क्या चंडीगढ़ सेक्टर-11 में 13 गोलियों की टारगेटेड किलिंग पहले से प्लान थी? कौन थे मास्कधारी हमलावर जो CCTV में दिखे और बाइक से फरार हो गए? क्या ऑटोमैटिक हथियार इस्तेमाल कर कैशियर जानकी दास को खास निशाना बनाया गया? आखिर बिना धमकी के दिन-दहाड़े हुई यह सनसनीखेज हत्या का असली मकसद क्या है?
चंडीगढ़: देश के सबसे सुरक्षित और व्यवस्थित शहरों में शुमार 'द सिटी ब्यूटीफुल' शनिवार की दोपहर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। चंडीगढ़ के सबसे व्यस्त और पॉश बाजारों में से एक, सेक्टर 11 के एक मशहूर मेडिकल स्टोर के भीतर घुसकर नकाबपोश हमलावरों ने कैशियर की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। इस दुस्साहसी वारदात को उस समय अंजाम दिया गया जब बाजार में सैकड़ों लोगों की चहल-पहल थी। हमलावरों ने जिस बेरहमी और सधे हुए अंदाज से इस हत्याकांड को अंजाम दिया है, उसने पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोपहर के 2:30 बजे... और अचानक गूंज उठीं 13 गोलियां
शनिवार दोपहर के करीब 2:30 बज रहे थे। पीजीआईएमईआर (PGIMER) अस्पताल के ठीक पास स्थित सेक्टर 11 का केमिस्ट मार्केट रोजाना की तरह ग्राहकों से गुलजार था। इसी बाजार के एक नामचीन मेडिकल स्टोर में कैशियर जानकी दास (मूल निवासी, रोहड़ू, हिमाचल प्रदेश) काउंटर पर बैठकर अपने रोजमर्रा के हिसाब-किताब में व्यस्त थे। तभी दुकान के बाहर एक मोटरसाइकिल आकर रुकी, जिस पर तीन युवक सवार थे। एक युवक बाइक स्टार्ट कर बाहर ही खड़ा रहा, जबकि अन्य दो युवक तेजी से दुकान के भीतर दाखिल हुए।
सीसीटीवी (CCTV) में कैद मौत का लाइव वीडियो: सिर्फ 60 सेकंड का खेल
पूरी वारदात दुकान के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसका फुटेज रोंगटे खड़े कर देने वाला है। वीडियो में दिख रहा है कि 20-25 साल की उम्र के दो युवक, जिन्होंने चेहरे पर मास्क लगा रखा था, बेहद सामान्य तरीके से दुकान में आते हैं। जैसे ही वे कैशियर जानकी दास के बिल्कुल करीब पहुंचते हैं, दोनों अपने कपड़ों के भीतर से चमचमाते हुए ऑटोमैटिक हथियार निकाल लेते हैं। बिना एक पल गंवाए, एक हमलावर जानकी दास पर प्वाइंट ब्लैंक रेंज से ट्रिगर दबा देता है। दुकान के भीतर ताबड़तोड़ 13 राउंड फायरिंग की गई। गोलियों की आवाज से पूरी दुकान धुएं और बारूद की गंध से भर गई, और जानकी दास लहूलुहान होकर वहीं काउंटर के पीछे गिर पड़े।
टारगेटेड किलिंग का सस्पेंस: लुटेरे नहीं, वे 'सुपारी किलर' थे!
इस खौफनाक वारदात के पीछे की क्रोनोलॉजी पुलिस को भी हैरान कर रही है। सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर है कि हमलावरों का मकसद लूटपाट कतई नहीं था। दुकान के काउंटर पर लाखों का कैश पड़ा था, लेकिन हमलावरों ने उसे छुआ तक नहीं। वारदात के वक्त दुकान में अन्य कर्मचारी और ग्राहक भी मौजूद थे, लेकिन शूटरों ने किसी दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाया। उनका इकलौता टारगेट सिर्फ और सिर्फ जानकी दास थे। इस बात ने साफ कर दिया है कि यह एक सोची-समझी 'टारगेटेड किलिंग' (खास मकसद से की गई हत्या) का मामला है। हालांकि, दुकान के मालिक ने पुलिस को बताया है कि घटना से पहले उन्हें या उनके स्टाफ को किसी भी तरह की फिरौती या धमकी की कॉल नहीं मिली थी।
चंडीगढ़ पुलिस का चक्रव्यूह: क्या पकड़े जाएंगे नकाबपोश शिकारी?
वारदात को अंजाम देने के ठीक बाद दोनों शूटर हवा में हथियार लहराते हुए बाहर दौड़े और पहले से स्टार्ट खड़ी मोटरसाइकिल पर अपने तीसरे साथी के साथ बैठकर पलक झपकते ही भीड़भाड़ वाले बाजार से रफूचक्कर हो गए। सरेआम हुई इस हत्या से पूरे सेक्टर 11 बाजार में हड़कंप मच गया और व्यापारियों ने डर के मारे अपनी दुकानें बंद कर दीं। सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारी भारी पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से गोलियों के खाली खोल बरामद किए हैं। हमलावरों की पहचान और उनकी बाइक का रूट ट्रैक करने के लिए पूरे शहर के नाकों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। आखिर हिमाचल के रहने वाले एक सीधे-साधे कैशियर से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती थी? इस खूनी रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है।


