
कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने एक महिला को उसके ब्रेन डेड पति का स्पर्म इकट्ठा करने और उसे फ्रीज करके सुरक्षित रखने की अंतरिम इजाजत दे दी है। जस्टिस एम.बी. स्नेहलता ने यह आदेश सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि स्पर्म इकट्ठा करने के बाद, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) यानी कृत्रिम गर्भाधान की किसी भी प्रक्रिया के लिए महिला को पहले कोर्ट से अलग से इजाजत लेनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
यह याचिका कन्नूर की रहने वाली एक महिला ने दायर की है। उनके पति को चिकनपॉक्स के बाद सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस हो गया, जिसकी वजह से वे ब्रेन डेड हो गए। फिलहाल, उन्हें वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रखा गया है। महिला ने अपनी याचिका में कहा कि वह भविष्य में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए मां बनना चाहती है, इसलिए उसे अपने पति का स्पर्म सुरक्षित रखने की इजाजत दी जाए।
याचिका में सबसे बड़ी दलील यह दी गई कि पति के ब्रेन डेड होने की वजह से मौजूदा ART कानून के तहत उनकी लिखित सहमति लेना नामुमकिन है। महिला ने यह भी चिंता जताई कि अगर इलाज में देरी हुई, तो वह पितृत्व का मौका हमेशा के लिए खो देगी। इन सभी दलीलों पर विचार करने के बाद ही कोर्ट ने स्पर्म इकट्ठा करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम मंजूरी दी है।
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