एंबुलेंस पहुंचने में हुई देरी तो भरना पड़ेगा जुर्माना! NHAI ने तय की मिनट-मिनट की जवाबदेही

Published : Aug 12, 2026, 11:45 PM IST
NHAI Tightens Highway Emergency Response Ambulances Must Reach Within 10 Minutes Penalties for Delays

सार

NHAI ने हाईवे पर दुर्घटनाओं के बाद राहत और बचाव के लिए NHAI Care System अनिवार्य किया है। एंबुलेंस को 10 किमी तक 10 मिनट में पहुंचना होगा। देरी, टिकट स्वीकार करने और अस्पताल पहुंचाने में लापरवाही पर 2.50 लाख तक जुर्माना लगेगा।

हाईवे पर हादसा होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण होता है समय। दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट कई बार घायल की जान बचाने में निर्णायक साबित होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाईवे पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

NHAI ने NHAI केयर सिस्टम का इस्तेमाल अपनी सभी परियोजनाओं में अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद दुर्घटना के बाद एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग टीम की प्रतिक्रिया को ट्रैक करना और यह सुनिश्चित करना है कि मदद तय समय के भीतर घटनास्थल तक पहुंचे।

बुधवार को जारी सर्कुलर के मुताबिक, अब हाईवे परियोजनाओं पर तैनात ऑन-रोड यूनिट्स के कामकाज की निगरानी तकनीक के जरिए की जाएगी। साथ ही एंबुलेंस सेवाओं के लिए पहली बार कई स्पष्ट SLA और KPI तय किए गए हैं। इनका पालन नहीं करने पर संबंधित सेवा प्रदाता पर जुर्माना लगाया जाएगा।

NHAI केयर सिस्टम क्या है और कैसे करेगा काम?

नई व्यवस्था के तहत NHAI की परियोजनाओं पर तैनात सभी ऑन-रोड यूनिट्स के लिए NHAI केयर सिस्टम का इस्तेमाल जरूरी होगा। इसमें एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहन भी शामिल हैं। सभी ऑन-रोड यूनिट्स में AIS-140 मानक वाले GPS लगाए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक वाहन को IoT SIM वाले Android मोबाइल डिवाइस दिए जाएंगे, जिनमें NHAI केयर मोबाइल ऐप पहले से इंस्टॉल होगा।

घटना प्रबंधकों को Android टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें NHAI केयर डैशबोर्ड ऐप होगा। इससे दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में वाहन की लोकेशन और रिस्पॉन्स से जुड़ी जानकारी सिस्टम में दर्ज और मॉनिटर की जा सकेगी। यानी अब केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि एंबुलेंस भेज दी गई है। सिस्टम के जरिए यह भी देखा जा सकेगा कि एंबुलेंस कब चली, कितनी देर में पहुंची और मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में कितना समय लगा।

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24 घंटे चलेगा NHAI का कॉल सेंटर

नई व्यवस्था के तहत NHAI ने 24×7 कॉल सेंटर भी स्थापित किया है। प्रत्येक शिफ्ट में आठ हेल्पलाइन कर्मचारी और एक डॉक्टर तैनात रहेगा।

इसके साथ ही NHAI के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों (RO) और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों (PIU) को NHAI केयर डैशबोर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सिस्टम के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य दुर्घटना की सूचना मिलने से लेकर राहत और बचाव कार्य पूरा होने तक पूरी प्रक्रिया को एक ही सिस्टम के जरिए मॉनिटर करना है।

एंबुलेंस को 1 मिनट में इमरजेंसी टिकट स्वीकार करना होगा

नई व्यवस्था में एंबुलेंस सेवाओं के लिए कई सख्त टाइमलाइन तय की गई हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण नियम है कि इमरजेंसी टिकट को एक मिनट से कम समय में स्वीकार करना होगा। यदि टिकट स्वीकार करने में निर्धारित समय से अधिक देरी होती है तो प्रत्येक अतिरिक्त मिनट पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य यह है कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद शुरुआती स्तर पर ही प्रतिक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

10 किलोमीटर के भीतर एंबुलेंस को 10 मिनट में पहुंचना होगा

NHAI ने एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किया है। यदि दुर्घटना स्थल एंबुलेंस से 10 किलोमीटर तक की दूरी पर है तो एंबुलेंस को 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना होगा। निर्धारित समय के बाद पहुंचने पर प्रति घटना 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हाईवे पर गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में यह समय सीमा काफी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि घटनास्थल तक पहुंचने में होने वाली देरी का सीधा असर घायल व्यक्ति को मिलने वाली शुरुआती चिकित्सा सहायता पर पड़ सकता है।

