
मलकानगिरी / टोक्यो। आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता, लेकिन क्या आप किसी ऐसे आम की कल्पना कर सकते हैं जिसकी कीमत आपके हाथ में मौजूद प्रीमियम आईफोन या किसी लग्जरी बाइक से भी ज्यादा हो? जी हां, हम बात कर रहे हैं मियाज़ाकी (Miyazaki) आम की, जिसे वर्तमान में दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्म होने का गौरव हासिल है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जाती है।
अब तक यह माना जाता था कि जापान के मियाज़ाकी प्रांत की नियंत्रित और बेहद आधुनिक प्रयोगशालाओं जैसे वातावरण में ही इसे उगाया जा सकता है। लेकिन इस बार प्रकृति और इंसानी जज्बे ने मिलकर एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने देश-दुनिया के कृषि वैज्ञानिकों और सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया है। ओडिशा के नक्सल प्रभावित और सुदूर इलाके मलकानगिरी के एक आदिवासी किसान देबा पधियामी ने अपने खेत में इस 'लाल सोने' की फसल उगाकर सनसनी फैला दी है।
जापान में इस जादुई आम को 'ताइयो नो तामागो' (Taiyo no Tamago) यानी 'सूरज का अंडा' कहा जाता है। इसके गहरे लाल चमकीले रंग, बेजोड़ रसीलेपन और 15% से अधिक मिठास के स्तर के कारण यह दुनिया का सबसे कीमती फल बना हुआ है। मलकानगिरी के आदिवासी किसान देबा पधियामी ने चार साल पहले इस पौधे को रोपा था। चार सालों की कड़ी मेहनत, दिन-रात की देखरेख और सावधानी के बाद आखिरकार उनके पेड़ पर 17 मियाज़ाकी आम पूरी तरह पककर तैयार हो चुके हैं। जैसे ही ये आम अपने असली रूबी जैसे लाल रंग में आए, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई। देबा पधियामी के लिए यह फसल सिर्फ एक कामयाबी नहीं, बल्कि एक भारी चुनौती भी बन चुकी है।
Unveiling the truth about the rare Miyazaki mango! 🥭 It's said to be worth more than gold, and we've finally cracked Japan's secret to growing these magnificent fruits. 🤫✨ #MiyazakiMango pic.twitter.com/ahaqwm6PZX
— Capt.Santhosh. K.C. (@captsanthoshkc) May 28, 2026
खेत पर पहरा और चोरी का खौफ: > जब प्रति किलोग्राम लाखों रुपये की कीमत वाले 17 बेशकीमती आम खुले आसमान के नीचे लटके हों, तो चोरों और असामाजिक तत्वों की नजर पड़ना लाजिमी है। देबा पधियामी के सामने इस वक्त सबसे बड़ा सस्पेंस और डर अपनी इस दुर्लभ फसल को सुरक्षित रखने का है। स्थानीय प्रशासन से लेकर किसान के परिवार तक, सभी इन आमों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और दिन-रात इसकी निगरानी की जा रही है। इस दुर्लभ फसल ने जहां लोगों का कौतूहल बढ़ाया है, वहीं किसान अब सरकार और प्रीमियम खरीदारों से मदद की गुहार लगा रहा है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की फसल की सही कीमत मिल सके और इसे सुरक्षित बाजार तक पहुंचाया जा सके।
मियाज़ाकी आम का इतना महंगा होने का राज इसकी खेती के बेहद सख्त और अनोखे तरीकों में छिपा है। जापान में इन आमों को उगाने के लिए हर एक फल को पेड़ पर ही एक विशेष जाली (Net) से बांधा जाता है।
मलकानगिरी में इस जापानी आम के उगने से भारत के अपने शाही आमों-जैसे मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का विशालकाय 'नूरजहां' (जिसकी कीमत 1,500 रुपये प्रति पीस तक होती है) और महाराष्ट्र के देवगढ़ का सुगंधित 'अल्फांसो' (हापुस)-के बीच एक दिलचस्प मुकाबला शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया के इस दौर में अब दुर्लभ फल सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और लग्जरी एक्सपीरियंस बन चुके हैं। देबा पधियामी की यह जादुई फसल यह साबित करती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो भारत की मिट्टी दुनिया का सबसे कीमती रत्न भी उगल सकती है। अब देखना यह है कि इन 17 'सूरज के अंडों' को कौन सा प्रीमियम खरीदार अपनी थाली की शान बनाता है!
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