
Himanta Biswa Sarma Son: समुद्र की ऊंची लहरें, तपती सड़कें और थकान से टूटता शरीर… लेकिन 21 साल के नंदिल सरमा रुकने वाले नहीं थे। वियतनाम के दा नांग शहर में आयोजित दुनिया की सबसे कठिन एंड्योरेंस रेसों में गिने जाने वाले आयरमैन वियतनाम (Ironman Vietnam) में उन्होंने वह कर दिखाया, जिसे पूरा करने का सपना हजारों एथलीट देखते हैं। लगभग 16 घंटे तक लगातार संघर्ष करने के बाद नंदिल ने फिनिश लाइन पार की और उसी पल उनका नाम चर्चा में आ गया। यह उपलब्धि सिर्फ एक खेल जीत नहीं थी, बल्कि अनुशासन, मानसिक ताकत और असंभव लगने वाले लक्ष्य को हासिल करने की कहानी बन गई।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अक्सर अपनी कड़क राजनीति और कड़े फैसलों के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार सुर्खियां उनकी राजनीति नहीं, बल्कि उनके 21 साल के बेटे नंदिल सरमा बटोर रहे हैं। नंदिल ने सात समंदर पार वियतनाम की धरती पर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे दुनिया के सबसे क्रूर और थका देने वाले खेल आयोजनों में गिना जाता है। नंदिल सरमा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के बेटे हैं। फिलहाल वे नेशनल लॉ स्कूल आफ इंडिया युनिवर्सिटी (National Law School of India University) में लॉ की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हैं। पढ़ाई के भारी दबाव के बीच आयरन मैन (Ironman) जैसे कठिन इवेंट की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन नंदिल ने सिर्फ सात से आठ महीनों की ट्रेनिंग में यह मुकाम हासिल कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इससे पहले बहरीन में Ironman 70.3 रेस पूरी की थी। तभी उन्होंने तय किया था कि ग्रेजुएशन से पहले पूरा आयरनमैन (Ironman) चैलेंज खत्म करना है। अब उन्होंने अपना वह सपना समय रहते पूरा कर लिया। उन्होंने अब उस लक्ष्य को समय रहते पूरा कर लिया है, क्योंकि उन्होंने पूरे Ironman चैलेंज की तैयारी सिर्फ़ सात से आठ महीनों में की थी।
10 मई को वियतनाम के तटीय शहर दा नांग में जब सुबह की पहली किरण पड़ी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि भारत से आया एक 21 साल का युवा इतिहास लिखने की दहलीज पर खड़ा है। 'आयरनमैन' कोई सामान्य दौड़ नहीं है; यह बिना किसी ब्रेक के, लगातार एक ही दिन में पूरी की जाने वाली महा-चुनौती है। नंदिल सरमा ने इस रेस को पूरा करने के लिए लगभग 16 घंटे तक अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं की अंतिम परीक्षा दी।
इस खौफनाक सफर में शामिल था:
एक के बाद एक, बिना किसी आराम के इन तीनों चरणों को लगातार पूरा करना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है। जब मैराथन का आखिरी चरण शुरू हुआ, तो शरीर पूरी तरह टूट चुका था, लेकिन नंदिल की मानसिक मजबूती ने उन्हें रुकने नहीं दिया और उन्होंने फिनिश लाइन पार करके ही दम लिया।
तटीय शहर दा नांग में होने वाला Ironman Vietnam, इस इलाके की सबसे बड़ी लंबी दूरी की एंड्योरेंस रेसों में से एक है और प्रतिष्ठित आयरनमैन विश्व चैंपियनशिप (Ironman World Championship) के लिए क्वालिफ़ाई करने का एक बड़ा इवेंट है। इसे दुनिया के सबसे कठिन वन-डे स्पोर्ट्स इवेंट्स में गिना जाता है। इसमें प्रतिभागियों को बिना रुके लगातार तीन चरण पूरे करने होते हैं-3.8 किलोमीटर ओपन-वॉटर स्विमिंग, 180 किलोमीटर साइकिलिंग और आखिर में 42.2 किलोमीटर की फुल मैराथन यानी कुल मिलाकर 226 किलोमीटर से ज्यादा की शारीरिक और मानसिक परीक्षा जो बिना किसी ब्रेक के लगातार की जाती है।
जैसे ही नंदिल ने वियतनाम में फिनिश लाइन पार की, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा: "एक पिता के तौर पर, उसकी अनुशासन, पक्का इरादा और लगन देखकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। मैं उसके आगे के सफ़र और ज़िंदगी में कई और मंज़िलें पाने के लिए उसे शुभकामनाएँ देता हूं।" मुख्यमंत्री के इस पोस्ट के बाद पूरे असम और देश भर से बधाइयों का तांता लग गया है। लोग इस बात की सराहना कर रहे हैं कि एक वीआईपी परिवार से ताल्लुक रखने और देश की सबसे कठिन लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ने के बावजूद, नंदिल ने जिस सादगी, समर्पण और अनुशासन के साथ खुद को तपाया, वह आज के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है। अगले साल अपनी कानून की डिग्री पूरी करने जा रहे इस युवा एथलीट ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
अगले साल नंदिल अपनी लॉ डिग्री पूरी करेंगे, लेकिन Ironman Vietnam के बाद अब उनकी पहचान सिर्फ एक मुख्यमंत्री के बेटे की नहीं, बल्कि एक ऐसे युवा एथलीट की बन चुकी है जिसने जिद, अनुशासन और मानसिक ताकत से दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक को जीत लिया।
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