सुप्रीम कोर्ट का वो बड़ा फैसला: जिससे मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदों पर फिरा पानी

Published : Jun 12, 2026, 02:12 PM IST
meenakshi natarajan supreme court rajya sabha nomination cancelled election petition form26 article329 india news

सार

क्या सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका सिर्फ चुनाव प्रक्रिया के नियमों के कारण खारिज की? क्या फॉर्म 26 में जानकारी छिपाने का आरोप ही नामांकन रद्द होने की असली वजह बना? क्या चुनाव प्रक्रिया में कोर्ट का दखल पूरी तरह बंद होना भविष्य में बड़े विवाद पैदा करेगा? क्या नटराजन के पास अब केवल चुनाव याचिका ही एकमात्र कानूनी रास्ता बचा है?

Meenakshi Natarajan Supreme Court Case: देश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मध्य प्रदेश से कांग्रेस की कद्दावर नेता मीनाक्षी नटराजन को देश की सबसे बड़ी अदालत से एक ऐसा झटका लगा, जिसकी उम्मीद खुद कांग्रेस खेमे ने भी नहीं की थी। राज्यसभा चुनाव के ऐन वक्त पर नामांकन रद्द होने के बाद, नटराजन न्याय की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। लेकिन शुक्रवार को कोर्ट रूम के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसने न सिर्फ नटराजन के सियासी सफर पर एक बड़ा ब्रेक लगा दिया, बल्कि चुनावी मैदान में एक नया सस्पेंस भी पैदा कर दिया है।

 

 

 

 

 

फॉर्म 26 का वो छिपा हुआ पन्ना: आखिर हलफनामे में क्या छुपाया गया था?

इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन पत्र अचानक खारिज कर दिया। इसके पीछे एक ऐसा कारण था जिसने सबको चौंका दिया। दरअसल, नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल किए जाने वाले 'फॉर्म 26' हलफनामे को अधूरा छोड़ दिया था। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने तेलंगाना में अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक शिकायत मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई। हैरान करने वाली बात यह थी कि नटराजन इस मामले से अनजान नहीं थीं; उन्होंने उस शिकायत के जवाब में पहले लिखित दस्तावेज भी दाखिल किए थे। इसके बावजूद, मुख्य चुनावी हलफनामे में इस जानकारी का न होना उनके लिए सबसे बड़ा जाल बन गया, जिसमें उनकी उम्मीदवारी पूरी तरह फंस गई।

 

 

कोर्ट रूम का हाई-वोल्टेज ड्रामा: सिंघवी की दलीलें और चुनाव आयोग का पलटवार

जब मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर) के सामने पहुंचा, तो कोर्ट रूम किसी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। नटराजन की तरफ से देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मोर्चा संभाला। सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि जिस मामले को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया है, उसमें तो कोर्ट ने अब तक संज्ञान भी नहीं लिया है और न ही आरोप तय हुए हैं। उन्होंने कुछ पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "असाधारण परिस्थितियों में अदालत को दखल देना चाहिए, ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सकें।" दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और प्रतिवादियों के वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक कानूनी अधिकार है। अगर नामांकन रद्द हुआ है, तो उसका फैसला सिर्फ चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद 'चुनाव याचिका' (Election Petition) के जरिए ही हो सकता है, बीच में नहीं।

 

 

संविधान का वो अटूट नियम: चुनाव के बीच में अदालती दखल पर सख्त मनाही

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने पूरी बहस पर पूर्णविराम लगा दिया। बेंच ने ऐतिहासिक 'पोन्नुस्वामी फैसले' का हवाला देते हुए साफ किया कि भारत के संविधान के तहत, एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें उसमें किसी भी तरह का दखल नहीं दे सकतीं। सिंघवी की उस दलील को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने "साफ तौर पर गैर-कानूनी" रद्दीकरण के मामलों में रियायत देने की बात कही थी। बेंच ने कहा कि अगर हम आज ऐसा कोई अपवाद बनाएंगे, तो यह संविधान के साथ खिलवाड़ होगा। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नटराजन के पास अब केवल एक ही रास्ता बचा है-वे चुनाव संपन्न होने का इंतजार करें और उसके बाद कानूनी तौर पर चुनाव याचिका दायर करें।

आगे क्या? नटराजन के सियासी भविष्य पर गहराया सस्पेंस

याचिका खारिज होने के साथ ही मीनाक्षी नटराजन के लिए इस राज्यसभा चुनाव के दरवाजे फिलहाल पूरी तरह बंद हो चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह राहत जरूर दी है कि आज की गई टिप्पणियों का असर भविष्य में नटराजन द्वारा दायर की जाने वाली किसी भी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस हाई-प्रोफाइल रद्दीकरण के बाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट का समीकरण अब क्या मोड़ लेगा? कांग्रेस इस बड़े झटके से खुद को कैसे उबारेगी, इस पर अब पूरे देश की सियासी नजरें टिकी हुई हैं।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

दूल्हे को बुलडोजर पर सिगरेट पीना पड़ा महंगा, वीडियो वायरल होते ही फंस गया बेचारा
कांग्रेस में TMC के विलय पर क्या बोली Kakoli Ghosh? Mamata Banerjee को क्या-क्या सुनाया