Noida International Airport: जेवर एयरपोर्ट बनेगा भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस एयरपोर्ट

Published : Jan 12, 2026, 08:20 PM IST
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सार

योगी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनाया गया है। सोलर फार्म, ईवी चार्जिंग, ग्रीन फ्यूल और पर्यावरण निगरानी से यह सतत विकास की मिसाल बनेगा।

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) न केवल हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी मिसाल कायम करेगा। मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि के अनुरूप जेवर एयरपोर्ट को भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। यह एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और इसे नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर आधारित रखा गया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम किया जा सके।

ऊर्जा, जल और कचरा प्रबंधन पर विशेष फोकस

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देशों के तहत एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम रहे। डिजाइन में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की व्यापक व्यवस्था

जेवर एयरपोर्ट की पार्किंग क्षमता के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। एयरसाइड ऑपरेशन में उपयोग होने वाले सभी वाहन पूरी तरह 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे। इनके लिए एयरपोर्ट परिसर में कई स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट्स बनाए जाएंगे, जिससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।

82.94 एकड़ में विकसित होगा सोलर फार्म

योगी सरकार के ग्रीन एनर्जी विजन के अनुरूप एयरपोर्ट परिसर में 82.94 एकड़ में सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है। इस सोलर फार्म की कुल उत्पादन क्षमता 51,966 मेगावाट-घंटा होगी, जिससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन फ्यूल की व्यवस्था

एयरपोर्ट परिसर में दो स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड विकसित किए जा रहे हैं, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और टिकाऊ जल स्रोत सुनिश्चित होंगे। इसके अलावा, एयरपोर्ट में आरएनजी (Renewable Natural Gas) प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित की जा सकेंगी।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी

जेवर एयरपोर्ट में एक समग्र ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके तहत कचरे का पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है। इस योजना के अंतर्गत हर महीने वायु, जल, मिट्टी, कचरा और सीवेज से जुड़े मानकों की नियमित निगरानी की जाएगी।

निवेश, रोजगार और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा

जेवर एयरपोर्ट के संचालन से प्रदेश में न केवल निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि यह परियोजना योगी सरकार के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के संकल्प को भी मजबूती देगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को विकास और पर्यावरण संतुलन दोनों के मामले में नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा।

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