अस्पताल पहुंचाने में देरी पर भी 10 हजार रुपये का जुर्माना

NHAI ने केवल घटनास्थल तक पहुंचने का समय ही तय नहीं किया है। मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नियम के अनुसार, इमरजेंसी टिकट स्वीकार होने के एक घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें देरी होने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, किसी इमरजेंसी टिकट को बिना उचित आधार के अस्वीकार करने पर भी प्रति अस्वीकृति 10,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

एंबुलेंस उपलब्ध नहीं तो नजदीकी प्रोजेक्ट से आएगी मदद

कई बार किसी परियोजना क्षेत्र में एंबुलेंस पहले से किसी दूसरे मरीज या दुर्घटना में व्यस्त हो सकती है। ऐसी स्थिति के लिए भी NHAI ने व्यवस्था तय की है। अगर किसी घटना के समय संबंधित परियोजना क्षेत्र में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है तो नजदीकी परियोजना की एंबुलेंस को तुरंत सहायता के लिए भेजना होगा।

इससे एक ही परियोजना में उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के हाईवे नेटवर्क की इमरजेंसी सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हर 24 घंटे में 5 किलोमीटर का ड्राई रन जरूरी

NHAI ने केवल वास्तविक दुर्घटनाओं के दौरान रिस्पॉन्स सुधारने पर ध्यान नहीं दिया है, बल्कि ऑन-रोड टीमों की तैयारी को भी नई व्यवस्था का हिस्सा बनाया है। नियम के अनुसार, हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना होगा। इसका उद्देश्य यह देखना है कि एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट्स वास्तविक स्थिति में कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया दे सकती हैं। इसका पालन नहीं होने पर संबंधित सेवा के मासिक भुगतान में कटौती की जाएगी।

कौन-कौन से नियम टूटने पर लगेगा जुर्माना?

NHAI ने एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी के लिए कुल 10 प्रमुख मेट्रिक्स तय किए हैं। इनमें ऐप और GPS की उपलब्धता, इमरजेंसी टिकट स्वीकार करने का समय, घटनास्थल तक पहुंचने का समय और मरीज को अस्पताल पहुंचाने जैसी चीजें शामिल हैं। NHAI केयर ऐप या GPS की उपलब्धता 99 प्रतिशत से अधिक बनाए रखना जरूरी होगा। इसमें कमी आने पर 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा।

इसी तरह टिकट स्वीकार करने में देरी पर प्रति अतिरिक्त मिनट 5,000 रुपये, 10 किलोमीटर तक की दूरी पर एंबुलेंस पहुंचने में देरी पर प्रति घटना 10,000 रुपये और मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी पर 10,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक लगेगा मासिक जुर्माना

नई व्यवस्था की खास बात यह है कि KPI और SLA के अनुपालन की निगरानी काफी हद तक NHAI केयर सिस्टम के जरिए स्वचालित होगी। यानी जुर्माने की गणना केवल मैनुअल रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि सिस्टम में दर्ज डेटा के आधार पर की जाएगी। सभी निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर कुल अधिकतम मासिक जुर्माना 2.50 लाख रुपये तक हो सकता है। यह राशि संबंधित एजेंसी या सेवा प्रदाता के मासिक अथवा त्रैमासिक भुगतान से काटी जाएगी। NHAI ने सभी परियोजना निदेशकों और क्षेत्रीय अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

हाईवे पर सफर करने वालों के लिए इसका क्या मतलब है?

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर हाईवे पर यात्रा करने वाले आम लोगों पर पड़ सकता है। दुर्घटना की स्थिति में मदद की सूचना मिलने, एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने और घायल को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया को अब ज्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।

NHAI का यह कदम केवल एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने के बजाय रिस्पॉन्स टाइम और जवाबदेही तय करने पर केंद्रित है। अगर तय मानकों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो हाईवे दुर्घटनाओं के बाद राहत और बचाव व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि GPS, NHAI केयर ऐप, प्रशिक्षित स्टाफ और एंबुलेंस नेटवर्क सभी परियोजनाओं में कितनी प्रभावी तरीके से काम करते हैं। फिलहाल NHAI ने तकनीक और वित्तीय जवाबदेही के जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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