायत, CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम
इस बीच TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत देकर कथित मतभेदों की जांच और FIR की मांग की है। वहीं CJP ने भी CEC को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देने की बात कही है। फिलहाल मामला राजनीतिक विरोध, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
यह भी पढ़ें: Bihar Crime: ‘संवेदनाएं Blinkit से डिलीवर नहीं होतीं’, बिहार में बढ़ते अपराध पर मनोज झा ने सरकार को घेरा
