
नई दिल्ली/भोपाल: भारतीय राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब मंगलवार को मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस की कमान संभालने वाली वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा अचानक रद्द कर दिया गया। राहुल गांधी की बेहद करीबी और संगठनात्मक रणनीति में माहिर मानी जाने वाली नटराजन का नामांकन खारिज होने की खबर जैसे ही सामने आई, सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। इसके बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच एक नया और बेहद तीखा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक गहरा सस्पेंस और कानूनी दांवपेंच छिपा हुआ है। दरअसल, बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर एक गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। केवट के वकील संकेत गुप्ता के अनुसार, नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना में लंबित एक कथित मामले का विवरण पूरी तरह से छिपाया था। बीजेपी का आरोप है कि यह जानकारी न देना सुप्रीम कोर्ट के उन कड़े दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिसके तहत उम्मीदवारों को अपने हर छोटे-बड़े आपराधिक या लंबित मामलों का ब्योरा देना अनिवार्य होता है। इसी आपत्ति को आधार बनाते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने बिना वक्त गंवाए कांग्रेस उम्मीदवार का पत्ता साफ कर दिया।
Democracy cannot survive when constitutional institutions are reduced to instruments of political convenience.
The rejection of Congress Rajya Sabha candidate Meenakshi Natarajan ji's nomination from Madhya Pradesh raises serious questions about the fairness of our democratic… pic.twitter.com/E3BOYFo8CE— Congress (@INCIndia) June 9, 2026
नामांकन रद्द होते ही कांग्रेस खेमे में भारी आक्रोश फैल गया। पार्टी ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए एक नया दावा पेश किया है। कांग्रेस का कहना है कि जिस मामले को लेकर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा किया गया है, वह कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं बल्कि महज एक साधारण 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) था। कांग्रेस के मुताबिक, नियमों के तहत हलफनामे में ऐसी किसी नोटिस का ज़िक्र करना ज़रूरी ही नहीं था। पार्टी के शीर्ष नेताओं का आरोप है कि यह कोई कानूनी चूक नहीं, बल्कि कांग्रेस को राज्यसभा में एक सीट से महरूम करने की बीजेपी की सोची-समझी राजनीतिक साजिश है।
इस फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया। सचिन पायलट, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल जैसी भारी-भरकम तिकड़ी इस फैसले के खिलाफ सीधे चुनाव आयोग के दफ्तर जा पहुंची। भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा: "नटराजन के राज्यसभा नामांकन को खारिज करना, बीजेपी की ओर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गुप्त तरीके से खत्म करने की एक खुली और घिनौनी कोशिश है। जब उन्हें एहसास हुआ कि कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की उनकी गंदी चालें नाकाम हो जाएंगी, तो वे इतने नीचे गिर गए कि उन्होंने नामांकन ही खारिज कर दिया।"
चुनाव आयोग के साथ मिलकर मोदी लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं. इसी साजिश के तहत आज मध्य प्रदेश से राज्य सभा की कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द कर दिया गया.
इस अलोकतांत्रिक कदम के खिलाफ जब दिल्ली में कांग्रेस का डेलिगेशन के सी वेणुगोपाल जी, सचिन पायलट… pic.twitter.com/ttacAnGO8o— Sattu Khan (@pksattu) June 10, 2026
24 मई 1973 को जन्मीं मीनाक्षी नटराजन कोई आम नेता नहीं हैं। वे कांग्रेस की उन चुनिंदा चेहरों में से हैं जिन्हें राहुल गांधी की 'यंग ब्रिगेड' और कोर टीम का हिस्सा माना जाता है। उन्होंने छात्र राजनीति (NSUI) से शुरुआत की और साल 1999 से 2002 तक इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं। उनका असली राजनीतिक कद साल 2008 में तब बढ़ा जब राहुल गांधी ने उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का सचिव नियुक्त किया। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले मंदसौर सीट को जीतकर इतिहास रच दिया था। हालांकि, 2014 और 2019 में उन्हें सुधीर गुप्ता से शिकस्त झेलनी पड़ी। फरवरी 2025 में उन्हें कांग्रेस का तेलंगाना प्रभारी बनाया गया था।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना मध्य प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। इस घटना ने आगामी चुनावों से पहले विपक्षी खेमे को हिलाकर रख दिया है। सचिन पायलट और भूपेश बघेल ने साफ चेतावनी दी है कि वे इस तानाशाही फैसले के खिलाफ चुप बैठने वाले नहीं हैं और बहुत जल्द इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या कोर्ट से कांग्रेस को कोई राहत मिलती है, या फिर मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट बिना लड़ाई के ही बीजेपी के खाते में चली जाएगी? सस्पेंस अभी बरकरार है।
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