चीन और अमेरिका में वैज्ञानिकों की मौतों ने बढ़ाई चिंता, क्या शुरू हो चुका है ‘Scientific Cold War’?

Published : Apr 24, 2026, 03:23 PM IST
Mysterious Deaths of Scientists in China and US Raise Fears of a New Scientific Cold War

सार

US-China Scientists Mysterious Deaths: चीन में 2 साल में हथियार और ड्रोन प्रोजेक्ट से जुड़े 8 वैज्ञानिकों और अमेरिका में परमाणु परियोजनाओं से जुड़े 10 वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। क्या दुनिया एक नए ‘साइंटिफिक कोल्ड वॉर’ की ओर बढ़ रही है?

Scientific Cold War China US: दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां, चीन और अमेरिका, इन दिनों सिर्फ व्यापार, तकनीक और सैन्य ताकत को लेकर ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतों को लेकर भी चर्चा में हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों में रक्षा, ड्रोन, परमाणु और हाइपरसोनिक तकनीक से जुड़े कई वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच चीन में हथियार, ड्रोन और मिसाइल परियोजनाओं से जुड़े 8 वैज्ञानिकों की मौत हुई, जबकि अमेरिका में भी पिछले तीन वर्षों में परमाणु परियोजनाओं से जुड़े 10 वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत की खबर सामने आई है। इन घटनाओं ने इस आशंका को जन्म दिया है कि कहीं दोनों देशों के बीच एक नया ‘साइंटिफिक कोल्ड वॉर’ तो शुरू नहीं हो गया।

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चीन में 2 साल में 8 वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, चीन में जिन वैज्ञानिकों की मौत हुई, वे देश की संवेदनशील रक्षा और तकनीकी परियोजनाओं से जुड़े थे। इनमें ड्रोन तकनीक, हाइपरसोनिक मिसाइल, स्पेस मॉनिटरिंग और उन्नत रसायन विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कुछ वैज्ञानिकों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई, जबकि कुछ की मौत को अचानक बीमारी या अज्ञात कारणों से जोड़ा गया। हालांकि, कई मामलों में अब तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका है।

किन वैज्ञानिकों की मौत ने बढ़ाई हलचल

  1. झांग जियाओक्सिन (Zhang Xiaoxin) : स्पेस मॉनिटरिंग प्रोग्राम से जुड़े झांग की 2024 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उनकी मृत्यु को लेकर अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
  2. फांग डेइंग (Fang Daining): हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट से जुड़े फांग डेइंग की 2024 में अफ्रीका दौरे के दौरान मौत हुई। वह ताइवान के मुद्दे पर काफी आक्रामक रुख के लिए भी जाने जाते थे।
  3. ली मिनयोंग (Li Minyong): साल 2025 में 49 वर्षीय ली मिनयोंग की अचानक मृत्यु ने कई सवाल खड़े किए। वे बायोमेडिकल केमिस्ट्री प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे।
  4. लियू डोंगहाओ (Liu Donghao): ड्रोन टेक्नोलॉजी परियोजना से जुड़े लियू की 2024 में दुर्घटना में मौत हुई। वह 51 वर्ष के थे।
  5. झांग दाइबिंग (Zhang Daibing): ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े झांग की 2023 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
  6. यान होंग (Yan Hong): हाइपरसोनिक मिसाइल निर्माण पर काम कर रहे यान होंग की 2024 में अज्ञात बीमारी से मृत्यु हो गई।
  7. झोउ गुआंगयुआन (Zhou Guangyuan): उन्नत रसायन परियोजना से जुड़े झोउ की 2023 में अज्ञात बीमारी के कारण मौत हुई।

इन लगातार मौतों ने चीन के रक्षा वैज्ञानिक तंत्र को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

अमेरिका में भी 10 वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत

कुछ समय पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पिछले तीन वर्षों में अमेरिका के 10 वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। ये सभी वैज्ञानिक परमाणु परियोजनाओं से जुड़े बताए गए। रिपोर्ट सामने आने के बाद व्हाइट हाउस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने की बात कही। हालांकि अब तक इस जांच से जुड़ी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या यह नया ‘साइंटिफिक कोल्ड वॉर’ है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में तकनीकी श्रेष्ठता ही वैश्विक शक्ति का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है। हाइपरसोनिक मिसाइल, ड्रोन, परमाणु क्षमता और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बढ़त किसी भी देश की रणनीतिक ताकत तय करती है। ऐसे में इन क्षेत्रों से जुड़े वैज्ञानिकों की लगातार रहस्यमयी मौतें केवल सामान्य घटनाएं नहीं मानी जा रही हैं। कई विश्लेषक इसे एक नए प्रकार के शीत युद्ध से जोड़कर देख रहे हैं, जहां लड़ाई सीमाओं पर नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं और रिसर्च सेंटरों के भीतर लड़ी जा रही है।

दोनों देशों की चुप्पी ने बढ़ाया शक

सबसे दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि न चीन ने इन मौतों पर खुलकर कोई विस्तृत बयान दिया है और न ही अमेरिका ने स्पष्ट रूप से किसी साजिश की पुष्टि की है। जब इतने संवेदनशील वैज्ञानिकों की मौत होती है और ठोस कारण सामने नहीं आते, तो स्वाभाविक रूप से संदेह गहराता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन मौतों के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय साजिश है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि दोनों महाशक्तियों में वैज्ञानिकों की लगातार संदिग्ध मौतें सामान्य घटना नहीं मानी जा सकतीं। क्या यह सिर्फ संयोग है, या फिर दुनिया एक नए अदृश्य युद्ध की ओर बढ़ रही है—इस सवाल का जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।

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