Natural Farming UP: 94,300 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती, बुंदेलखंड बना मॉडल क्षेत्र

Published : Feb 19, 2026, 04:32 PM IST
Uttar Pradesh Natural Farming

सार

Natural Kheti UP: उत्तर प्रदेश में Natural Farming को मिशन मोड में बढ़ावा दिया जा रहा है। 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार हो चुका है, जबकि बुंदेलखंड में 23,500 हेक्टेयर में गो-आधारित खेती लागू है। सरकार टिकाऊ कृषि मॉडल पर फोकस कर रही है। जानिए

Uttar Pradesh Natural Farming: योगी आदित्यनाथ सरकार ने मिशन मोड में काम तेज कर दिया है। राज्य के सभी 75 जिलों में अब तक करीब 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इसे जल्द ही एक लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का है। इस अभियान में खास तौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है, जहां इसे मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर टिकाऊ कृषि व्यवस्था तैयार करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है।

बुंदेलखंड Natural Farming Model: 23,500 हेक्टेयर में गो-आधारित खेती

बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गो-आधारित प्राकृतिक खेती का विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल का मकसद खेती की लागत घटाकर किसानों को ज्यादा लाभ दिलाना है। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की सेहत सुधारने और उत्पादन को टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि बुंदेलखंड प्राकृतिक खेती का सफल उदाहरण बने।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा: जीवामृत और घनजीवामृत पर जोर

सरकार ‘कम लागत, ज्यादा लाभ’ वाले कृषि मॉडल को आगे बढ़ा रही है। प्राकृतिक खेती में जीवामृत और घनजीवामृत जैसे पारंपरिक जैविक उपायों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनसे रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। यह मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद माना जा रहा है।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए लाभकारी Natural Farming

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, प्राकृतिक खेती से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है और उसकी जलधारण क्षमता बढ़ती है। बुंदेलखंड जैसे कम वर्षा वाले इलाकों में यह पद्धति खेती को ज्यादा स्थिर और टिकाऊ बना सकती है। इससे क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।

किसानों का प्रशिक्षण: Natural Farming Techniques से सशक्तिकरण

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। किसानों को प्राकृतिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे इस पद्धति को आसानी से अपना सकें। इससे खेती की नई प्रणाली मुख्यधारा में आएगी और किसान आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

स्वास्थ्य, पर्यावरण और आय में सकारात्मक बदलाव

प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और पर्यावरण के अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने से किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही रासायनिक मुक्त उत्पादन से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को भी फायदा मिलेगा। सरकार की दूरदर्शी नीति के चलते उत्तर प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बुंदेलखंड इस बदलाव का नेतृत्व करता दिखाई दे रहा है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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