
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित भड़काऊ टिप्पणी को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज हुई है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती बगावत पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष अब विधानसभा से निकलकर संसद तक पहुंच चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकते हैं, क्योंकि पार्टी के कई सांसद खुलकर नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, धरमतला में आयोजित एक धरना-प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी की ओर से दिए गए एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक कारोबारी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके बयान से सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है। शिकायत के आधार पर कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि इस मामले में अभी तक ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष और गहरा हो गया है। पार्टी के असंतुष्ट सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि लोकसभा के 19 सांसद उनके गुट के साथ हैं और वे संसद में खुद को "वास्तविक TMC" के रूप में मान्यता दिलाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपा जा चुका है और जल्द ही प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात कर अपनी मांग रखेगा। बसुनिया के मुताबिक, 8 जून से शुरू हुए हस्ताक्षर अभियान में अब तक 19 सांसद समर्थन दे चुके हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।
बागी सांसदों पर दबाव और राजनीतिक प्रलोभन के आरोपों को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। TMC सांसद कीर्ति आजाद द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए बसुनिया ने कहा कि सांसदों का यह फैसला पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी प्रकार का दबाव या लालच इसमें शामिल नहीं है।
उन्होंने वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता लगातार हो रहे इस्तीफे हैं। हाल ही में राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी पार्टी से अलग हो चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि अभिषेक से सभी नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियां वापस नहीं ली जातीं तो उनके लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल होगा। इस बयान ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।
हालांकि बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अब भी ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। लोकसभा सांसद सौगत राय, शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल समेत राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने किसी भी बागी गुट का हिस्सा होने से इनकार किया है। इन नेताओं का कहना है कि वे पार्टी और उसके नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट सांसदों का दावा सही साबित होता है, तो तृणमूल कांग्रेस के सामने अस्तित्व का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज शिकायत भी राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष बागी गुट की दावेदारी और पुलिस जांच की दिशा तय करेगी कि बंगाल की राजनीति किस ओर करवट लेती है।
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