नोएडा टेक एक्सपर्ट मौत केस: गूगल सैटेलाइट इमेज में दिखा चाैंकाने वाला चार साल पुराना ‘डेथ ट्रैप’

Published : Jan 21, 2026, 03:43 PM ISTUpdated : Jan 21, 2026, 03:47 PM IST

Noida Accident News: नोएडा में टेक एक्सपर्ट की मौत के बाद गूगल सैटेलाइट इमेज से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हादसे की जगह 2021 से पानी से भरा गड्ढा मौजूद था। बिना बैरिकेड इस ‘डेथ ट्रैप’ ने सिस्टम की लापरवाही उजागर कर दी।

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Google Satellite Image Reveal: नोएडा से सामने आई एक दर्दनाक और डराने वाली घटना ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवा टेक एक्सपर्ट की मौत के बाद अब यह सवाल गूंज रहा है-क्या यह सिर्फ एक हादसा था, या सालों से मौजूद एक छिपा हुआ मौत का जाल? जब गूगल सैटेलाइट इमेज सामने आईं, तो सच्चाई और भी भयावह नजर आई।

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टेक एक्सपर्ट की मौत: आखिर उस रात हुआ क्या था?

17 जनवरी की रात करीब 12:15 बजे, गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार नोएडा के सेक्टर-150 में एक सड़क किनारे बने खुले, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। अंधेरा, 90 डिग्री का खतरनाक मोड़ और कोई चेतावनी संकेत नहीं और एक होनहार युवक की जान चली गई।

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क्या यह गड्ढा अचानक बना था? गूगल सैटेलाइट ने क्या दिखाया?

युवराज की मौत के कुछ दिनों बाद जब गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेज देखी गईं, तो बड़ा खुलासा हुआ। तस्वीरों से साफ दिखा कि यह पानी से भरा गड्ढा 2021 से मौजूद था। मार्च 2025 की ताजा इमेज में भी वही गड्ढा नजर आया-काला रुका हुआ पानी, शैवाल, झाड़ियां और आसपास पूरी तरह विकसित सड़कें।

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अगर खतरा दिख रहा था, तो बैरिकेड क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह जगह लंबे समय से खतरनाक थी। यहां न तो कोई  बैरिकेड था, न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगा था। सड़क पर करीब 90 डिग्री का तीखा मोड़ था ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी यहां एक ट्रक हादसे का शिकार हुआ था। ट्रक ड्राइवर गुरविंदर सिंह चार घंटे तक उसी जगह फंसे रहे, लेकिन उनकी जान बच गई। तो फिर सवाल वही है- जब पहली घटना के बाद भी कुछ नहीं बदला, तो दूसरी मौत किसकी जिम्मेदारी है?  

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डेवलपर और अथॉरिटी की लापरवाही?

यह प्लॉट पहले खेती के लिए इस्तेमाल होता था। 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के बाद जमीन की खुदाई हुई। 2021 में निर्माण रुक गया, लेकिन खुदा हुआ बेसमेंट खुला छोड़ दिया गया, जो धीरे-धीरे बारिश और नालों के पानी से भरता चला गया। इतने सालों तक किसी ने इसे सुरक्षित करने की जरूरत क्यों नहीं समझी?

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परिवार का दर्द और जवाबदेही की मांग

युवराज के पिता राजकुमार गुप्ता का कहना है “अगर बैरिकेड और संकेत होते, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। मैं नहीं चाहता कि किसी और का बेटा ऐसे मरे।” उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने MZ विज़टाउन के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। मामला गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत की धाराओं में दर्ज किया गया है।

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जमीन खेती से मौत के गड्ढे तक कैसे पहुंची?

सैटेलाइट डेटा के मुताबिक:

  • 2015 तक यह जमीन खेती के काम आती थी
  • 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के बाद पेड़ काटे गए
  • 2021 में बेसमेंट खुदा, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया
  • डेवलपर्स ने प्लॉट खोद दिया, पर उसे खुला छोड़ दिया।

बारिश और नालियों का पानी जमा होता गया…और वह जगह एक जानलेवा तालाब बन गई।

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निर्माण रुका, लेकिन सुरक्षा क्यों नहीं हुई?

इस प्लॉट पर पहले कमर्शियल बिल्डिंग का प्लान था, जिसे बाद में अथॉरिटी ने खारिज कर दिया। इसके बाद निर्माण तो रोक दिया गया, लेकिन खोदा गया बेसमेंट खुला छोड़ दिया गया। न बैरिकेड, न चेतावनी-बस एक जानलेवा गड्ढा। पुलिस ने युवराज के पिता की शिकायत पर MZ विज़टाउन के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ लापरवाही से मौत सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

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सबसे बड़ा सवाल: क्या यह सिस्टम की नाकामी है?

यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी लापरवाही, अधूरी प्लानिंग और जिम्मेदारी से भागने की कहानी है। गूगल सैटेलाइट इमेज ने जो दिखाया, उसने यह साफ कर दिया कि खतरा नया नहीं था-बस अनदेखा किया गया। अब सवाल यह नहीं कि क्या हुआ, बल्कि यह है-क्या इससे कोई सबक लिया जाएगा, या अगली सैटेलाइट इमेज किसी और मौत की गवाही देगी?

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