बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने पैसे की किल्लत से जूझ रहे राज्य के चारों सड़क परिवहन निगमों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने अलग-अलग सब्सिडी के तहत इन निगमों को ₹593.99 करोड़ जारी करने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही बकाया बिल की वजह से KSRTC के कई डिपो में डीजल की कमी हो गई थी, जिससे बस सेवाएं काफी प्रभावित हुई थीं। डीजल के बिल और कर्ज समेत इन चारों निगमों पर ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की देनदारी है। इसी को देखते हुए सरकार ने अपने बकाए में से ₹593.99 करोड़ का फंड जारी किया है।
साल 2026-27 के लिए राज्य के स्कूली और कॉलेज के छात्रों को 1.97 लाख फ्री बस पास दिए गए हैं। इसका ₹286.08 करोड़ सरकार को निगमों को देना है। इसमें से सरकार ने फिलहाल ₹63.99 करोड़ जारी कर दिए हैं।
चारों परिवहन निगमों की 26 हजार बसों के लिए हर दिन 16.26 लाख लीटर डीजल की जरूरत पड़ती है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) इन बसों को डीजल सप्लाई करता है। लेकिन, निगमों पर HPCL का ₹1124.91 करोड़ बकाया हो गया है और कंपनी लगातार पेमेंट का दबाव बना रही है। निगमों ने सरकार से इस बकाए को चुकाने के लिए मदद मांगी थी। सरकार ने उनकी अपील मानते हुए पहली किस्त के तौर पर चारों निगमों को ₹100 करोड़ जारी कर दिए हैं।
शक्ति योजना के तहत साल 2026-27 में मई से सितंबर तक महिलाओं की फ्री यात्रा (जीरो टिकट) का ₹2150 करोड़ पहले ही जारी किया जा चुका है। अब सरकार ने अक्टूबर महीने के लिए ₹430 करोड़ का एडवांस पेमेंट करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे शक्ति योजना की लाभार्थियों को जल्द से जल्द स्मार्ट कार्ड बांटें।
राज्य के चारों परिवहन निगमों पर प्रमुख तेल सप्लायर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) का कुल ₹1,124 करोड़ का फ्यूल बिल बकाया था। निगमों ने सरकार से इस बकाए को चुकाने के लिए लंबी अपील की थी, जिसके बाद यह पैसा जारी किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के चारों परिवहन निगमों की बसें हर दिन करीब 16.2 लाख लीटर डीजल की खपत करती हैं। सिर्फ डीजल खरीदने पर ही हर महीने औसतन ₹488 करोड़ का खर्च आता है।
महिलाओं को फ्री बस सफर देने वाली 'शक्ति' योजना के तहत सरकार ने जो ₹430 करोड़ जारी किए हैं, उसे चारों निगमों में इस तरह बांटा गया है:
KSRTC: ₹164 करोड़
NWKRTC: ₹105 करोड़
KKRTC: ₹81.8 करोड़
BMTC: ₹78.4 करोड़
सरकार की इस सही समय पर मिली आर्थिक मदद से परिवहन निगमों ने राहत की सांस ली है। अब वे तेल कंपनियों का बकाया चुका सकेंगे और लोगों को बिना किसी रुकावट के बस सर्विस मिलती रहेगी।
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