Krishak Kalyan Varsh 2026: डॉ मोहन यादव की सरसों, उड़द बोनस और MSP पर बड़ी घोषणाएं

Published : Feb 23, 2026, 05:08 PM IST
mohan yadav Krishak Kalyan Varsh 2026

सार

मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरसों पर भावांतर योजना, उड़द पर ₹600 बोनस, चना-मसूर की MSP खरीद और तुअर उपार्जन के प्रस्ताव जैसी बड़ी घोषणाएँ की हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को विधानसभा सत्र में “कृषक कल्याण वर्ष 2026” पर वक्तव्य देते हुए कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ बनाना भी है। जब किसान समृद्ध होंगे, तभी “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” का लक्ष्य पूरा होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पाँच प्रमुख फसलों- उड़द, सरसों, चना, मसूर और तुअर के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं, जिनसे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

सरसों पर भावांतर योजना: MSP से कम दाम पर मिलेगा अंतर भुगतान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में सरसों के रकबे में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत वृद्धि हुई है। द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार सरसों का उत्पादन 15.71 लाख मीट्रिक टन आंका गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की मूल्य नीति का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना है। वर्तमान में जनवरी माह में सरसों की औसत मंडी दर लगभग 6000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6200 रुपये प्रति क्विंटल है।

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि सरसों का उपार्जन भावांतर योजना के नियमानुसार किया जाएगा, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके। इसके लिए केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है। योजना के तहत यदि एफएक्यू (FAQ) सरसों को MSP से कम मूल्य मिलता है, तो अंतर राशि का भुगतान किया जाएगा। पंजीकृत किसानों को उनके रकबे और राज्य की औसत उत्पादकता के आधार पर पात्रतानुसार भुगतान किया जाएगा।

उड़द पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस: दलहन उत्पादन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में दलहनी फसलों का संतुलित उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के अधिक उत्पादन के कारण उत्पन्न उपार्जन और विपणन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने उड़द की ग्रीष्मकालीन फसल पर प्रति किसान 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। यह बोनस न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि किसान मूंग के स्थान पर उड़द की खेती को अपनाएँ, जिससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिले और बाजार संतुलन बना रहे।

चना और मसूर का समर्थन मूल्य पर उपार्जन: पंजीयन प्रक्रिया जारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि प्रदेश में चना और मसूर की फसल का उपार्जन प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत किया जाएगा। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन और मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि चना और मसूर की खरीद 24 मार्च से 30 मई 2026 तक प्रस्तावित है। इसके लिए किसानों का पंजीयन 20 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके।

तुअर उपार्जन के लिए केंद्र को प्रस्ताव: नाफेड और एनसीसीएफ की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीफ फसल तुअर के उपार्जन के लिए भी सरकार सक्रिय है। प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत केंद्रीय एजेंसियों—नाफेड और एनसीसीएफ—के माध्यम से 1.31 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद के लिए प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा रहा है।

उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, साथ ही कृषि ऋण की सुविधा भी दी जा रही है। सरकार किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि उनकी आय स्थायी रूप से बढ़ सके।

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