Nobel Peace Prize 2026: मजदूर परिवार की बेटी कैसे पहुंचीं नोबेल तक! कौन हैं नवी पिल्लै?

Published : Oct 09, 2026, 03:36 PM IST

Navi Pillay Story: कभी जिनके दादा-दादी भारत से दक्षिण अफ्रीका गए, गन्ने के खेतों में मजदूरी की, उन्ही के परिवार की बेटी नवी पिल्लै नोबेल तक कैसे पहुंचीं? जानिए संघर्ष और रंगभेद के खिलाफ उनकी लड़ाई की कहानी, 6 तस्वीरों में पूरी कहानी।

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Navi Pillay: भारतीय मूल की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की पूरी कहानी

Nobel Peace Prize 2026: वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ और मानवाधिकारों की बड़ी पैरोकार नवनेथम "नवी" पिल्लै को प्रदान किया गया है। शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने की उनकी लंबी लड़ाई का यह वैश्विक सम्मान है। खास बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका के डरबन की बस्तियों से दुनिया की सबसे बड़ी अदालतों तक पहुंचने वाली पिल्लै का परिवार मूल रूप से भारतीय (तमिल) मूल का है।

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Navi Pillay का भारत से क्या है कनेक्शन?
  • भारतीय तमिल परिवार में जन्म: नवनथेम ‘नवी’ पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है।
  • दादा-दादी भारत से गए थे: उनके दादा-दादी 1890 के दशक में भारत से नटाल पहुंचे थे। वहां गन्ने के बागानों में अनुबंध मजदूरों के तौर पर काम किया।
  • उस दौर में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूरों को कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था।
  • आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाई: पिल्लै आठ भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर थीं। उनके पिता नारायणसामी नायडू बस ड्राइवर थे।
  • मां संथामा चाहती थीं कि बेटियों को भी बेटों की तरह शिक्षा मिले। पैसे की कमी के कारण वह बड़ी संतानों की पुरानी किताबों के खाली पन्नों से नोटबुक तैयार करती थीं।
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Navi Pillay की पढ़ाई और वकालत का सफर
  • यूनिवर्सिटी ऑफ नटाल से कानून की पढ़ाई: पिल्लै ने 1963 में बैचलर ऑफ आर्ट्स और 1965 में कानून की डिग्री हासिल की।
  • अपनी लॉ फर्म शुरू की: 1967 में उन्होंने अपनी कानूनी फर्म खोली। वह अपने गृह प्रांत नटाल में ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं।
  • रंगभेद के खिलाफ कानूनी लड़ाई: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर में उन्होंने भेदभाव का सामना कर रहे लोगों का पक्ष रखा।

बाद में हार्वर्ड लॉ स्कूल में आगे की पढ़ाई की और दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में जज बनने वाली पहली गैर-श्वेत महिला बनीं।

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International Court और UN में निभाईं अहम भूमिकाएं
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों में काम: पिल्लै ने रवांडा के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में जज के रूप में काम किया और इसकी अध्यक्ष भी बनीं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में भी न्यायाधीश की जिम्मेदारी निभाई।
  • संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख: 2008 से 2014 तक वह संयुक्त राष्ट्र की हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स रहीं। इस भूमिका में उन्होंने मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा की रक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम किया।
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Navi Pillay को Nobel Peace Prize 2026 क्यों मिला?
  • नवी पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।
  • उनका सफर दिखाता है कि भारतीय मूल के एक परिवार से निकलकर वह वैश्विक न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका तक पहुंचीं।

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