
Modi Cabinet Expansion: केंद्र सरकार फिलहाल संसद के आगामी मॉनसून सत्र की तैयारियों में जुटी हुई है। सूत्रों के अनुसार, सत्र शुरू होने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार की संभावना काफी कम है। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल अहम विधेयकों को संसद से पारित कराने पर है। सूत्रों का कहना है कि मॉनसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह, संभवतः 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। ऐसे में कैबिनेट विस्तार की संभावना अब सितंबर या अक्टूबर में ज्यादा मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार फिलहाल मंत्रियों में बदलाव करने के बजाय संसद में जरूरी कानूनों को पास कराने को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले सत्र में परिसीमन (Delimitation) और 'एक देश, एक चुनाव' जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की तैयारी है। ऐसे में सत्र से पहले कैबिनेट फेरबदल करने से उन नेताओं में नाराजगी हो सकती है, जिन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए। सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में हर मुद्दे पर दो-तिहाई बहुमत नहीं है। इसलिए महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक असंतुष्टि से बचने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि अगर मॉनसून सत्र के बाद कैबिनेट विस्तार किया जाता है, तो सरकार को जरूरी राजनीतिक समर्थन जुटाने और सहयोगी दलों के साथ बेहतर समन्वय का समय मिल सकता है। इसी वजह से सितंबर या अक्टूबर में मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना अधिक बताई जा रही है।
हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं होगा कि संसद सत्र से पहले कैबिनेट में बदलाव हो। 7 जुलाई 2021 को मोदी 2.0 सरकार में संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया गया था। उस समय रवि शंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर सहित 12 वरिष्ठ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया गया था, जबकि 36 नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया था।
पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने चार बार केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार किया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुछ पद फिलहाल खाली हो चुके हैं।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों नेताओं को मंत्रिमंडल से हटाया जाएगा। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पंकज चौधरी को हटाने से कुर्मी समुदाय के बीच गलत संदेश जा सकता है। पहले भी चुनावी रणनीति के तहत विजय सांपला और जी. किशन रेड्डी जैसे नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी मंत्रिमंडल में बनाए रखा गया था।
1. मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा
21 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की थी। इस दौरान कैबिनेट सचिव ने विस्तृत प्रस्तुति भी दी थी। माना जा रहा है कि यह समीक्षा अगले फेरबदल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
2. युवा नेताओं को मिल सकता है मौका
बीजेपी का नेतृत्व अब युवा चेहरों पर अधिक जोर दे रहा है। पार्टी अध्यक्ष की उम्र 50 वर्ष से कम होने के कारण कैबिनेट में भी युवा नेताओं को जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान मंत्रिमंडल में 8 मंत्री 70 से 80 वर्ष की आयु के हैं। ऐसे में उनकी भूमिका पर भी नजर रहेगी।
3. राज्यसभा कार्यकाल पर नजर
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। उनके दोबारा नामांकन को लेकर भी चर्चा बनी हुई है।
4. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
सरकार 2029 से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी फोकस रहने की संभावना है। फिलहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में एकमात्र महिला सदस्य हैं।
5. आगामी विधानसभा चुनावों का असर
अगले वर्ष सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में उन राज्यों से नेताओं को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
6. लेटरल एंट्री पर भी हो सकता है विचार
सूत्रों के अनुसार, भविष्य में कुछ और पूर्व नौकरशाहों को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है।
7. OBC प्रतिनिधित्व पर रहेगा विशेष फोकस
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को लेकर सरकार का फोकस आगे भी बना रह सकता है। चूंकि चल रही जनगणना में जाति संबंधी कॉलम भी शामिल किया गया है, इसलिए अगले कैबिनेट विस्तार में OBC प्रतिनिधित्व को लेकर भी अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
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