Mysore Dasara: मैसूर दशहरे में हाथी महेंद्र के साथ क्या हुआ? सोने की अंबाड़ी के लिए चुने गए हाथी को क्यों हटाया गया?

Published : Oct 13, 2026, 11:58 AM IST
Mysore Dasara

सार

मैसूर दशहरे में 42 वर्षीय हाथी महेंद्र ने 600 किलो की अंबाड़ी उठाने से मना कर दिया। रिहर्सल में उसके रुकने के कारण अब प्रशांत को यह जिम्मेदारी मिली है। दशहरे की अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के साथ इसे जोड़कर लोग चिंतित हैं।

मैसूर दशहरा मतलब जश्न, भक्ति और पुरानी परंपराओं का संगम। विजयदशमी के दिन जब हाथियों का काफिला सोने की अंबाड़ी (हौदा) लेकर निकलता है, तो लाखों लोग इसे देखने के लिए बेताब रहते हैं। लेकिन इस बार दशहरे की तैयारियों के बीच एक अजीब वाकया हुआ है। सोने की अंबाड़ी उठाने की ट्रेनिंग ले रहा हाथी 'महेंद्र' अचानक पीछे हट गया है। इसके बाद से ही दशहरे को लेकर कई तरह की बातें होने लगी हैं। आखिर महेंद्र ने ऐसा क्यों किया? क्या ये सिर्फ उसकी थकान थी या फिर हाथी का कोई सामान्य बर्ताव?

42 साल के महेंद्र के हाथ से क्यों निकला मौका?

नागरहोल टाइगर रिजर्व के बल्ले हाथी कैंप से आया 42 साल का महेंद्र उन पांच नर हाथियों में शामिल था, जिन्हें सोने की अंबाड़ी उठाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। महेंद्र काफी तगड़ा है और उसे पहले भी दूसरी जगहों पर अंबाड़ी उठाने का तजुर्बा है। इसलिए सबको उम्मीद थी कि इस बार मैसूर दशहरे में वही अंबाड़ी उठाएगा।

लेकिन रिहर्सल के दौरान जब महेंद्र लकड़ी की अंबाड़ी लेकर जा रहा था, तो वह दो बार आगे बढ़ने से ठिठक गया। सबसे पहले वह के.आर. सर्कल के गेट के पास रुका और करीब 10 मिनट से ज्यादा वहीं खड़ा रहा। महावत के काफी मनाने के बाद उसने फिर से चलना शुरू किया, लेकिन कुछ ही मीटर दूर जाकर वह दोबारा रुक गया।

तय रास्ते पर कई जगह महेंद्र के इस तरह रुकने और आगे न बढ़ने की वजह से अधिकारियों ने उसे सोने की अंबाड़ी उठाने वाले हाथियों की लिस्ट से बाहर कर दिया। अब उसकी जगह 'प्रशांत' नाम के हाथी को यह जिम्मेदारी दी गई है। ऊपर से देखने पर महेंद्र को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं लग रही है। फिर भी उसने अंबाड़ी उठाने से क्यों मना किया, यह सवाल महावत से लेकर बड़े अधिकारियों तक सबको परेशान कर रहा है。

क्या 600 किलो की अंबाड़ी से थक गया था महेंद्र?

कुछ लोगों का मानना है कि बारिश और फिसलन भरी सड़क की वजह से महेंद्र पीछे हट गया। शायद उसे पैर फिसलने का डर था, इसलिए वह संभलकर खड़ा हो गया। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दूसरी बार करीब 600 किलो की लकड़ी की अंबाड़ी उठाने की वजह से वह थक गया होगा।

दशहरे के दौरान हुई इन घटनाओं से छिड़ी चर्चा!

इस बार मैसूर दशहरे के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। शुभ माने जाने वाले नंदी ध्वज का अचानक टूटकर गिरना, प्राइवेट दरबार के दौरान यदुवीर वाडियार का सिंहासन के पास लड़खड़ाना जैसी बातों पर खूब चर्चा हो रही है। इसके अलावा, एक कार्यक्रम में देवी चामुंडी की मूर्ति हाथ से फिसलने का वीडियो भी वायरल हुआ है।

अब सोने की अंबाड़ी उठाने से महेंद्र के पीछे हटने ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। इन सभी घटनाओं को एक साथ जोड़कर देखते हुए कुछ लोग सवाल कर रहे हैं, 'क्या मां चामुंडेश्वरी कोई संकेत दे रही हैं?'

हाथी की सेहत सबसे जरूरी

21 अक्टूबर को होने वाले जुलूस में सोने की अंबाड़ी उठाने वाले हाथी को भक्तों की भारी भीड़ के बीच से गुजरना होता है। ऐसे में हाथी की सेहत, उसका स्वभाव और उसका आराम सबसे पहली प्राथमिकता होती है। महेंद्र का पीछे हटना दशहरे की तैयारियों में एक बड़ी घटना जरूर है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह जानने के लिए अभी और जानकारी चाहिए। एक तरफ धार्मिक मान्यताएं हैं, तो दूसरी तरफ हाथी के सामान्य बर्ताव और उसकी सुरक्षा को वैज्ञानिक नजरिए से समझना भी उतना ही जरूरी है।

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