
नई दिल्ली: भारतीय खेल इतिहास का एक ऐसा 'गोल्डन चैप्टर' हमेशा के लिए बंद हो गया है, जिसने देश को निशानेबाजी में विश्व स्तर पर पहचान दिलाई थी। भारत के सबसे कामयाब और दिग्गज पिस्टल शूटर व कोच जसपाल राणा का गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में महज 49 साल की उम्र में आकस्मिक निधन हो गया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कलिकेश नारायण सिंह देव ने इस दर्दनाक खबर की पुष्टि की है। उनके इस तरह अचानक चले जाने से न सिर्फ शूटिंग बिरादरी बल्कि पूरे देश के खेल प्रेमी गहरे सदमे और सस्पेंस में हैं कि आखिर इतने फिट एथलीट को अचानक क्या हो गया?
जसपाल राणा के निधन की कहानी जितनी दुखद है, उतनी ही हैरान करने वाली भी है। वे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के साथ गए थे। वहाँ से जब वे दिल्ली के लिए फ्लाइट से लौट रहे थे, तभी आसमान में उड़ते विमान के भीतर उन्हें अचानक गंभीर 'मेडिकल इमरजेंसी' का सामना करना पड़ा।
#BREAKING | Indian shooter Jaspal Rana passes away at 49. He reportedly experienced chest pain and discomfort while returning from the ISSF World Cup in Munich, Germany. He later underwent a successful stent surgery at Max Super Speciality Hospital in Saket, Delhi. pic.twitter.com/pH9wnOGehM
— DD News (@DDNewslive) June 12, 2026
फ्लाइट के भीतर अचानक उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई। जैसे ही विमान नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, उन्हें बिना एक पल गंवाए सीधे दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत एक मेडिकल प्रोसीजर किया और उनके दिल में 'स्टेंट' (Stent) भी फिक्स किया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद, गुरुवार की रात उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली।
कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में उनका रिकॉर्ड आज भी एक मिसाल है:
जसपाल राणा सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं थे, बल्कि वे देश के सबसे बेहतरीन 'हाई-परफॉर्मेंस' कोच भी थे। हाल ही में फरवरी 2025 में NRAI ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल विंग का मुख्य कोच नियुक्त किया था। लेकिन उनकी कोचिंग का सबसे बड़ा और चमत्कारी उदाहरण साल 2024 के पेरिस ओलंपिक में देखने को मिला था।
पेरिस ओलंपिक में जब मनु भाकर ने दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा, तो उस जीत के पीछे जसपाल राणा के पसीने और कड़क ट्रेनिंग का हाथ था। उन्होंने मनु भाकर के करियर को उस वक्त संभाला जब वे बेहद बुरे दौर से गुजर रही थीं। राणा ने देश को सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई 'टीनएज सेंसेशन' दिए, जो आज दुनिया में भारत का डंका बजा रहे हैं। उनकी इसी कोचिंग के जादू के लिए उन्हें साल 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया था।
जसपाल राणा के इस तरह अचानक चले जाने से देश के राजनीतिक और खेल जगत के गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया (X) पर गहरा दुख जताते हुए लिखा: “मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त शूटर जसपाल राणा के अचानक निधन से स्तब्ध और मर्माहत हूँ। जसपाल न केवल एक असाधारण खिलाड़ी और कोच थे, बल्कि एक बेहद मिलनसार, सरल और सहृदय व्यक्ति थे। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।” जसपाल राणा आज भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उन्होंने भारतीय शूटिंग को जो आधुनिक रूप दिया है और जो कड़क 'प्रेशर-ट्रेनिंग' का इकोसिस्टम तैयार किया है, वो आने वाली कई पीढ़ियों को ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लिए प्रेरित करता रहेगा। खेल जगत ने आज अपने सबसे चमकदार सितारे को खो दिया है।
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