- Home
- News
- क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? म्यूनिख कॉन्फ्रेंस से एस. जयशंकर का चौंकाने वाला जवाब
क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? म्यूनिख कॉन्फ्रेंस से एस. जयशंकर का चौंकाने वाला जवाब
India Russia Oil Import: क्या भारत सच में रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला है? म्यूनिख में जयशंकर का बयान कई संकेत देता है। अमेरिका के दावे, एनर्जी मार्केट की मजबूरी और भारत की ‘Strategic Autonomy’-कहीं कोई बड़ा जियोपॉलिटिकल मोड़ तो नहीं?

Jaishankar Munich Security Conference: जब भी भारत, रूस और अमेरिका एक ही खबर में आते हैं, तो सवाल अपने-आप बड़ा हो जाता है। हाल ही में अमेरिका की तरफ़ से दावा किया गया कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर राज़ी हो गया है। इसी दावे के बीच एस जयशंकर ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में ऐसा बयान दिया, जिसने इस पूरे मुद्दे को एक नए नज़रिये से देखने पर मजबूर कर दिया।
क्या वाकई भारत ने रूस से तेल लेना बंद करने का वादा कर दिया है?
जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की एनर्जी पॉलिसी किसी एक देश के दबाव से तय नहीं होती। तेल खरीदने के फैसले कॉस्ट, उपलब्धता और जोखिम जैसे फैक्टर्स पर आधारित होते हैं। भारत ने न तो अमेरिका के दावे की पुष्टि की है और न ही उसे खारिज किया है, लेकिन इतना ज़रूर साफ किया है कि फैसले भारत अपने हित में करेगा।
“स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी” आखिर इतनी अहम क्यों है?
जयशंकर ने कहा कि स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी भारत की विदेश नीति की रीढ़ है। यह सिर्फ आज की ज़रूरत नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और विकास से जुड़ा हुआ सिद्धांत है। इसका मतलब है-भारत अपने फैसले खुद लेगा, हर मुद्दे पर किसी से सहमत होना ज़रूरी नहीं और राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर रहेगा।
Q: India believes in strategic autonomy. But you are now being forced to give up Russian oil. Doesn't that impact your autonomy?
Dr. Jaishankar: We remain wedded to strategic autonomy. Oil companies will look at costs and take their own decisions. pic.twitter.com/WS5M29DpNm— Shashank Mattoo (@MattooShashank) February 14, 2026
भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को कैसे देखता है?
भारत 140 करोड़ लोगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर एनर्जी सिक्योरिटी तय करता है। इसके लिए सरकार और तेल कंपनियां अलग-अलग देशों से तेल मंगाने की रणनीति अपनाती हैं। इसे ही डायवर्सिफाइड सोर्सिंग कहा जाता है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे।
क्या अमेरिका भारत के तेल इंपोर्ट में बड़ी भूमिका निभा रहा है?
हां, अमेरिका अब भारत के लिए एक अहम तेल सप्लायर बनता जा रहा है। अनुमान है कि इस साल अमेरिका से तेल आयात में करीब 11% की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। भारत दोनों विकल्प खुले रखता है।
रूस से भारत कितना तेल खरीदता है, और यूरोप से तुलना क्यों हुई?
जयशंकर ने दिलचस्प तुलना करते हुए कहा कि भारत का पूरे महीने का रूसी तेल इंपोर्ट, यूरोप के एक दिन के इंपोर्ट से भी कम है। इससे यह साफ होता है कि भारत पर लगाए जा रहे आरोप वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाते। तो असली जवाब साफ है कि भारत न किसी दबाव में है, न किसी वादे में बंधा हुआ। जयशंकर का संदेश साफ है-भारत स्वतंत्र सोच रखता है, फैसले बाज़ार और ज़रूरत के हिसाब से होंगे और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से कोई समझौता नहीं यानी, भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं-यह फैसला भारत खुद करेगा, कोई और नहीं।
मोदी-ट्रंप बातचीत और टैरिफ में राहत का क्या मतलब है?
हाल ही में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। इसमें वह 25% टैरिफ भी शामिल था, जो रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया था।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

