Govindas Insurance: दही हांडी से पहले महाराष्ट्र सरकार का बड़ा ऐलान, 10 लाख का बीमा और मुफ़्त इलाज

Published : Aug 07, 2026, 02:08 PM IST
Dahi Handi File Photo

सार

महाराष्ट्र सरकार 1.60 लाख गोविंदाओं को 10 लाख रुपये का बीमा कवर देगी। दही हांडी में घायल होने पर सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा। मृत्यु या स्थायी अपंगता पर 10 लाख और आंशिक अपंगता पर 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

मुंबईः महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार ने गोविंदाओं के लिए एक बड़े सुरक्षा कवच का ऐलान किया है। सरकार राज्य के 1।60 लाख गोविंदाओं को 10 लाख रुपये का बीमा कवर देगी। इसके साथ ही, दही हांडी के दौरान घायल होने वाले गोविंदाओं का इलाज सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह मुफ़्त किया जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विभिन्न गोविंदा मंडलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक बैठक के बाद लिया। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। सरकार के इस कदम का मकसद त्योहार के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं से गोविंदाओं और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

क्या है सरकार का 'सुरक्षा कवच'?

इस बीमा पॉलिसी के तहत, अगर किसी गोविंदा की दुर्भाग्य से मौत हो जाती है या वह स्थायी रूप से अपंग हो जाता है, तो उसके परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। वहीं, आंशिक अपंगता की स्थिति में 5 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इस बीमा का पूरा प्रीमियम भी सरकार ही भरेगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि घायल गोविंदाओं के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में एक समर्पित वॉर्ड बनाया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उन्हें तुरंत और बेहतर इलाज मिल सके।

कौन होगा हक़दार और कैसे मिलेगा लाभ?

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं गोविंदाओं को मिलेगा जो सरकार के पास रजिस्टर्ड दही हांडी मंडलों का हिस्सा हैं। इसके लिए सभी मंडलों को अपने-अपने सदस्यों की सूची सरकार के पास दर्ज करानी होगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि लाभ सही लोगों तक पहुंचे। पहले सरकार ने 50,000 गोविंदाओं के लिए बीमा की घोषणा की थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर 1।60 लाख गोविंदाओं तक कर दिया गया है। महाराष्ट्र में दही हांडी को एक साहसिक खेल (adventure sport) का दर्जा प्राप्त है, जिसमें मानव पिरामिड बनाने के दौरान गिरने से गंभीर चोट या मौत का खतरा बना रहता है। सरकार की तरफ से गोविंदाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक 'प्रो गोविंदा' प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में जीतने वालों के लिए नकद पुरस्कार भी रखा गया है।

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