
Nipah Virus Outbreak In India: भारत में निपाह वायरस के नए मामलों की पुष्टि होते ही सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में चिंता बढ़ गई है। यह वही वायरस है जिसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है। जैसे ही पश्चिम बंगाल में इसके मामले सामने आए, कई एशियाई देशों ने तुरंत एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, हेल्थ चेक और यात्रियों की निगरानी सख्त कर दी।
निपाह वायरस को लेकर डर इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह इंसान से इंसान में फैल सकता है, और अभी तक इसका कोई पक्का इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसे हाई रिस्क और महामारी फैलाने की क्षमता वाला वायरस मानता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता के पास एक निजी अस्पताल में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की गई। करीब 100 लोगों को क्वारंटाइन किया गया, जबकि 180 से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है। इनमें से करीब 20 लोग हाई रिस्क कैटेगरी में हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। संक्रमित नर्सों में से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
थाईलैंड ने भारत के पश्चिम बंगाल से आने वाले यात्रियों के लिए अपने बड़े एयरपोर्ट—सुवर्णभूमि, डॉन मुआंग और फुकेट—पर हेल्थ चेक तेज कर दिया है। यात्रियों की बुखार, सांस की परेशानी और अन्य लक्षणों के लिए जांच की जा रही है। साथ ही, लोगों को हेल्थ अलर्ट कार्ड दिए जा रहे हैं ताकि लक्षण दिखने पर तुरंत रिपोर्ट किया जा सके। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को क्वारंटाइन भी किया जा सकता है।
नेपाल ने भारत से लगने वाली सीमाओं और त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य डेस्क बनाए गए हैं और अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि जरा-सी भी शंका होने पर तुरंत रिपोर्ट करें। नेपाल सरकार को भारत-नेपाल के बीच लगातार आवाजाही को लेकर खास चिंता है।
ताइवान निपाह वायरस को कैटेगरी-5 नोटिफाएबल डिजीज घोषित करने की तैयारी में है, जो वहां की सबसे गंभीर बीमारी श्रेणी है। इसका मतलब है कि अगर कोई केस मिलता है तो तुरंत रिपोर्टिंग, सख्त आइसोलेशन और नियंत्रण जरूरी होगा। फिलहाल भारत के कुछ हिस्सों के लिए यात्रा चेतावनी भी जारी है।
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसके प्राकृतिक वाहक फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। यह वायरस दूषित फल या खाना खाने से, संक्रमित सूअरों के संपर्क से या संक्रमित इंसान के नजदीकी संपर्क से फैल सकता है
शुरुआती लक्षण:
कई बार मरीज में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
फिलहाल निपाह वायरस का कोई इलाज या वैक्सीन नहीं है। इलाज सिर्फ लक्षणों के आधार पर सहायक देखभाल तक सीमित है। इसी वजह से सरकारें रोकथाम, स्क्रीनिंग और जागरूकता पर ज्यादा जोर दे रही हैं। भारत में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद एशिया का अलर्ट मोड में आना इस बात का संकेत है कि यह वायरस कितना खतरनाक और संवेदनशील माना जाता है। समय रहते सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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