
मैसूर: एक किसान अपनी ही कमाई हुई ज़मीन का सरकारी रिकॉर्ड (खाता) बनवाने के लिए आठ साल तक एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकता रहा। जब सिस्टम से हार गया, तो उसने सरकारी दफ्तर के सामने ही ज़हर पीकर जान देने की कोशिश की। ये दर्दनाक घटना मैसूर ज़िले के सालीग्राम की है।
सालीग्राम तहसील के चिक्कनायकनहल्ली गांव के रहने वाले 70 साल के किसान रंगेगौड़ा अपनी 24 गुंटा (लगभग आधा एकड़) ज़मीन का खाता बनवाने के लिए पिछले 8 सालों से चक्कर काट रहे थे। दो साल पहले उन्होंने नाड कचेरी (तहसील जैसा एक सरकारी दफ्तर) में बाकायदा अर्ज़ी भी दी थी, लेकिन अधिकारी इस गरीब किसान को बस दौड़ाते रहे। तहसीलदार से शिकायत करने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बात से दुखी होकर किसान ने सालीग्राम नाड कचेरी के बाहर ही कीटनाशक पी लिया।
ज़हर पीने के बाद रंगेगौड़ा वहीं गिर पड़े। उन्हें फौरन मैसूर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल वो ICU में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि 'अगले 48 घंटे कुछ भी कहना मुश्किल है'। इस खबर से परिवार में मातम पसरा है। सालीग्राम पुलिस स्टेशन में इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।
रंगेगौड़ा के बेटे वेंकटेश ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा, 'अधिकारियों ने मेरे पिता के ज़िंदा होने के सबूत को छोड़कर बाकी सारे दस्तावेज़ मांग लिए।' उन्होंने बताया, 'इन आठ सालों में हम दो विधायकों, ज़िला अधिकारियों, तहसीलदार और बाकी छोटे-बड़े अफसरों के पास गए। इसमें हमारे करीब 2.5 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन काम फिर भी नहीं हुआ।'
किसान के ज़हर पीने की खबर जैसे ही फैली, सोए हुए अधिकारी जाग गए। अब वे कह रहे हैं कि '15 दिन में खाता बनवा देंगे'। इस पर बेटे वेंकटेश ने नाराज़गी जताते हुए कहा, 'जो काम 8 साल में नहीं हुआ, वो अगर अब 15 दिन में होता है तो हो जाए। शायद इसी बहाने दूसरे किसानों का तो भला होगा।' परिवार का कहना है कि पिता के होश में आने के बाद इस लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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