
NEET Paper Leak Case: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर चल रहे पेपर लीक मामले में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में एक और कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी महिला ने परीक्षा से पहले फिजिक्स के सवाल लीक किए थे। इस गिरफ्तारी के बाद NEET पेपर लीक केस ने फिर से देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह संकेत दे रही हैं कि मामला सिर्फ एक सीमित नेटवर्क तक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है।
CBI ने आरोपी महिला की पहचान मनीषा संजय हवालदार के रूप में की है। उसे महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया है कि वह पुणे के सेठ हीरालाल सराफ प्रशाला में कार्यरत थी। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने उसे परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी दौरान उसे फिजिक्स प्रश्नपत्र तक पहुंच मिली थी। जांच एजेंसियों को शक है कि उसने परीक्षा से पहले कई सवाल लीक किए और इस काम में पहले से गिरफ्तार आरोपी मनीषा मठारे के साथ मिलकर काम किया।
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CBI जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई कि जिन सवालों के लीक होने की आशंका जताई गई थी, उनका मिलान वास्तविक NEET प्रश्नपत्र से किया गया। अधिकारियों के अनुसार जांच में कई सवाल वही पाए गए, जो परीक्षा में पूछे गए थे। इस खुलासे के बाद एजेंसियों को शक है कि परीक्षा प्रणाली के भीतर से ही पेपर तक पहुंच बनाई गई थी। यही वजह है कि अब जांच सिर्फ लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
मनीषा हवालदार की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। CBI अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर समेत कई शहरों से आरोपियों को पकड़ चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए तकनीकी और व्यक्तिगत संपर्कों का इस्तेमाल किया गया।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं लगातार शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबरें मेहनत करने वाले छात्रों के मन में असुरक्षा और निराशा पैदा करती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारी करना काफी नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
CBI फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किन-किन लोगों तक पहुंचा, कितने छात्रों को इसका फायदा मिला और इस पूरे रैकेट का संचालन कौन कर रहा था। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। वहीं छात्रों और अभिभावकों की नजर अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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