
Lalit Modi IPL Controversy 2010: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने करीब डेढ़ दशक पुराने कोच्चि टस्कर्स स्कैंडल को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। यूके (UK) में रह रहे ललित मोदी ने एक इंटरव्यू में सीधा आरोप लगाया है कि साल 2010 में आए इस सियासी तूफान के दौरान कांग्रेस पार्टी की पूरी मशीनरी और खुद तत्कालीन यूपीए (UPA) अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी नेता शशि थरूर के बचाव में उतर आई थीं। ललित मोदी का दावा है कि इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस का एक बहुत बड़ा 'कवर-अप' (मामले को दबाने की साजिश) काम कर रहा था।
#WATCH | IPL founder and first chairman Lalit Modi says, "Nobody has asked this question. How did I allow Kochi to bid in the system?... Kochi didn't even have a stadium. So why did I allow Kochi to come into the system?... Why did I open it for him (Shashi Tharoor)? Because he… pic.twitter.com/M8Q4qTjQi2
— ANI (@ANI) June 4, 2026
कहानी का सबसे रोमांचक और सस्पेंस से भरा हिस्सा तब शुरू होता है जब साल 2010 में नई आईपीएल टीमों के लिए बोलियां लगाई जा रही थीं। ललित मोदी के अनुसार, कोच्चि कंसोर्टियम ने $350 मिलियन की भारी-भरकम बोली लगाकर फ्रेंचाइजी तो हासिल कर ली, लेकिन उसका फाइनेंशियल मॉडल पूरी तरह से संदिग्ध था।
सस्पेंस तब गहरा गया जब कागजातों में 'सुनंदा पुष्कर' नाम की एक अज्ञात महिला को बिना किसी निवेश के कंपनी की 25% फ्री इक्विटी (मुफ्त शेयर) दी जा रही थी। ललित मोदी ने जब इस 'शैडो शेयरहोल्डर' की पहचान पर सवाल उठाए और फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट पर दस्तखत करने से मना कर दिया, तो उनके पास सीधे तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का फोन आया। मोदी का दावा है कि थरूर ने फोन पर उनसे कहा, "ललित, सुनंदा के बारे में मत पूछो, वह मेरी अच्छी दोस्त हैं। अगर तुमने ज्यादा सवाल किए, तो मैं सुबह तुम्हारे यहाँ रेड डलवा दूँगा।" इसके जवाब में मोदी ने फोन पटक दिया था।
#WATCH | IPL founder and first chairman Lalit Modi says, "I know the truth, my friends know the truth. What is there in name clearing? If for 17 years we haven't been able to clear our names, and somebody keeps calling you what they have been calling you, you just live with it… pic.twitter.com/uTypoUmibi
— ANI (@ANI) June 4, 2026
ललित मोदी ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए बताया कि जिस दिन कोच्चि को टीम मिली, उस दिन सुनंदा पुष्कर के 10 रुपये के शेयर की वैल्यू रातों-रात बढ़कर 1 लाख रुपये हो गई थी। जब मोदी ने इस वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ दिल्ली के सत्ता गलियारों में चक्रव्यूह रच दिया गया।
ललित मोदी का आरोप है कि शशि थरूर को बचाने के लिए खुद सोनिया गांधी परदे के पीछे से कमान संभाल रही थीं। मोदी ने दावा किया, "मुझ पर हर तरफ से हमले हो रहे थे। मुझे उस दौर के चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल और तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के फोन आ रहे थे। राजीव शुक्ला मेरे पास आकर कहते थे कि यह करो, वह करो।" मोदी का साफ कहना है कि पूरी सरकार एक भ्रष्ट फाइनेंशियल मॉडल को छिपाने और थरूर को राजनीतिक ढाल देने में जुट गई थी।
इस विवाद का सस्पेंस यहीं खत्म नहीं होता। ललित मोदी ने तत्कालीन बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष शशांक मनोहर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मोदी के मुताबिक, बेंगलुरु में देर रात तक चली एक बैठक के दौरान शशांक मनोहर ने उन पर कोच्चि फ्रेंचाइजी के दस्तावेजों पर तुरंत दस्तखत करने का भारी दबाव बनाया।
#WATCH | On the 'fugitive' tag, IPL founder and first chairman Lalit Modi says, "I'm not running at all... The Indian government has a long arm. You can't take on the government of India. And I don't intend to, and I don't want to... Not a single case against me has been… pic.twitter.com/zwqALNoY1g
— ANI (@ANI) June 4, 2026
मोदी ने सुबह तक का वक्त मांगा, लेकिन मनोहर नहीं माने। आखिरकार भारी दबाव में आकर मोदी ने दस्तखत तो किए, लेकिन फाइल पर एक नोट लिख दिया कि वे यह हस्ताक्षर अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अध्यक्ष के दबाव में आकर कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस विवाद के बढ़ने के बाद अप्रैल 2010 में थरूर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और साल 2011 में कोच्चि फ्रेंचाइजी को बीसीसीआई ने सस्पेंड कर दिया था।
ललित मोदी ने 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक आलीशान होटल में मृत पाई गईं सुनंदा पुष्कर को लेकर भी एक रहस्यमयी खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि मौत वाली सुबह सुनंदा उनके साथ ट्विटर पर बातचीत कर रही थीं। सुनंदा ने मोदी से पूछा था, "क्या मैं यह सब (कोच्चि स्कैंडल का सच) सबको बता दूं?" जिस पर मोदी ने कहा था, "हां, ज़रूर बता दो।" लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद उनकी संदेहास्पद मौत हो गई।
इंटरव्यू के आखिर में, जब मोदी से बीजेपी नेताओं जैसे वसुंधरा राजे और दिवंगत केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के साथ उनके संबंधों और पुर्तगाल के लिए आपातकालीन यात्रा दस्तावेज (Emergency Travel Documents) मिलने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह मानवीय मामला बताया। मोदी ने भावुक होते हुए कहा, “मेरी पत्नी को ब्रेन ट्यूमर था और वह जिंदगी की आखिरी जंग लड़ रही थी। परिवार के लिए इंसान अपनी जेब का आखिरी पत्ता भी चल देता है। मेरे लिए वह पत्ता सुषमा स्वराज थीं, जिन्हें मैं जानता था और मैंने अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए उस आखिरी मौके का इस्तेमाल किया।”
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