OPS vs NPS: OPS बहाली की मांग फिर क्यों तेज? क्या NPS से रिटायरमेंट सुरक्षा कमजोर हो रही है? 2009 बैच को कम वेतन क्यों मिल रहा है-क्या यह वेतन असमानता नहीं है? मेडिकल भत्ता ₹300 से ₹2000 और शिक्षा भत्ता ₹5000 तक बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी? हर 5 साल पेंशन संशोधन और बेहतर फिटमेंट फैक्टर क्या अब जरूरी सुधार बन चुके हैं?

श्रीनगर/जम्मू: देश में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। इसी बीच, जम्मू-कश्मीर से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार और वेतन आयोग के सामने एक बड़ा मांग पत्र सौंप दिया है। जम्मू-कश्मीर जनरल लाइन टीचर्स फोरम (JKGLTF) ने ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉई फेडरेशन (AINPSEF) के साथ मिलकर वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन नीति में आमूल-चूल बदलाव की वकालत की है। वर्षों से अनसुलझी इन चिंताओं को लेकर शिक्षकों का साफ कहना है कि अब और इंतजार मुमकिन नहीं है।

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OPS की वापसी या नई पेंशन की गारंटी? सबसे बड़ा टकराव यहीं से शुरू

शिक्षकों की सबसे बड़ी और विवादित मांग नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की है। फोरम ने नीति निर्माताओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में रिटायरमेंट के बाद शिक्षकों का भविष्य असुरक्षित है। शिक्षक संघ का तर्क है कि वे बाजार के जोखिमों पर निर्भर रहने के बजाय एक गारंटीकृत पेंशन व्यवस्था चाहते हैं जो उनके बुढ़ापे को आर्थिक सुरक्षा दे सके। इसके साथ ही, नेशनल काउंसिल-Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने भी मांग उठाई है कि हर पांच साल में नियमित पेंशन संशोधन होना चाहिए और पारिवारिक पेंशन को 30% से बढ़ाकर अधिक किया जाए, ताकि पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद आश्रितों को आर्थिक तंगी न झेलनी पड़े।

वेतन का खेल: जब जूनियर की सैलरी सीनियर से ज्यादा हो गई!

इस मांग पत्र में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मुद्दा वेतन विसंगति (Salary Disparity) का उठाया गया है। फोरम के अनुसार, 7वें केंद्रीय वेतन आयोग और प्रमोशन के पेचीदा नियमों के कारण एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है। साल 2009 में नियुक्त हुए अनुभवी जनरल लाइन शिक्षकों को वर्तमान में कम सर्विस वाले अपने जूनियर कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन मिल रहा है। इस आर्थिक नुकसान और अपमान को ठीक करने के लिए शिक्षकों ने पिछले समय से लागू होने वाले लाभों (Retrospective Benefits) के साथ एकमुश्त सुधार प्रणाली की मांग की है। इसके अतिरिक्त, 2019 बैच के योग्य शिक्षकों के लिए दो नोशनल इंक्रीमेंट देने की सिफारिश भी की गई है।

भत्तों में 6 गुना तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव: क्या मानेगी सरकार?

शिक्षकों ने अपनी मांगों में महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्चों का हवाला देते हुए भत्तों में भारी बदलाव का प्रस्ताव रखा है:

भत्ता प्रकारवर्तमान राशि (प्रती माह)प्रस्तावित राशि (प्रति माह)
मेडिकल भत्ता (Medical Allowance)₹300₹2,000
बच्चों का शिक्षा भत्ता (CEA)₹2,813₹5,000 (प्रति बच्चा)

शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में मिल रहा 300 रुपये का मेडिकल भत्ता आज के समय में इलाज के खर्चों के सामने एक भद्दा मजाक है। वहीं, बच्चों की पढ़ाई का असल खर्च मौजूदा भत्ते से कहीं अधिक है। इसके अलावा, नॉन-फंक्शनल प्रमोशन के लिए इंतजार की अवधि को 9 साल से घटाकर 5 या 6 साल करने और प्रमोशन के बाद पे लेवल-6A के बजाय सीधे पे लेवल-7 (ग्रेड पे 4600) देने की मांग की गई है।

दिव्यांग कर्मचारियों के लिए विशेष चक्रव्यूह और समानता की जंग

घाटी और जम्मू के दुर्गम भौगोलिक, कठिन मौसमी और चुनौतीपूर्ण सामाजिक-आर्थिक हालातों का हवाला देते हुए फोरम ने मांग की है कि दिल्ली या अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तर्ज पर यहां के शिक्षकों को भी पूरी समानता और सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, दिव्यांग कर्मचारियों (PwDs) के लिए विशेष रियायतों की मांग की गई है। दिव्यांगता और ट्रांसपोर्ट भत्ते को बढ़ाने, अतिरिक्त छुट्टियों के प्रावधान, विशेष टैक्स छूट और पक्के रिटायरमेंट लाभों को मजबूत करने की अपील की गई है ताकि उन्हें स्वास्थ्य देखभाल और सहायक तकनीकों के अतिरिक्त खर्चों से राहत मिल सके। अब देखना यह है कि 8वां वेतन आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है।