उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों में 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर दरारें आने के बाद NHAI ने टोल वसूली रोक दी है. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले कई अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

लखनऊः नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने नवनिर्मित कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स की वसूली तत्काल प्रभाव से रोक दी है। यह बड़ा फैसला एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही हफ़्तों के भीतर सड़क के कई हिस्सों के धंसने और खराब गुणवत्ता की शिकायतों के बाद लिया गया है। करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह पैचवर्क की भी खबरें थीं। अधिकारियों और कंपनी पर एक्शन NHAI ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लखनऊ स्थित प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। PIU लखनऊ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को डिबार कर दिया गया है। 

मतलब, उन्हें इस तरह के प्रोजेक्ट्स से अलग कर दिया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं, इसी यूनिट के चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। NHAI ने साफ कर दिया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ज़ाहिर है, मामला सिर्फ़ कुछ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। अथॉरिटी ने इस मामले में कंसेशनेयर और इंडिपेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ भी एक्शन लिया है। 

यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि निर्माण की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार सभी पक्षों की जवाबदेही तय हो। युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम जारी शिकायतों के सामने आने के बाद अब एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। NHAI का लक्ष्य सड़क को उसकी मूल और सही स्थिति में जल्द से जल्द वापस लाना है। यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि करोड़ों की लागत से बने एक महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे का यह हाल उद्घाटन के फौरन बाद हो गया। अब सवाल यही है कि आखिर निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।