झारखंड में JSSC-CGL 2024 परीक्षा रद्द होने से छात्रों में खुशी है, लेकिन 1975 चयनित उम्मीदवार नौकरी जाने के डर से बेहद परेशान हैं। उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए अपनी आपबीती सुनाई।
JSSC CGL Cancelled: झारखंड सरकार ने सोमवार को JSSC-CGL 2024 और कुछ अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया। सरकार के इस फैसले के बाद एक तरफ जहां, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी का माहौल बना, तो दूसरी ओर परीक्षा के जरिए चयनित उम्मीदवारों के बीच मायूसी और चिंता की लहर दौड़ गई। बता दें कि परीक्षा रद्द होने के बाद उन 1975 उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनका JSSC-CGL 2024 के जरिए चयन हुआ था। इन उम्मीदवारों को अब अपनी नौकरी जाने का डर सता रहा है।
नियुक्ति पत्र देने के बाद अब नौकरी छिनने का डर
रांची में झारखंड सचिवालय के बाहर भारी बारिश के बीच प्रदर्शन कर रहे राघवेंद्र ने अपनी परेशानी सुनाते हुए कहा, "मुख्यमंत्री ने ही मुझे मेरा नियुक्ति पत्र सौंपा था और अब वही मेरी नौकरी छीन रहे हैं।"
चतरा के रहने वाले राघवेंद्र ने JSSC-CGL परीक्षा पास की थी और फिलहाल सचिवालय में काम कर रहे थे। इससे पहले वह गया में शिक्षक के तौर पर काम करते थे और सोशल साइंस पढ़ाते थे।
उन्होंने बताया कि जब CGL भर्ती का रिजल्ट आया था, तब नौकरी ज्वाइन करने को लेकर उनके मन में कुछ आशंकाएं थीं। लेकिन 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से भर्ती रद्द न करने का फैसला आने के बाद उन्होंने 8 जनवरी को गया की अपनी शिक्षण की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
राघवेंद्र ने कहा कि अब वह नई भर्ती परीक्षाओं के लिए तय उम्र सीमा भी पार कर चुके हैं। उनके मुताबिक, अगर सरकार ने भर्ती को पहले ही रद्द कर दिया होता तो वह अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर नई नौकरी ज्वाइन नहीं करते। उन्होंने कहा, "अब मेरे पास कुछ नहीं बचा है- न इधर का रहा, न उधर का।"
नौकरी ज्वाइन करने के बाद ऑफिस में जाने से रोका गया
कोडरमा के रहने वाले संदीप यादव की स्थिति भी ऐसी ही है। वह विजिलेंस डिपार्टमेंट में नौकरी कर रहे थे और रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय में काम करते थे। लेकिन मंगलवार को जब वह ऑफिस पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया।
संदीप के मुताबिक, गार्ड ने उनका ID कार्ड चेक किया और कहा कि उन्हें ऑफिस में प्रवेश की अनुमति नहीं है। संदीप ने कहा, "मैंने परीक्षा पास करने के बाद पिछले साल नौकरी ज्वाइन की थी। मुझे यह नौकरी किसी की मेहरबानी से नहीं मिली थी। फिर भी आज मुझे अंदर जाने की इजाजत नहीं है।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने भीड़ के दबाव में आकर परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है।
संदीप की शादी सिर्फ दो महीने पहले हुई है। उन्हें डर है कि नौकरी जाने का असर उनकी शादीशुदा जिंदगी पर भी पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि घर जाकर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि शादी के समय उनके पास नौकरी थी, लेकिन अब नौकरी नहीं रही। उन्होंने पत्नी से यहां तक कहा कि अगर वह चाहें तो इस रिश्ते को खत्म कर सकती हैं।
'हम किस पर भरोसा करें?' चयनित उम्मीदवारों का सवाल
देवघर के रहने वाले ललन पांडे का चयन असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) के पद पर हुआ था। उनकी पोस्टिंग जमशेदपुर में की गई थी। वह अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। ललन पांडे ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब उनकी उम्र नई भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने की नहीं रही। उनके बच्चे छोटे हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर है। उन्होंने कहा कि उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। गुस्से और दुख में उन्होंने यहां तक कहा कि इससे बेहतर होता कि सरकार उन्हें गोली ही मार देती।
दूसरे चयनित उम्मीदवारों ने भी जताई नाराजगी
गुंजन सिंह ने भी ललन पांडे की बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि वह पहले आसनसोल डिवीजन में रेलवे के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने वह नौकरी इसलिए छोड़ी थी क्योंकि वह अपने घर वापस आना चाहते थे। गुंजन ने कहा कि नौकरी छिनने के बाद उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे सरकार ने उन्हें एक तरह से मार ही दिया हो।
उन्होंने यह भी कहा कि वह परीक्षा से जुड़ी किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट कराने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नौकरी ज्वाइन की थी। जब परीक्षा रद्द करने की घोषणा हुई तो उन्हें अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ।
गुंजन ने सवाल किया, "अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी भर्ती रद्द की जा रही है, तो हम किस पर भरोसा करें?"
JSSC-CGL भर्ती प्रक्रिया शुरू से विवादों में रही
JSSC-CGL 2024 भर्ती प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों में रही है। पहली बार परीक्षा जनवरी 2024 में आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने के आरोप सामने आए, जिसके बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद आयोग ने सितंबर में दोबारा परीक्षा आयोजित की। लेकिन दूसरी बार भी परीक्षा में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए।
जांच के दौरान CID की रिपोर्ट में सामने आया कि परीक्षा से पहले कुछ उम्मीदवारों को हजारीबाग, बोकारो, आसनसोल और यहां तक कि नेपाल जैसी जगहों पर ले जाया गया था। आरोप था कि वहां उन्हें 150 में से 120 सवालों के जवाब रटाए गए। मामला झारखंड हाई कोर्ट पहुंचा और FIR भी दर्ज की गई।
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