कर्नाटक हाईकोर्ट के अनुसार, फोन में बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना POCSO और IT एक्ट के तहत गंभीर अपराध है। कोर्ट ने कंटेंट न भेजने की दलील खारिज कर दी। आरोपी को अब ट्रायल का सामना करना होगा।
बेंगलुरु: अगर आपके मोबाइल फोन में बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो या तस्वीरें हैं, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि ऐसा कंटेंट फोन में सिर्फ रखना (स्टोर करना) भी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट के तहत एक गंभीर अपराध है।
केरल के त्रिशूर जिले का केस
यह मामला केरल के त्रिशूर जिले के रहने वाले 38 साल के पी.जे. बिनोज से जुड़ा है। उसके खिलाफ POCSO एक्ट-2012 की धारा 15 और IT एक्ट-2000 की धारा 67(B) के तहत FIR दर्ज हुई थी। बिनोज ने इस FIR और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने इस अर्जी पर सुनवाई की। बिनोज के वकील ने दलील दी कि उसने मोबाइल में मिले वीडियो और तस्वीरें किसी को भेजी नहीं हैं, इसलिए उस पर POCSO और IT एक्ट के तहत केस नहीं बनता। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा, "बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो या तस्वीरों को सिर्फ फैलाना ही नहीं, बल्कि उन्हें फोन में रखना भी POCSO एक्ट की धारा 15 के तहत अपराध है। सुप्रीम कोर्ट भी इस पर अपना रुख साफ कर चुका है।"
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी ने कंटेंट किसी को फॉरवर्ड नहीं किया, उसे अपराध से बरी नहीं किया जा सकता। ट्रायल कोर्ट पहले ही आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर चुका है और मामला सबूतों के स्टेज पर है। कोर्ट ने कहा, "आरोपी को ट्रायल का सामना करना होगा और वहीं खुद को बेगुनाह साबित करना होगा। इस स्टेज पर हम दखल नहीं दे सकते।" यह कहते हुए बेंच ने बिनोज की अर्जी खारिज कर दी।
पूरा मामला क्या है?
आरोपी पी.जे. बिनोज एक दूसरे आपराधिक मामले में फंसा था। जांच के दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया था। जब फोन को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया, तो जांच में स्टोरेज बॉक्स के अंदर बच्चों से जुड़ी ढेर सारी अश्लील तस्वीरें और वीडियो मिले।
इसके बाद, बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट थाने की पुलिस ने बिनोज के खिलाफ IT एक्ट की धारा 67(B) और POCSO एक्ट की धारा 15 के तहत एक नई FIR दर्ज की। इन धाराओं के तहत बच्चों के अश्लील कंटेंट को बनाना, ब्राउज करना, स्टोर करना और फैलाना, सभी दंडनीय अपराध हैं। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। बेंगलुरु की एक स्पेशल कोर्ट (FTSC-1) में आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल चल रहा था। इसी ट्रायल को रुकवाने के लिए बिनोज हाईकोर्ट पहुंचा था।
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