
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। जिला कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि पंजीकृत किसानों का सही सत्यापन हो, उपार्जन केंद्रों पर पर्याप्त बारदानों (बोरियों) की उपलब्धता रहे और किसानों को समय पर भुगतान किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक के बाद जिला कलेक्टरों से वर्चुअल संवाद के दौरान दिए।
राज्य सरकार के अनुसार गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया अलग-अलग संभागों में अलग तारीखों पर शुरू होगी।
किसान 7 मार्च तक गेहूं उपार्जन के लिए अपना पंजीयन करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों का समय-सीमा में निर्धारण और उनकी स्थापना सुनिश्चित की जाए। इन केंद्रों पर किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही उपार्जन कार्य में लगे कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और जिला उपार्जन समिति नियमित बैठक कर समस्याओं का त्वरित समाधान करे। सरकार ने यह भी निर्देश दिए कि किसानों को उपार्जन प्रक्रिया से जुड़ी अद्यतन जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान में खाड़ी देशों में बनी अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों के उन विद्यार्थियों और नागरिकों के परिवारों से संपर्क बनाए रखें, जो इन देशों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेशवासियों की सहायता के लिए नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और वल्लभ भवन मंत्रालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर भी ऐसे परिवारों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि संकल्प से समाधान अभियान का अंतिम चरण चल रहा है और इसके तहत अब तक करीब 40 लाख आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। अब 16 मार्च तक जिला स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को इस अभियान की सघन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए और कहा कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो कलेक्टर अपने जिले में बेहतर प्रदर्शन और परिणाम देंगे, वही मैदान में बने रहेंगे। यही सिद्धांत अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
मुख्यमंत्री ने आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट और भोपाल जिलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेटअप से संबंधित कार्य तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वीसी सेटअप से पंचायत स्तर तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद आसान होगा और विकास कार्यों की समीक्षा भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा स्तर के विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन और प्रशासन से जुड़ी भ्रामक या गलत जानकारी फैलाने की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी खबरों का तत्काल खंडन कर सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में स्कूल और कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हैं। इसलिए जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करें ताकि परीक्षाओं का संचालन और आगामी सत्र बिना किसी बाधा के संचालित हो सके। उन्होंने जिला अधिकारियों को नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए भी कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन समय का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंत्रालय में कार्यालयीन समय के अनुसार उपस्थिति का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था।
जिला कलेक्टरों को भी अपने जिलों में इसी तरह के निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि समयपालन में सुधार नहीं हुआ तो राज्य में 6 दिन का कार्य सप्ताह लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य शासकीय कार्यालयों में आम नागरिकों के लिए बेहतर और सुगम व्यवस्था स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को मध्यप्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नवाचार करने वाले किसानों और विशेषज्ञों की प्रदर्शनी लगाई जाए। इसके साथ ही जिला स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए भी कलेक्टरों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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