Modi Putin Meeting: S-400, Su-57 या BrahMos, क्या हैं भारत के 3 प्रमुख एजेंडे? किन पर बनेगी बात?

Published : Sep 09, 2026, 12:28 PM IST
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सार

Modi Putin Meeting में S-400 की बाकी डिलीवरी, Su-57 Fighter Jet का Technology Transfer और BrahMos Upgrade पर चर्चा अहम होगी। जानिए India-Russia Defence Cooperation के 3 बड़े एजेंडे और क्या है भारत का फायदा।

India Russia Defence: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 11 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली मुलाकात में भारत-रूस रक्षा सहयोग एक बार फिर बातचीत के केंद्र में रहने वाला है। इस बैठक में डिफेंस सेक्टर से जुड़े कई अहम मुद्दे उठ सकते हैं, लेकिन तीन एजेंडा खास तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं-S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, रूस का Su-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट और BrahMos मिसाइल का अपग्रेड। मॉस्को की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि वह भारत के साथ अपनी कुछ सबसे एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी पर बातचीत के लिए तैयार है। ऐसे में इस बैठक को सिर्फ पुराने रक्षा समझौतों की समीक्षा के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि भारत-रूस मिलिट्री पार्टनरशिप के अगले चरण के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। पुतिन और पीएम मोदी की यह मुलाकात BRICS समिट के दौरान होगी। क्रेमलिन ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय रिश्तों के कई पहलू शामिल होंगे।

एजेंडा 1: S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पेंडिंग डिलीवरी पूरी करना

बैठक के एजेंडे में सबसे पहला और व्यावहारिक मुद्दा S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी का है। भारत ने साल 2018 में रूस के साथ $5.43 बिलियन (लगभग 45,000 करोड़ रुपये) की लागत से पांच S-400 सिस्टम खरीदने का करार किया था।

  • मौजूदा स्थिति: पांच में से तीन S-400 सिस्टम भारत को पहले ही मिल चुके हैं और वे सीमाओं पर तैनात हैं। बाकी बचे दो सिस्टम की सप्लाई 2026 तक पूरी होनी है।
  • रूस का रुख: दिमित्री पेसकोव ने साफ किया कि रूस अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है और डिलीवरी में कोई देरी नहीं होगी।
  • भारत के लिए अहमियत: S-400 भारत की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा (layered air-defense architecture) की रीढ़ है। यह दूर से ही दुश्मन के विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें तबाह कर सकता है। भारतीय रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में अतिरिक्त S-400 खरीदने को मंजूरी दी है, जिससे इस प्लेटफॉर्म की महत्ता का पता चलता है।

एजेंडा 2: Su-57 फाइटर जेट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का ऐतिहासिक प्रस्ताव

बैठक का दूसरा और सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा रूस का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 है। रूस इस एडवांस लड़ाकू विमान को भारत को बेचने के लिए सक्रिय रूप से जोर दे रहा है।

  • Su-57 की खासियत: यह 5th जनरेशन का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो स्टील्थ तकनीक, आधुनिक एवियोनिक्स और हवा से हवा तथा हवा से जमीन पर सटीक हमले करने में माहिर है। भारतीय वायुसेना अपनी घटती स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ और आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए इस पर विचार कर सकती है।
  • भारत की शर्त (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर): भारत अब केवल रेडीमेड हथियार खरीदने के मूड में नहीं है। नई दिल्ली चाहती है कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) हो ताकि इसका निर्माण भारत में ही 'मेक इन इंडिया' के तहत किया जा सके।
  • क्रेमलिन का जवाब: पेसकोव ने स्वीकार किया कि भारतीय वैज्ञानिक और रक्षा अधिकारी प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी की मांग कर रहे हैं। हालांकि 5th जनरेशन की स्टील्थ और रडार तकनीक काफी संवेदनशील होती है, लेकिन रूस इस पर बातचीत और टेक्नोलॉजी शेयरिंग के लिए तैयार है।

एजेंडा 3: ब्रह्मोस मिसाइल को अपग्रेड करना और ग्लोबल एक्सपोर्ट बढ़ाना

तीसरा प्रमुख रक्षा एजेंडा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम को अगले स्तर पर ले जाना है। भारत और रूस का यह साझा उपक्रम दोनों देशों के सैन्य संबंधों की सबसे बड़ी सफलता माना जाता है।

  • अपग्रेड का प्लान: क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्रह्मोस में नई क्षमताएं और फीचर्स जोड़े जाएं, जिससे यह और अधिक घातक और प्रतिस्पर्धी बन सके।
  • निर्यात (Defense Export) पर नजर: ब्रह्मोस का अपग्रेड न केवल भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारत को एक बड़े रक्षा निर्यातक (Defense Exporter) के रूप में भी स्थापित करेगा। भारत पहले ही फिलीपींस जैसे देशों को ब्रह्मोस बेचना शुरू कर चुका है और इस इकोसिस्टम को और बड़ा करना चाहता है।

बदलते दौर में भारत-रूस रक्षा संबंधों की नई दिशा

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने अमेरिका, फ्रांस और इजराइल से हथियार खरीदकर अपनी रक्षा आपूर्ति में विविधता ला दी है, वहीं रूस पश्चिमी पाबंदियों और यूक्रेन युद्ध की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में रूस अपनी पुरानी सप्लाई परंपरा से बाहर निकलकर जॉइंट प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और अपग्रेडेशन पर फोकस कर रहा है। 11 सितंबर की मोदी-पुतिन मुलाकात भारत-रूस सैन्य साझेदारी के अगले अध्याय की दिशा तय करने जा रही है।

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