कौन हैं तहसीलदार अमिता सिंह, शर्मनाक कांड में गईं जेल, KBC में जीत चुकी हैं 50 लाख

Published : Mar 26, 2026, 08:47 PM IST
tehsildar amita singh tomar

सार

Tehsildar Amita Singh Tomar :  केबीसी में 50 लाख रुपए जीतकर सबसे पहले चर्चा में आईं मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की तहसीलदार मैडम अमिता सिंह तोमर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया है। उन पर बाढ़ राहत में करीब 2.5 करोड़ के घोटाले का आरोप है। 

कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) फेम और मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले की तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को पुलिस ने गुरुवार को ग्वालियर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पहले उन्हें श्योपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जज ने फैसला करते हुए सजा सुनाई। बता दें कि महिला अफसर करीब ढाई करोड़ की बाढ़ राहत घोटाले की मुख्य आरोपी हैं। मामले की जांच के बाद तहसीलदार के खिलाफ बड़ौदा थाने में केस दर्ज हैं। इन्हीं मामलों पर आज अदालत में सुनवाई हुई।

बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे में किया करोड़ों का घोटाला

दरअसल, अमिता सिंह तोमर पर आरोप लगे थे कि उन्होंने श्योपिर जिले की बड़ौदा में तहसीलदार रहते हुए बाढ़ की राहत की राशि वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली की थी। वह इसे पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड थीं। उनकी ही देखरेख में यह बड़ा घोटाला हुआ था। जांच के दौरान सामने आया है कि तहसीलदार मैडम ने फर्जी लिस्ट बनाकर लोगों को मुआवजा देना दिखाया था। यह नाम सिर्फ कागजी तौर पर थे। असलियत में यह लोग थे ही नहीं। यूं कहें तो काल्पनिक नामों को मुआवजा बांटकर पैसे खुद रख लिए। जिन लोग इसके हकदार थे वह मुआवजे से वंचित ही रह गए। साथ ही सरकारी खजाना भी कर डाला।

25 पटवारी समेत 100 से ज्यादा कर्मचारी शामिल

बता दें कि श्योपुर जिले के इस फर्जीवाड़े में तहसीलदार अमिता सिंह के अलावा करीब 25 पटवारी समेत 100 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन सब ने मिलकर एक पूरा फर्जी नेटवर्क खड़ा किया और पहले तो अपने परिचितों और रिश्तेदारों के खातों में राशि डाली। इसके बाद कई काल्पनिक नामों को बाढ़ पीड़ित बताया गया। अमिता सिंह तोमर कई दिन से फरार चल रही थीं। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएं लगा चुकी थीं। लेकिन उन्हें कहीं से कोई राहत नहीं मिली।

कौन हैं तहसीलदार अमिता सिंह

अमिता सिंह तोमर साल 2003 में सरकारी नौकरी में आई थीं। इस दौरान उनका चयन नायब तहसीलदार के रूप हुआ था। लेकिन बाद में साल 2011 में प्रमोट होकर तहसीलदार बनीं। बता दें कि अमिता के पति ग्वालियर में ट्रांसपोर्ट कारोबारी हैं। 14 साल की नौकरी में उनके 25 तबादले हो चुके हैं। हाल ही में जब उनका तबादला हुआ तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। वहीं शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट कर न्याय की गुहार लगा चुकी हैं। बता दें कि अमिता सिंह 2011 में केबीसी के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपए जीतकर सबसे पहले चर्चा में आईं थीं।

 

 

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