Lucknow Gomti Nagar to Daliganj corridor: ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। गोमतीनगर से डालीगंज तक ग्रीन कॉरिडोर खुलने से सफर सिर्फ 5–7 मिनट में पूरा होगा। जानिए किन इलाकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा और कैसे बदलेगी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था।
लखनऊ में रहने वालों के लिए ट्रैफिक जाम कोई नई बात नहीं है। खासकर गोमतीनगर, निशातगंज, हनुमान सेतु और डालीगंज जैसे इलाकों में रोज़ाना लगने वाला जाम ऑफिस टाइम को तनाव और थकान में बदल देता है। लेकिन अब शहर की इसी सबसे बड़ी परेशानी का एक ठोस समाधान ज़मीन पर उतर चुका है। गोमतीनगर से डालीगंज को जोड़ने वाला ग्रीन कॉरिडोर सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी को आसान बनाने की कोशिश है।
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5 से 7 मिनट में पूरा होगा डालीगंज- गोमतीनगर का सफर
अब तक डालीगंज से गोमतीनगर तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट या उससे भी ज्यादा समय लग जाता था। वजह साफ थी—निशातगंज चौराहा, हनुमान सेतु और आसपास की संकरी सड़कें। ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण के चालू होते ही यही सफर महज 5 से 7 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा उन एक लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा, जो रोज़ इस रूट से गुजरते हैं और घंटों जाम में फंसते हैं।
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निशातगंज और हनुमान सेतु पर जाम की समस्या कैसे होगी खत्म
निशातगंज चौराहा लंबे समय से ट्रैफिक का सबसे बड़ा बॉटलनेक रहा है। यहां चौराहे की री-डिजाइनिंग की गई है, जिससे वाहनों का फ्लो बिना रुके आगे बढ़ सके। वहीं, बीरबल साहनी मार्ग से हनुमान सेतु तक सड़क चौड़ीकरण और डामरीकरण का काम पूरा होने से अब भारी ट्रैफिक भी आसानी से निकल पाएगा। हनुमान सेतु से डालीगंज तक बने फ्लाइओवर ने इस पूरे रूट को सिग्नल-फ्री बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
इस रूट का सबसे बड़ा लाभ ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, व्यापारियों और छात्रों को मिलेगा। गोमतीनगर, इंदिरानगर और आसपास के इलाकों से विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और पुराने लखनऊ की ओर जाने वालों के लिए अब समय की बचत होगी। कम समय में सफर पूरा होने का मतलब है, कम ईंधन खर्च, कम प्रदूषण और मानसिक तनाव में कमी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस ग्रीन कॉरिडोर को सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा। चौड़ी सड़कें, बेहतर ड्रेनेज, फ्लाइओवर और सुगम ट्रैफिक मूवमेंट—इन सभी का मकसद शहर को भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार करना है। IIM से पक्का पुल तक बने पहले चरण पर पिछले डेढ़ साल से ट्रैफिक सुचारू रूप से चल रहा है, जिससे यह साफ हो चुका है कि यह मॉडल व्यवहारिक और कारगर है।
ग्रीन कॉरिडोर के चालू होने से सिर्फ इसी रूट पर नहीं, बल्कि आसपास की सड़कों पर भी ट्रैफिक दबाव कम होगा। चारबाग, अलीगंज और पुराने लखनऊ की ओर जाने वाले कई वाहन अब इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल करेंगे, जिससे शहर के दूसरे हिस्सों में भी जाम की स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
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आम लखनऊवासी के लिए इसका असली मतलब
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा असर आम आदमी की दिनचर्या पर पड़ेगा। समय पर ऑफिस पहुंचना, बच्चों को स्कूल से लाने-ले जाने में आसानी, इमरजेंसी में तेज़ आवाजाही—ये सब फायदे सीधे जनता से जुड़े हैं। ग्रीन कॉरिडोर लखनऊ के लिए एक संकेत है कि शहर अब ट्रैफिक समाधान को लेकर दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, यह ग्रीन कॉरिडोर किसी एक दिन के कार्यक्रम से ज्यादा अहम है। इसकी असली परीक्षा रोज़ सड़क पर दिखेगी—जब जाम कम होगा, सफर आसान होगा और लखनऊ की रफ्तार सच में तेज़ नजर आएगी।
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