
भोपाल: मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की अहम बैठक हुई। इसकी शुरुआत वंदे-मातरम् गायन के साथ हुई। इस बैठक में सरकार ने आने वाले वर्षों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े और जनहित से जुड़े फैसलों पर मुहर लगाई। मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जनजातीय कार्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख योजनाओं की निरंतरता के लिए कुल 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन योजनाओं का लाभ लगातार जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचता रहे और किसी भी तरह की रुकावट न आए।
स्वीकृति के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग की पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रुपये और सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति और कक्षा 9वीं की छात्रवृत्ति के लिए कुल 522 करोड़ 8 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।
मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) के तहत बड़े स्तर पर विद्युतीकरण का फैसला लिया है। इस योजना के अंतर्गत 63 हजार 77 ऐसे घर, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है, और 650 शासकीय संस्थानों को बिजली से जोड़ने के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस राशि में से केंद्र सरकार की ओर से 220 करोड़ 03 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा, जबकि 146 करोड़ 69 लाख रुपये का भार राज्य शासन वहन करेगा।
इसके अतिरिक्त मंत्रि-परिषद ने 8 हजार 521 घरों को ऑफ-ग्रिड प्रणाली से बिजली उपलब्ध कराने के लिए 97 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को भी मंजूरी दी है। यह विद्युतीकरण मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा सोलर और बैटरी आधारित सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। ऑफ-ग्रिड विद्युतीकरण से जुड़ा पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
अनुमोदन के अनुसार भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए वितरण कंपनी स्तर पर तय सीलिंग कॉस्ट के अंतर्गत काम किया जाएगा। जहां प्रति घर अनुमानित लागत 2 लाख रुपये तक होगी, वहां राज्य की विद्युत वितरण कंपनियां अधोसंरचना का निर्माण कर ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से विद्युतीकरण करेंगी। वहीं खेतों पर बने घरों, पांच घरों से छोटी बसाहटों और ऐसे दूरस्थ इलाकों में, जहां प्रति घर लागत 2 लाख रुपये से अधिक आती है, वहां 1 किलोवाट क्षमता की ऑफ-ग्रिड सोलर + बैटरी प्रणाली के जरिए बिजली पहुंचाई जाएगी।
मंत्रि-परिषद ने उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। इन्हें तकनीकी संवर्ग की वर्तमान और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए सिर्फ एक बार आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में अनारक्षित वर्ग के लिए आयु सीमा 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष निर्धारित है।
बैठक में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 को भी मंजूरी दी गई। इन नियमों के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रस्तावित नियमों में प्रक्रियाओं और अधिकारों को सरल बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को सुविधा मिलेगी और मामलों का समय पर निराकरण हो सकेगा।
नए पेंशन नियमों के तहत अब परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है। इससे ऐसे परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें अब तक इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। साथ ही पेंशन सारांशीकरण और उसकी गणना की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा आसान होगी।
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान के संदाय से जुड़े नियमों को भी मंजूरी दी है। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे और इनके प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।
नए नियमों के तहत अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ई-सेवा पुस्तिका, केंद्र और राज्य शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। निलंबन अवधि में अभिदाता और नियोक्ता के अंशदान को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। सेवा निवृत्ति के बाद विभागीय जांच की स्थिति में उपदान से वसूली संभव होगी। इसके साथ ही विभागीय जांच की अवधि में नियोक्ता के अंशदान को रोकने, सेवानिवृत्ति से तीन माह पहले अभिदाता अंशदान रोकने और नियमों में छूट या बदलाव की शक्ति राज्य शासन को देने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
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