महाकुम्भ 2025: 66 करोड़ श्रद्धालु, 60 लाख साइबर अटैक और ICCC की ऐतिहासिक सफलता

Published : Jan 13, 2026, 09:30 AM IST
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सार

महाकुम्भ-25 में 45 दिनों में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। आयोजन की सुरक्षा का नर्व सेंटर बना ICCC, जिसने 60 लाख से अधिक साइबर हमले विफल किए। इस टेक-ड्रिवन मॉडल को SKOCH Gold Award 2025 से सम्मान मिला।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित दिव्य-भव्य महाकुम्भ-25 को न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया से अभूतपूर्व सराहना मिली। 45 दिनों तक चले इस ऐतिहासिक आयोजन में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। दुनिया के सबसे बड़े मानवीय समागमों में शामिल इस आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में उत्तर प्रदेश पुलिस की भूमिका की देश-विदेश में प्रशंसा हुई।

थल से नभ तक सुरक्षा का मजबूत कवच बना आईसीसीसी

महाकुम्भ-25 को हर स्तर पर सुरक्षित बनाने के लिए यूपी पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) ने अहम भूमिका निभाई। यह सेंटर न सिर्फ ज़मीन पर भारी भीड़ को नियंत्रित करता रहा, बल्कि डिजिटल मोर्चे पर भी सतर्क रहा और 60 लाख से अधिक साइबर हमलों को विफल किया।

महाकुम्भ-25 का नर्व सेंटर बना इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ-25 को वैश्विक पहचान मिली और ICCC को SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया। 45 दिनों में असाधारण पीक-फुटफॉल, हजारों हेक्टेयर में फैली अस्थायी नगरी और जटिल लॉजिस्टिक्स के बीच ICCC पूरे आयोजन का “नर्व सेंटर” बनकर उभरा।

12 महीने पहले शुरू हुई ‘वार-रूम मॉडल’ पर आधारित तैयारी

महाकुम्भ-25 की तैयारी को सामान्य इवेंट मैनेजमेंट नहीं बल्कि सिस्टम इंजीनियरिंग के रूप में देखा गया। आयोजन से एक साल पहले ही योजना बनाना शुरू कर दिया गया था। इसमें टेबल-टॉप एक्सरसाइज़, परिदृश्य-आधारित परीक्षण, भीड़-ओवरफ्लो की आशंकाओं पर डिजिटल-ट्विन सिमुलेशन जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और भरोसेमंद अनुभव मिले।

आईसीसीसी: एक स्क्रीन पर भीड़, आपदा और त्वरित प्रतिक्रिया

महाकुम्भ-25 के दौरान ICCC को 24x7 केंद्रीय कमांड हब के रूप में संचालित किया गया। यहां से भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, ट्रैफिक नियंत्रण, पब्लिक सेफ्टी और विभिन्न विभागों के बीच रीयल-टाइम समन्वय सुनिश्चित किया गया।

ICCC में शामिल प्रमुख व्यवस्थाएं:

  • 2,750+ AI-आधारित कैमरे
  • 4 ऑपरेशनल ICCC यूनिट्स
  • 400+ प्रशिक्षित कार्मिक
  • 1920 कॉल सेंटर (प्रति शिफ्ट 50 ऑपरेटर)
  • जैम-प्रूफ वायरलेस नेटवर्क
  • ANPR आधारित वाहन निगरानी
  • VMD डिस्प्ले सिस्टम
  • 11 भाषाओं वाला AI चैटबॉट ‘Kumbh Sah’AI’yak’

यहीं से QRT डिस्पैच, ग्रीन-चैनल एक्टिवेशन, रेलवे-बस-स्टैंड अलर्ट और बहु-विभागीय समन्वय बिना किसी देरी के संचालित किया गया।

डिजिटल महाकुम्भ पर साइबर हमला, 60 लाख से ज्यादा प्रयास विफल

महाकुम्भ-25 जितना विशाल भौतिक आयोजन था, उतना ही बड़ा इसका डिजिटल स्वरूप भी था। इसी कारण यह साइबर अपराधियों के लिए हाई-वैल्यू टारगेट बना। 45 दिनों में 25 से अधिक देशों से जुड़े IP एड्रेस से 60 लाख से ज्यादा साइबर हमलों को रोका गया। इनमें शामिल थे:

  • DDoS अटैक
  • Ransomware गतिविधियां
  • DNS Poisoning
  • SQL Injection
  • Spoofing और Brute Force Attacks
  • Web Application Attacks

यह सफलता केंद्रीय एजेंसियों के समय पर अलर्ट और यूपी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से संभव हुई।

IIT कानपुर और IIIT प्रयागराज की तकनीकी भूमिका

साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में IIT कानपुर और IIIT प्रयागराज की तकनीकी टीमों ने साइबर-सिक्योरिटी असेसमेंट और ऑन-ग्राउंड सपोर्ट दिया। वहीं MeitY के STQC के माध्यम से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की टेस्टिंग और क्वालिटी चेक सुनिश्चित की गई।

‘डिजिटल कुंभ’ के साथ ‘डिजिटल सेफ्टी’ पर भी फोकस

IPS भानु भास्कर के अनुसार, 56 प्रशिक्षित “साइबर वॉरियर्स” द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की गई। साइबर सुरक्षा को केवल IT विषय न मानकर इसे भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया और जन-विश्वास से जोड़ा गया, ताकि किसी भी गलत सूचना या तकनीकी बाधा से अव्यवस्था न फैले।

इंटर-एजेंसी समन्वय बना आईसीसीसी की सबसे बड़ी ताकत

ICCC मॉडल की असली ताकत विभिन्न विभागों के बीच मजबूत तालमेल रही। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, नगर सेवाएं, ट्रैफिक, रेलवे और तकनीकी संस्थानों ने एक साझा प्लेटफॉर्म पर काम किया। CERT-In के दिशा-निर्देशों के अनुरूप साइबर-सुरक्षा ढांचा, CISO फंक्शन और रिपोर्टिंग सिस्टम को भी अपनाया गया।

प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से मजबूत साइबर सुरक्षा

तत्कालीन आईजी रेंज प्रयागराज प्रेम गौतम के नेतृत्व में देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं और केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग लिया गया। फील्ड में 60,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती रही, जबकि ICCC में मानव-मशीन साझेदारी ने संचालन को तेज और सटीक बनाया।

ICCC की निगरानी भानु भास्कर (पूर्व ADG प्रयागराज जोन) ने की। उन्हें तरुण गाबा (पुलिस आयुक्त प्रयागराज), प्रेम गौतम (आईजी), वैभव कृष्ण (डीआईजी महाकुम्भ) का सहयोग मिला। ऑपरेशनल कमांड की जिम्मेदारी Amit Kumar, IPS ने निभाई।

SKOCH Gold Award 2025 से सम्मानित हुआ ICCC मॉडल

महाकुम्भ-25 के ICCC मॉडल को 105वें SKOCH Summit में SKOCH Gold Award 2025 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार तत्कालीन ADG भानु भास्कर को प्रदान किया गया, जिसे एसपी ICCC अमित कुमार ने ग्रहण किया। यह सम्मान यूपी पुलिस की टेक-ड्रिवन और नागरिक-केंद्रित पहल को राष्ट्रीय पहचान देता है।

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