
Lohagad Fort Haunted Story: महाराष्ट्र का मशहूर लोहागढ़ किला इन दिनों एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। पुणे में हुए हाई-प्रोफाइल मंगेतर मर्डर केस के बाद से लोग इस किले के बारे में इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। वैसे तो सिया गोयल और केतन अग्रवाल मामला पुलिस जांच से जुड़ा है और इसका किले की पुरानी कहानियों से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है, लेकिन इस घटना ने लोहागढ़ के उस इतिहास और उन अनसुलझे रहस्यों को दोबारा लाइमलाइट में ला दिया है, जिन्हें सुनकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। लोनावला के पास सह्याद्रि पहाड़ियों पर करीब 1030 मीटर की ऊंचाई पर बना यह किला दिखने में जितना खूबसूरत है, इसका अतीत उतना ही गहरा और चौंकाने वाला है। बारिश के मौसम में धुंध से घिरे इस किले में आज भी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। आइए जानते हैं लोहागढ़ किले से जुड़े उन अनसुलझे रहस्यों के बारे में, जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं...
लोहागढ़ किले पर जाने वाले कई ट्रैकर्स, सैलानियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि जब किले पर भारी धुंध या कोहरा होता है, तो थोड़ी दूरी पर एक पुराना गार्ड या चौकीदार जैसा साया दिखाई देता है। वह साया वहां आने वाले लोगों को हाथ से इशारा करता है या रास्ता दिखाता है, लेकिन जैसे ही कोई उसके करीब जाने की कोशिश करता है, वह पलक झपकते ही कोहरे में गायब हो जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, लेकिन स्थानीय गाइड और ट्रैवलर्स के बीच यह कहानी सालों से सुनी और सुनाई जाती है।
लोहागढ़ किले के चार मुख्य दरवाजे हैं, गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा, हनुमान दरवाजा और महा दरवाजा। इनमें से जो पहला फाटक है यानी 'गणेश दरवाजा', उसे लेकर एक बेहद डरावनी कहानी मशहूर है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, जब इस दरवाजे की नींव रखी जा रही थी, तो वह बार-बार ढह जाती थी। तब वहां के एक अधिकारी को सपना आया कि यह जगह श्रापित है और इसे ठीक करने के लिए 'मानव बलि' देनी होगी। कहानी कहती है कि तब एक पुरुष और महिला को इस दरवाजे की नींव के नीचे जिंदा चुनवा दिया गया था। इस खौफनाक किस्से का इतिहास में कोई लिखित प्रमाण तो नहीं मिलता, लेकिन आज भी लोग इस दरवाजे से गुजरते वक्त एक अजीब सी सिहरन महसूस करते हैं।
बारिश के दिनों में जब यह किला पूरी तरह सुनसान हो जाता है, तब शाम के बाद यहां कुछ अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देने की बातें कही जाती हैं। कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें किले के खाली कोनों से किसी के सीटी बजाने, भारी कदमों से चलने या आपस में फुसफुसाने की आवाजें आती हैं। विज्ञान को मानने वाले लोगों का कहना है कि किले की बनावट और पहाड़ों के बीच चलने वाली तेज हवाओं के टकराने की वजह से ऐसे साउंड इफेक्ट्स पैदा होते हैं, लेकिन रात के सन्नाटे में ये आवाजें किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं।
2000 साल पुराने इस किले का इतिहास सातवाहन काल से जुड़ा है। साल 1648 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस पर कब्जा किया था और बाद में पेशवा काल में नाना फडणवीस ने भी यहां एक लंबा समय बिताया। पुराने दौर में इस किले का इस्तेमाल सरकारी खजाने और मिलिट्री बेस के रूप में होता था। कहा जाता है कि किले के अंदर कई ऐसी गुप्त सुरंगें और तहखाने हैं, जो नीचे के गांवों में निकलते थे ताकि युद्ध के समय राजा सुरक्षित बाहर निकल सकें। लोगों का मानना है कि उन बंद पड़े रास्तों में आज भी पुराना खजाना छुपा हो सकता है, लेकिन आज तक उन गुप्त रास्तों का पूरा नक्शा कोई नहीं ढूंढ पाया।
लोहागढ़ फोर्ट के रहस्यों को लेकर दो तरह की राय है। एक तरफ वे लोग हैं जो इन कहानियों पर यकीन करते हैं। दूसरी तरफ इतिहासकार और विशेषज्ञ हैं, जो इन्हें लोककथाएं और सालों से चली आ रही कहानियां मानते हैं। सच्चाई चाहे जो भी हो, इतना जरूर है कि लोहागढ़ फोर्ट सिर्फ एक ट्रैकिंग स्पॉट नहीं, बल्कि इतिहास, रोमांच और रहस्य का ऐसा मिश्रण है, जो हर साल हजारों लोगों को अपनी ओर खींचता है।
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