Mahashivratri 2026: काशी विश्वनाथ धाम में 62 मंदिरों से पहुंचा पावन प्रसाद, आध्यात्मिक एकता का संदेश

Published : Feb 15, 2026, 09:19 AM IST
Mahashivratri 2026 uttar pradesh kashi vishwanath dham

सार

महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश के 62 मंदिरों से पावन प्रसाद, जल, रज और वस्त्र अर्पित किए गए। यह पहल सनातन समाज को एक सूत्र में जोड़ने और वैश्विक आध्यात्मिक एकता को मजबूत करने का संदेश देती है।

वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी ने एक नई और विशेष आध्यात्मिक परंपरा की शुरुआत की है। इस पहल के तहत देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग, सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल और श्रद्धा भेंट भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में अर्पित की जा रही हैं। इस आध्यात्मिक समन्वय का उद्देश्य संपूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में जोड़ना और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करना है। यह पहल वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक एकात्मता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

62 मंदिरों से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचीं पावन भेंट

शनिवार तक कुल 62 मंदिरों से पावन प्रसाद और भेंट काशी विश्वनाथ धाम पहुंच चुकी हैं। तमिलनाडु से भक्त मंडली सहित श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर (चेन्नई), श्री अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर (चेन्नई), तेन सबनायाकर मंदिर (कोविलूर), अरुल्मिगु वामनपुरफेश्वरर (तिरुमणिकुझी), अरुल्मिगु द्रौपथी अम्मन मंदिर, अरुल्मिगु रीना विमोशनर (तिरुकांडीश्वरम्), अरुल्मिगु तिरु सनगरी काली अम्मन (वझापेट), अरुल्मिगु भूलोगा नाथर (नेल्लिकुप्पम), अरुल्मिगु भूमिनाथ ईश्वरर (वैटिपक्कम), श्री मदुरै वीरन मंदिर, अरुल्मिगु कुमारा गुरु परमस्वामी (एस कुमारापुरम), अरुल्मिगु वेधा अरुल्पुरीश्वर (कंदरकोट्टई), अरुल्मिगु सबनायगर (कीरापालयम), अरुल्मिगु काशी विश्वनाथर (गेडिलम नदी), अरुल्मिगु विरुथा गिरिश्वरर, अरुल्मिगु अमृत लिंगेश्वर, अरुल्मिगु मार्गबंधु, अरुल्मिगु नादन पाथेश्वरर और अरुल्मिगु सिंगारणाथर (कोंगरायनूर) शामिल हैं।

श्री कृष्ण जन्मस्थान और माता वैष्णो देवी सहित अन्य प्रमुख मंदिरों की सहभागिता

मथुरा से श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, जम्मू-कश्मीर से श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, मलेशिया से श्री महा मरिअम्मन मंदिर, अरुल्मिगु श्री राजाकलियम्मन ग्लास मंदिर, श्री कंदस्वामी कोविल, श्री वीरा मुनिस्वरर मंदिर, श्री नगराथर शिवन मंदिर, अरुल्मिगु बालथंडायुथपानी मंदिर और श्री कुंज बिहारी मंदिर ने भी इस अभियान में भाग लिया है।

काशी के प्रमुख मंदिरों से भी जुड़ी आस्था

वाराणसी के प्रमुख मंदिरों ने भी इस आध्यात्मिक पहल में सहभागिता की है। इनमें सप्तमात्रिका सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतलाधाम, काशी त्रिलोचन महादेव, बड़ी काली जी मंदिर, बड़ा गणेश मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, ओम कालेश्वर मंदिर, कालभैरव मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, कामख्या मंदिर, विशालाक्षी मंदिर सहित कई अन्य प्रमुख मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों से पवित्र प्रसाद, रज, वस्त्र और पूजनीय सामग्री काशी विश्वनाथ धाम भेजी गई है।

केदारनाथ, सिद्धिविनायक और द्वारकाधीश मंदिर से भी पहुंचीं भेंट

उत्तराखंड के श्री केदारनाथ, मुंबई के लालबाग के राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, श्रीलंका के श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर (कोलंबो) और राजस्थान के नाथद्वारा मंदिर (उदयपुर) से भी पावन प्रसाद और भेंट काशी विश्वनाथ धाम पहुंच चुकी है।

पवित्र जल, रज, वस्त्र और पुष्पों से सजी श्रद्धा

इन भेंटों में विभिन्न तीर्थस्थलों का पवित्र जल, पूजित पुष्पमालाएं, रज, चंदन, वस्त्र और अन्य धार्मिक सामग्री शामिल है। यह संपूर्ण प्रक्रिया सनातन परंपरा की आध्यात्मिक एकता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनकर सामने आई है।

कूरियर और प्रतिनिधियों के माध्यम से जारी है क्रम

कई मंदिरों से प्रसाद कूरियर के माध्यम से भेजा जा रहा है, जबकि कुछ प्रतिष्ठित मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं काशी पहुंचकर भेंट अर्पित करेंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश-विदेश के तीर्थस्थलों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहा है।

वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक एकात्मता का संदेश

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की यह पहल सनातन संस्कृति में समरसता, आध्यात्मिक बंधुत्व और सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रही है। महाशिवरात्रि पर शुरू हुई यह परंपरा काशी की आध्यात्मिक गरिमा को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ विश्वभर के श्रद्धालुओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य कर रही है। निश्चित रूप से यह पहल राष्ट्र और विश्व के तीर्थस्थलों को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कदम है।

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