
देश में बढ़ते अपराधों और कानून के प्रति घटते डर को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। एक रेप आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अपराध करना आज इतना आसान हो गया है क्योंकि अपराधियों के खिलाफ कानून पर्याप्त सख्ती से लागू नहीं किया जाता।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को मिले अधिकारों का कई बार गलत फायदा उठाया जाता है। अदालत की यह टिप्पणी अब सोशल मीडिया से लेकर कानूनी हलकों तक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर. नटराज एक 23 वर्षीय छात्र की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी पर बलात्कार का आरोप है और वह 5 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने मौखिक रूप से कहा कि कानून ने अपनी "दांत" खो दिए हैं क्योंकि अपराधियों के साथ पर्याप्त सख्ती नहीं बरती जाती। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि मध्य-पूर्व के कुछ देशों में जिस तरह कठोर दंड दिए जाते हैं, उससे लोग कानून का पालन करने के लिए मजबूर होते हैं। अदालत ने कहा कि यदि अपराधियों को कड़ी सजा का वास्तविक डर हो, तो अपराध करने की प्रवृत्ति कम हो सकती है।
अदालत ने फिलहाल आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया और मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने गलती की है तो उसे उसके परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कुछ समय जेल में बिताने से आरोपी को अपनी स्थिति का एहसास होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT Manipal) में सहपाठी थे। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि जुलाई 2023 में आरोपी ने उससे प्रेम का इजहार किया था। शुरुआत में दोनों के बीच संबंध बने, लेकिन बाद में महिला को आरोपी के व्यवहार और चरित्र को लेकर संदेह हुआ, जिसके बाद उसने उससे दूरी बना ली।
शिकायत के अनुसार, 12 सितंबर 2023 को आरोपी ने रिश्ते को लेकर बातचीत करने के बहाने महिला को अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां उसने कथित रूप से महिला की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाए।
महिला का आरोप है कि घटना के बाद वह गंभीर मानसिक आघात और अवसाद का शिकार हो गई थी। उसने मणिपाल स्थित कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (KMC) में इलाज भी कराया। इसके बाद उसने पहले राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क किया और फिर औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामला उडुपी महिला पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 और 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जो बलात्कार से संबंधित प्रावधान हैं। फिलहाल मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। अदालत ने अभी आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और मामला विचाराधीन है।
यह मामला केवल एक जमानत याचिका तक सीमित नहीं है। हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर देश में कानून के डर, अपराधों की बढ़ती घटनाओं और सजा की प्रभावशीलता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, न्यायालय की ये टिप्पणियां मौखिक थीं और इन्हें अंतिम न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं माना जाता, लेकिन उन्होंने अपराध और दंड व्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है।
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