
Houthis Rebels Explained: यमन से उठे हूती विद्रोही आज सिर्फ एक देश की समस्या नहीं हैं। लाल सागर में जहाजों पर हमले, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें और ड्रोन के इस्तेमाल ने उन्हें मिडिल ईस्ट के बड़े सुरक्षा संकटों में शामिल कर दिया है। सऊदी अरब के एयरपोर्ट और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के उनके दावों ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर हूती कौन हैं, उनकी ताकत कहां से आती है और उन्हें रोकना इतना मुश्किल क्यों है?
हूती आंदोलन की शुरुआत 1990 के दशक में यमन के उत्तरी हिस्से में हुई थी। इसका आधार जैदी शिया समुदाय है, जो लंबे समय से इस इलाके में रहता आया है। इस समुदाय के लोगों में राजनीतिक और आर्थिक उपेक्षा को लेकर असंतोष था। इसी माहौल में हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती के नेतृत्व में आंदोलन उभरा। इस संगठन का आधिकारिक नाम अंसार अल्लाह है, जिसका अर्थ है 'ईश्वर के समर्थक'। हालांकि, इसके संस्थापक के नाम पर इसे दुनिया भर में हूती आंदोलन के रूप में पहचाना जाता है।
ये भी पढ़ें- Riyadh Airport Attack: रनवे पर गिरा गोला, मिसाइल हमले का सबसे खौफनाक वीडियो
हूती विद्रोहियों की ताकत तब तेजी से बढ़ी, जब उन्होंने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद देश में संघर्ष तेज हो गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को पीछे हटना पड़ा।
मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब का उद्देश्य विद्रोहियों को पीछे धकेलना और यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करना था। लेकिन वर्षों की लड़ाई और हवाई हमलों के बावजूद हूती उत्तरी यमन के बड़े हिस्से में अपना नियंत्रण बनाए रखने में कामयाब रहे।
इस संघर्ष ने यमन में गंभीर मानवीय संकट पैदा किया। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से 2022 में युद्धविराम हुआ, हालांकि इससे देश की राजनीतिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला।
हूती केवल गुरिल्ला लड़ाके नहीं हैं। उनके पास मिसाइलें, ड्रोन और दूसरे सैन्य हथियार हैं। लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता ने उन्हें सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय सैन्य ताकतवर देश के लिए भी चुनौती बना दिया है। हूतियों की रणनीति की कुछ अहम बातें हैं-
यही वजह है कि केवल हवाई हमलों से हूतियों की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं रहा है।
हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने इस संगठन की सैन्य क्षमता बढ़ाने में हथियारों, ट्रेनिंग और तकनीकी मदद के जरिए भूमिका निभाई है। हालांकि, हूतियों को पूरी तरह ईरान के इशारे पर चलने वाला संगठन मानना सही नहीं होगा। उनके अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय हित भी हैं। हूती नेतृत्व ईरान से करीबी संबंधों के बावजूद अपनी स्वतंत्र पहचान पर जोर देता है। सऊदी अरब और ईरान के बीच क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा ने यमन के संघर्ष को और जटिल बनाया है। यही वजह है कि हूतियों के खिलाफ लड़ाई केवल यमन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ता है।
ये भी पढ़ें- Riyadh Airport Attack: रियाद एयरपोर्ट हमले में घायल भारतीय की मौत, पत्नी-बच्चे भी अस्पताल में भर्ती
नवंबर 2023 से हूतियों ने लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास जहाजों पर हमले शुरू किए। उन्होंने इन हमलों को गाजा में फलस्तीनियों के समर्थन में उठाया गया कदम बताया। इन घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ और कई शिपिंग कंपनियों को अफ्रीका के रास्ते लंबा समुद्री चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ा। इस पूरे मामले में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बेहद अहम है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप-एशिया के बीच समुद्री व्यापार के प्रमुख रास्तों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई, माल ढुलाई और वैश्विक बाजार पर असर पड़ सकता है।
हूतियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता के साथ यमन का कठिन भूगोल है। पहाड़ी इलाकों में उनके ठिकानों को निशाना बनाना आसान नहीं है। इसके अलावा, अलग-अलग दिशाओं और प्रकार के हथियारों से हमले होने पर एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है। रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हालिया हमले को लेकर सऊदी अधिकारियों ने जांच शुरू की है। हूतियों ने हमले की सफलता का दावा किया है, जबकि सऊदी पक्ष ने मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई की जानकारी दी है।कुल मिलाकर, हूती आंदोलन की कहानी स्थानीय असंतोष से शुरू होकर गृहयुद्ध, ईरान-सऊदी प्रतिद्वंद्विता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा तक पहुंच चुकी है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।