
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 मार्च, गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के दिन इंदौर के इस्कॉन मंदिर से “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तीसरे चरण की शुरुआत करेंगे। इंदौर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी नदियों और जल स्रोतों के पास कार्यक्रम आयोजित कर इस अभियान की शुरुआत की जाएगी। यह अभियान करीब साढ़े तीन महीने तक चलेगा और 30 जून को इसका समापन होगा।
इस अभियान का संचालन हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। जिला कलेक्टर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके नेतृत्व में जिला स्तर पर जल गंगा संवर्धन समिति कार्ययोजना बनाकर निगरानी करेगी। इस समिति में जिला पंचायत, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संगठन, औद्योगिक संस्थान, कृषि व शोध संस्थान, संत-महात्मा और समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल होंगे। विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे और स्थानीय समिति कार्यों की निगरानी करेगी।
इस अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, कृषि, उद्योग, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जनसंपर्क सहित कुल 18 विभाग शामिल होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग को सह-नोडल विभाग बनाया गया है।
अभियान के तहत वर्ष 2025 में शुरू किए गए 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर और 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज कार्यों को पूरा किया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 2.0 के तहत 2200 जल संरक्षण कार्य किए जाएंगे। पुराने चेकडैम और स्टॉपडैम की मरम्मत और नवीनीकरण भी किया जाएगा। तालाब, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं से गाद निकालकर उसे किसानों को उपयोग के लिए दिया जाएगा।
इस वर्ष अभियान के तहत करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण और संचयन से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इसमें नए तालाब बनाना, पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, कुएं-बावड़ियों की मरम्मत, नहरों का निर्माण और सुधार, सूखी नदियों का पुनर्जीवन और भूजल रिचार्ज के लिए संरचनाएं बनाना शामिल है।
अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही बांधों के गेटों की मरम्मत और जल संरचनाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे वर्षा जल का बेहतर संचयन हो सके और भूजल स्तर बढ़े।
मनरेगा के तहत खेत तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज कार्यों को पूरा किया जाएगा और नए कार्य भी शुरू होंगे। नगरीय क्षेत्रों में अमृत 2.0 योजना के तहत जल संरक्षण संरचनाओं का सुधार और निर्माण किया जाएगा। वन विभाग लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में भूजल संवर्धन के लिए बोल्डर चेकडैम, ब्रशवुड चेकडैम, परकोलेशन पिट्स और कंटूर ट्रेंच जैसे कार्य करेगा।
जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण नहरों की सफाई और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेंगे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल की गुणवत्ता जांचेगा और जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करेगा।
इस अभियान के लिए विभागीय बजट के साथ-साथ सांसद निधि, विधायक निधि, जनभागीदारी और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का भी उपयोग किया जाएगा।
यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलाया जाएगा। जिला कलेक्टर विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जल संरक्षण के कार्यों की योजना बनाकर उन्हें समय पर पूरा कराएंगे। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक वर्षा जल संचयन करना, भूजल स्तर बढ़ाना और जल स्रोतों को स्थायी बनाना है।
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