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कश्मीर का जिक्र कर एर्दोगन ने मधुमक्खी के छत्ते में डाला हाथ, भारत की दोटूक-किसी तीसरे की जरूरत नहीं
Erdogan UNGA Speech: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाया। हालांकि, भारत ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए साफ कहा कि इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं।
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कश्मीर पर क्या बोले एर्दोगन
- एर्दोगन ने कहा कि कश्मीर समेत दक्षिण एशिया के सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
- एर्दोगन ने अपने भाषण में कहा कि दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे समेत सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में रहते हुए बातचीत के जरिए निकाला जाए।
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भारत ने तुर्की के रुख पर जताई आपत्ति
- एर्दोगन की टिप्पणियों पर भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है। भारत का कहना है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।
- भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं है।
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कश्मीर पर भारत का रुख क्या है?
- भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। विदेश मंत्रालय ने हालिया बयानों में भी इस रुख को दोहराया है।
- भारत का कहना है कि कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही देखा जाना चाहिए।
- वहीं, एर्दोगन अपने UNGA भाषणों में कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाने की बात करते रहे हैं।
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तुर्की और भारत के रुख में अंतर
- कश्मीर मुद्दे पर तुर्की और भारत के रुख में अंतर साफ दिखाई देता है।
- तुर्की के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और बातचीत के जरिए समाधान की बात करते हैं, जबकि भारत कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा मानता है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करता है।
- इसी वजह से एर्दोगन की कश्मीर संबंधी टिप्पणियों पर भारत ने अपना पुराना और स्पष्ट रुख दोहराया है।
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एर्दोगन पहले भी उठा चुके हैं कश्मीर मुद्दा
- यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाया है। इससे पहले पिछले साल सितंबर में भी उन्होंने UNGA के अपने भाषण में कश्मीर विवाद के समाधान की बात कही थी।
- उस समय एर्दोगन ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर में लोगों की भलाई के लिए इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर और बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।
- इस तरह तुर्की के राष्ट्रपति ने एक बार फिर अपने UNGA भाषण में कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया और बातचीत के जरिए समाधान की बात रखी।
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