ग्लोबल क्राइसिस का बड़ा असर: LPG की खपत 13% घटी, भारत में सप्लाई पर असर

Published : Apr 19, 2026, 02:23 PM IST
LPG Consumption Drops 13 percent in India Amid Middle East Crisis Supply Disruptions Hit Demand

सार

LPG consumption India: मार्च 2026 में भारत में LPG खपत में 13% की गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट तनाव और सप्लाई बाधाओं का असर घरेलू व कमर्शियल यूजर्स पर पड़ा। जानें पूरा मामला, सरकारी रणनीति और ऊर्जा सेक्टर पर इसका प्रभाव।

मार्च 2026 भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक असामान्य महीना साबित हुआ। आमतौर पर लगातार बढ़ती रहने वाली कुकिंग गैस (LPG) की खपत में इस बार अचानक गिरावट दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ एक सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर है, जिसने भारत की ऊर्जा आपूर्ति की नाजुक निर्भरता को फिर उजागर कर दिया है।

मार्च में LPG खपत में 12.8% की गिरावट

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में देश में LPG की कुल खपत घटकर 2.379 मिलियन टन रह गई, जो पिछले साल मार्च के 2.729 मिलियन टन के मुकाबले 12.8% कम है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है।

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मिडिल ईस्ट तनाव बना मुख्य वजह

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ा दी। इसका सबसे बड़ा असर सप्लाई रूट्स पर पड़ा, खासकर होर्मुज स्ट्रेट लगभग बाधित हो गया। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आने वाली गैस सप्लाई में भी रुकावट आई, जिससे भारत को अपने घरेलू वितरण तंत्र में प्राथमिकताएं तय करनी पड़ीं।

सरकार की रणनीति: घरेलू यूजर्स को प्राथमिकता

सप्लाई दबाव को देखते हुए सरकार ने एक अहम फैसला लिया-

  • होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री जैसे कमर्शियल सेक्टर में LPG सप्लाई घटाई गई
  • ताकि घरेलू रसोई के लिए गैस की उपलब्धता बनी रहे

हालांकि, सरकार का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी की जा रही हैं, लेकिन आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं।

घरेलू और कमर्शियल सेल में बड़ी गिरावट

PPAC डेटा के अनुसार:

  • घरेलू LPG सिलेंडर बिक्री में 8.1% की गिरावट (2.219 मिलियन टन)
  • गैर-घरेलू यूजर्स में लगभग 48% की भारी गिरावट
  • थोक LPG बिक्री में 75.5% की ऐतिहासिक गिरावट

यह साफ संकेत देता है कि संकट का सबसे बड़ा असर होटल, इंडस्ट्री और बड़े उपभोक्ताओं पर पड़ा।

घरेलू उत्पादन बढ़ाकर कमी की भरपाई की कोशिश

सप्लाई गैप को भरने के लिए सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक को LPG उत्पादन की ओर मोड़ें। इसका असर भी दिखा:

  • मार्च में घरेलू LPG उत्पादन बढ़कर 1.4 मिलियन टन हो गया (पिछले साल 1.1 मिलियन टन)

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में:

  • कुल उत्पादन बढ़कर 13.1 मिलियन टन पहुंच गया
  • जबकि पिछले दो वर्षों में यह 12.8 मिलियन टन था

सालाना खपत में फिर भी 6% की ग्रोथ

मार्च की गिरावट के बावजूद, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में LPG खपत 6% बढ़कर 33.212 मिलियन टन रही। यह लगातार बढ़ती मांग का संकेत है, जिसकी बड़ी वजह सरकार की स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने वाली नीतियां हैं, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और कोयले के विकल्प के रूप में LPG का विस्तार।

अन्य ईंधनों का हाल: पेट्रोल-डीजल में तेजी, ATF ठहरा

  • पेट्रोल बिक्री: 7.6% बढ़कर 3.78 मिलियन टन
  • डीजल खपत: 8.1% बढ़कर 8.727 मिलियन टन
  • ATF (जेट फ्यूल): लगभग स्थिर (807,000 टन)

हवाई क्षेत्र में बाधाओं और उड़ानों पर असर के कारण ATF की मांग नहीं बढ़ पाई, जबकि सड़क परिवहन से जुड़े ईंधनों में तेजी बनी रही।

औद्योगिक ईंधनों में गिरावट, बिटुमेन में बढ़ोतरी

  • नेफ्था: 9.9% गिरावट
  • फ्यूल ऑयल: 1.4% गिरावट
  • बिटुमेन (सड़क निर्माण): 3% बढ़कर 8.84 मिलियन टन

यह ट्रेंड बताता है कि जहां कुछ इंडस्ट्री धीमी पड़ी हैं, वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां जारी हैं।

क्या भारत को ऊर्जा आयात पर पुनर्विचार करना होगा?

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना भारत के लिए एक चेतावनी है।

  • अत्यधिक आयात निर्भरता
  • सीमित रणनीतिक भंडारण
  • और वैश्विक तनावों का सीधा असर

इन सभी कारकों ने यह दिखा दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक मुद्दा बन चुकी है। मार्च 2026 में LPG खपत में आई गिरावट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और भारत की ऊर्जा नीति के बीच गहरे संबंध को उजागर करती है।

जहां सरकार ने तत्काल राहत के लिए उत्पादन बढ़ाने और प्राथमिकता तय करने जैसे कदम उठाए हैं, वहीं दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना अब अनिवार्य होता जा रहा है।

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