
Meenakshi Natarajan Supreme Court Case: देश की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मध्य प्रदेश से कांग्रेस की कद्दावर नेता मीनाक्षी नटराजन को देश की सबसे बड़ी अदालत से एक ऐसा झटका लगा, जिसकी उम्मीद खुद कांग्रेस खेमे ने भी नहीं की थी। राज्यसभा चुनाव के ऐन वक्त पर नामांकन रद्द होने के बाद, नटराजन न्याय की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। लेकिन शुक्रवार को कोर्ट रूम के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसने न सिर्फ नटराजन के सियासी सफर पर एक बड़ा ब्रेक लगा दिया, बल्कि चुनावी मैदान में एक नया सस्पेंस भी पैदा कर दिया है।
VIDEO | Delhi: The Supreme Court has dismissed Congress leader Meenakshi Natarajan's plea challenging rejection of her nomination papers for the Rajya Sabha election from Madhya Pradesh. Advocate Sanket Gupta, counsel of BJP's Mahesh Kewat, says, "I was from the side of Mahesh… pic.twitter.com/DSV3Am2PKW
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
THIS IS PEAK CONGRESS 🔥
> Madhya Pradesh Congress MLAs came to Delhi to meet the President over Meenakshi Natarajan case
> Thousands of workers also joined
> But they were denied meeting with the President
> So they launched aggressive protests in Delhi like Tsunami
>… pic.twitter.com/Ae6RJW8SpX— Ankit Mayank (@mr_mayank) June 12, 2026
इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन पत्र अचानक खारिज कर दिया। इसके पीछे एक ऐसा कारण था जिसने सबको चौंका दिया। दरअसल, नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल किए जाने वाले 'फॉर्म 26' हलफनामे को अधूरा छोड़ दिया था। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने तेलंगाना में अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक शिकायत मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई। हैरान करने वाली बात यह थी कि नटराजन इस मामले से अनजान नहीं थीं; उन्होंने उस शिकायत के जवाब में पहले लिखित दस्तावेज भी दाखिल किए थे। इसके बावजूद, मुख्य चुनावी हलफनामे में इस जानकारी का न होना उनके लिए सबसे बड़ा जाल बन गया, जिसमें उनकी उम्मीदवारी पूरी तरह फंस गई।
#WATCH | Delhi: On Supreme Court rejecting her plea over Rajya Sabha nomination, Congress leader Meenakshi Natarajan says, "I have been saying from day one that the Election Commission is deeply compromised, and today this has been proven once again. When the lawyer for the State… pic.twitter.com/XLN6lIhoE2
— ANI (@ANI) June 12, 2026
जब मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर) के सामने पहुंचा, तो कोर्ट रूम किसी रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। नटराजन की तरफ से देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मोर्चा संभाला। सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि जिस मामले को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया है, उसमें तो कोर्ट ने अब तक संज्ञान भी नहीं लिया है और न ही आरोप तय हुए हैं। उन्होंने कुछ पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "असाधारण परिस्थितियों में अदालत को दखल देना चाहिए, ताकि चुनाव निष्पक्ष हो सकें।" दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और प्रतिवादियों के वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक कानूनी अधिकार है। अगर नामांकन रद्द हुआ है, तो उसका फैसला सिर्फ चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद 'चुनाव याचिका' (Election Petition) के जरिए ही हो सकता है, बीच में नहीं।
#WATCH | Delhi: On Supreme Court rejecting her plea over Rajya Sabha nomination, Congress leader Meenakshi Natarajan says, "We all know the Election Commission's stance. I do not wish to make any comment regarding the Supreme Court." pic.twitter.com/11UaAwwzKA
— ANI (@ANI) June 12, 2026
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने पूरी बहस पर पूर्णविराम लगा दिया। बेंच ने ऐतिहासिक 'पोन्नुस्वामी फैसले' का हवाला देते हुए साफ किया कि भारत के संविधान के तहत, एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें उसमें किसी भी तरह का दखल नहीं दे सकतीं। सिंघवी की उस दलील को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने "साफ तौर पर गैर-कानूनी" रद्दीकरण के मामलों में रियायत देने की बात कही थी। बेंच ने कहा कि अगर हम आज ऐसा कोई अपवाद बनाएंगे, तो यह संविधान के साथ खिलवाड़ होगा। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नटराजन के पास अब केवल एक ही रास्ता बचा है-वे चुनाव संपन्न होने का इंतजार करें और उसके बाद कानूनी तौर पर चुनाव याचिका दायर करें।
याचिका खारिज होने के साथ ही मीनाक्षी नटराजन के लिए इस राज्यसभा चुनाव के दरवाजे फिलहाल पूरी तरह बंद हो चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह राहत जरूर दी है कि आज की गई टिप्पणियों का असर भविष्य में नटराजन द्वारा दायर की जाने वाली किसी भी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस हाई-प्रोफाइल रद्दीकरण के बाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट का समीकरण अब क्या मोड़ लेगा? कांग्रेस इस बड़े झटके से खुद को कैसे उबारेगी, इस पर अब पूरे देश की सियासी नजरें टिकी हुई हैं।
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