Vijay TVK government 100 days: कैबिनेट में दलितों को जगह देकर सोशल इंजीनियरिंग का दांव. और सबसे बड़ी बात, सीएम ने आम लोगों में यह भरोसा जगाया है कि सरकारी काम बिना घूस दिए भी हो सकते हैं.
Vijay CM 100 days: तमिलनाडु में अभिनेता से मुख्यमंत्री बने विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार ने 100 दिन पूरे कर लिए हैं। सरकार के शुरुआती कार्यकाल में मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की रणनीति सबसे ज्यादा चर्चा में रही है। हालांकि, विपक्षी DMK लगातार सरकार पर निशाना साधते हुए इसे महज दिखावे की सरकार बता रही है।
फिल्मी अंदाज में हुई सरकार की शुरुआत
विजय सरकार का शपथ ग्रहण समारोह भी काफी सुर्खियों में रहा। पहली बार गठबंधन सहयोगियों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने का फैसला किया गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने अपने राजनीतिक विरोधियों के घर जाकर मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं।
कैबिनेट में दलित समुदाय से जुड़े चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर TVK ने सोशल इंजीनियरिंग का संदेश देने की कोशिश की। हालांकि, सरकार की शुरुआती उपलब्धियों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि विजय ने आम लोगों के बीच बिना रिश्वत सरकारी काम कराने की उम्मीद पैदा की।
विधानसभा में पारदर्शिता पर जोर
विजय सरकार ने विधानसभा की कार्यवाही को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए पहली बार सदन की कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट शुरू किया। सरकार का दावा है कि इससे विधानसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता बढ़ी है और आम लोगों की राजनीतिक गतिविधियों में रुचि भी बढ़ी है।
इसके अलावा शराब बिक्री से जुड़ी सरकारी एजेंसी TASMAC में सुधार, महिला सुरक्षा के लिए 'सिंगप्पेन' टास्क फोर्स का गठन और महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी घोषणाओं को भी सरकार की प्रमुख पहलों में गिना जा रहा है।
निवेश के मोर्चे पर बड़ा दावा
TVK सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित इन्वेस्टमेंट समिट को भी अपनी उपलब्धियों में शामिल किया है। सरकार के मुताबिक, समिट के दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoU) पर सहमति बनी। अब इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
विपक्षी गठबंधन में सेंध बड़ी राजनीतिक उपलब्धि
विजय सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश को माना जा रहा है। TVK ने DMK गठबंधन को कमजोर करने और उसके कुछ महत्वपूर्ण सहयोगियों को अपने साथ लाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
हालांकि, इन राजनीतिक फैसलों पर विवाद भी हुआ है। AIADMK विधायकों से इस्तीफा दिलाने और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर चुके नेता सी. विजयभास्कर को पार्टी में शामिल करने जैसे फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
अनुभवहीन मंत्रिमंडल बना चुनौती
सरकार की सबसे बड़ी कमजोरियों में मंत्रियों का अनुभव भी शामिल है। TVK के कई मंत्री पहली बार सत्ता में आए हैं और प्रशासन चलाने का अनुभव सीमित है। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमला कर रहा है।
केंद्र सरकार के साथ संबंधों को लेकर भी TVK की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र से मिलने वाले फंड में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए BJP को नाराज नहीं करने की नीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
अब उपचुनाव में होगी पहली बड़ी परीक्षा
100 दिन पूरे होने के बाद अब TVK सरकार के सामने पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा उपचुनाव होंगे। राज्य की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट भी शामिल है। यह सीट विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।
इन उपचुनावों के नतीजे यह संकेत देंगे कि विजय की लोकप्रियता वोटों में कितनी बदल पाती है और TVK की सरकार को जनता का शुरुआती समर्थन किस स्तर तक हासिल है। आने वाले महीने विजय सरकार के लिए लोकप्रियता को प्रशासनिक प्रदर्शन और राजनीतिक ताकत में बदलने की असली परीक्षा साबित होंगे।
