
Iranian MP Statement Mahmud Nabavian: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरानी संसद के सदस्य महमूद नबावियन ने इस बातचीत को “रणनीतिक गलती” करार देते हुए तीखा बयान दिया है। उनका कहना है कि परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे को बातचीत की मेज पर लाना ईरान की बड़ी भूल थी, जिससे विरोधी देशों को और अधिक आक्रामक रुख अपनाने का मौका मिला। नबावियन का यह बयान उस समय आया है जब कुछ सप्ताह पहले ही ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी।
SNN टीवी पर दिए गए एक इंटरव्यू के हवाले से नबावियन ने कहा कि पाकिस्तान में आयोजित वार्ता में परमाणु कार्यक्रम को शामिल करना एक गंभीर रणनीतिक चूक थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान को ऐसे संवेदनशील विषय पर बातचीत ही नहीं करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, “ऐसा करने से दुश्मनों का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने और कठोर रुख अपना लिया।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से सद्भावना दिखाने के बावजूद अमेरिका ने भरोसा कायम करने में विफलता दिखाई।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने भी वार्ता की विफलता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान का विश्वास जीतने में नाकाम रहा। उनका कहना है कि दशकों पुराने तनाव और प्रतिबंधों ने दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की मांगें अत्यधिक कठोर थीं, खासकर परमाणु संवर्धन (enrichment) और दीर्घकालिक प्रतिबंधों को लेकर, जिससे वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
इस वार्ता में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और इस्लामाबाद में दोनों पक्षों को बातचीत के लिए मंच उपलब्ध कराया। हालांकि, पाकिस्तान की तटस्थता पर सवाल उठते रहे क्योंकि वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ जटिल कूटनीतिक संबंध रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही जटिलता वार्ता की सफलता में एक बड़ी बाधा साबित हुई।
इस घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। पहले से घोषित अस्थायी युद्धविराम की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी पक्ष से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और उलझती दिख रही है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया बयान में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी समझौते में केवल वही शर्तें स्वीकार की जाएंगी जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए लाभकारी हों।
ईरान और अमेरिका के बीच यह ताजा विवाद एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की खाई अभी भी गहरी है। जहां ईरान वार्ता को “गलत दिशा में गया कदम” बता रहा है, वहीं अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ दिखाई देता है। फिलहाल, कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं और वैश्विक नजरें अब अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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