VIDEO: महाराष्ट्र बाढ़ में बहे 3,000 LPG सिलेंडर, DM की न छूने की चेतावनी, फिर भी नहीं माने लोग!

Published : Jul 09, 2026, 10:02 AM IST
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सार

महाराष्ट्र के रायगढ़ में भारी बारिश से HPCL LPG प्लांट में बाढ़ आई, 3,000 सिलेंडर पातालगंगा नदी में बहे। प्रशासन ने लोगों को सिलेंडर न छूने की चेतावनी दी। जानिए पूरी घटना। 

रायगढ़/मुंबई: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले से एक ऐसी खौफनाक और हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। मूसलाधार बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ के बीच एक सरकारी गैस बॉटलिंग प्लांट पानी में डूब गया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी भयानक आपदा से कम नहीं था-एक-दो नहीं बल्कि करीब 3,000 एलपीजी (LPG) सिलेंडर बाढ़ के तेज बहाव में बहकर पातालगंगा नदी में चले गए। अब नदी के पानी में तैरते ये हजारों सिलेंडर किसी 'टाइम बम' की तरह आगे बढ़ रहे हैं, जिससे पूरे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

कैसे हुआ हादसा? प्लांट में पानी भरने से मची अफरा-तफरी

जानकारी के मुताबिक, यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका अंतर्गत MIDC चवाने में स्थित प्लॉट नंबर E-1/7 पर बने HPCL पातालगंगा LPG बॉटलिंग प्लांट में हुई। पिछले कुछ दिनों से रायगढ़ और आस-पास के इलाकों में आसमानी आफत बरस रही है। भारी बारिश के चलते पातालगंगा नदी उफान पर थी और अचानक नदी का गंदा, तेज पानी प्लांट की सुरक्षा दीवारों को तोड़ते हुए भीतर घुस गया। पानी का बहाव इतना खतरनाक था कि उसने प्लांट के यार्ड में रखे भारी-भरकम सिलेंडरों को तिनके की तरह बहाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते करीब 3,000 सिलेंडर (जिनमें भरे हुए और खाली दोनों शामिल हैं) पानी के रेले के साथ बहकर सीधे पातालगंगा नदी की मुख्य धारा में समा गए।

 

 

जब नदी के सीने पर तैरने लगे मौत के गोले: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

सुबह होते ही सोशल मीडिया पर इस घटना के कई रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो और तस्वीरें वायरल होने लगीं। वीडियो में देखा जा सकता है कि मटमैले पानी की लहरों के ऊपर सैकड़ों लाल रंग के गैस सिलेंडर इंसानी लाशों की तरह तैरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह नजारा जितना हैरान करने वाला था, उससे कहीं ज्यादा डरावना था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रशासन की मनाही के बावजूद कुछ जगहों पर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी के किनारे से इन सिलेंडरों को खींचकर अपने घर ले जाने की कोशिश करते दिखे। लोगों की इस नासमझी ने एक बड़े संभावित ब्लास्ट या हादसे के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है।

 

 

"उत्सुकता पड़ेगी भारी..." ज़िला कलेक्टर की वो डरावनी चेतावनी!

जैसे ही यह बात रायगढ़ के जिला कलेक्टर किशन जावले तक पहुँची, उन्होंने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे क्षेत्र के लिए एक बेहद गंभीर और डरावनी चेतावनी (Advisory) जारी की। कलेक्टर जावले ने तटीय इलाकों और नदी के बहाव की दिशा में रहने वाले सभी नागरिकों से हाथ जोड़कर अपील की कि वे इन सिलेंडरों के पास भी न जाएं। कलेक्टर ने सीधे शब्दों में आगाह करते हुए कहा: "इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि नदी में बहे इन सिलेंडरों में कितनी गैस बची है या वे इस वक्त किस सुरक्षित स्थिति में हैं। पानी के तेज बहाव और पत्थरों से टकराने के कारण इनके वॉल्व ढीले हो सकते हैं या गैस लीक हो सकती है। उत्सुकता या निजी लालच में आकर इन्हें छूना, उठाना, खोलना या अपने घर ले जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। यह सीधे-सीधे मौत को दावत देने जैसा है। नागरिक खुद को और अपने परिवार को जोखिम में न डालें।" प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि अगर किसी भी ग्रामीण या राहगीर को नदी के किनारे या झाड़ियों में कोई भी सिलेंडर फंसा हुआ दिखे, तो वह उसे खुद निकालने की बहादुरी बिल्कुल न दिखाए, बल्कि तुरंत स्थानीय पुलिस या आपदा प्रबंधन टीम को सूचित करे।

 

 

'कर्मों का हिसाब' या कुदरत का कहर? कोल्हापुर से रायगढ़ तक हाहाकार

इस बीच, इस विनाशकारी घटना को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे 'कर्मों का न्याय' बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सिर्फ 3 महीने पहले इसी इलाके के कुछ जमाखोरों और गोदाम मालिकों ने कथित तौर पर गरीबों को चूना लगाया था और एलपीजी की कालाबाजारी की थी, और आज कुदरत के इस सैलाब ने पूरे के पूरे गोदाम को ही बहा दिया। लोग लिख रहे हैं कि- "कर्म का हिसाब देर से हो सकता है, लेकिन होता ज़रूर है।" बहरहाल, रायगढ़ और पड़ोसी जिले कोल्हापुर में भी बाढ़ का पानी कई गैस गोदामों तक पहुँच चुका है, जिससे नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

नदी में 'सर्च ऑपरेशन': सिलेंडरों को ढूंढने में जुटी सरकारी टीमें

फिलहाल, रायगढ़ जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, MIDC के अधिकारी और HPCL कंपनी की रेस्क्यू टीमें हाई अलर्ट पर हैं। पातालगंगा नदी के निचले बहाव वाले इलाकों और खाड़ियों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि नदी में बह रहे इन 'तैरते हुए खतरों' को समय रहते पानी से बाहर निकाला जा सके और किसी भी बड़ी विस्फोटक दुर्घटना को टाला जा सके। पूरी स्थिति पर पल-पल की नजर रखी जा रही है।

एक छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ा खतरा

अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के बाद मिले किसी भी LPG सिलेंडर को सामान्य वस्तु समझना बड़ी गलती हो सकती है। दबाव, क्षति या वाल्व में खराबी के कारण ऐसे सिलेंडर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और नदी में बहे सिलेंडरों को सुरक्षित तरीके से हटाना है। प्रशासन ने साफ कहा है कि सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।

 

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