लू की वापसी: आखिर क्यों और कहां पारा पहुंचने वाला है 46°C तक, गर्मी से कब मिलेगी राहत?

Published : Jun 07, 2026, 12:11 PM ISTUpdated : Jun 07, 2026, 12:13 PM IST
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सार

उत्तर भारत में भीषण गर्मी का नया दौर शुरू! 8 जून से उत्तर भारत में तापमान 46°C तक क्यों पहुंच सकता है? क्या थार की ‘लू’ हवाएं और हीट डोम मिलकर हालात और खतरनाक बना रहे हैं? 10-11 जून को चरम गर्मी के बाद भी राहत क्यों तुरंत नहीं मिलेगी? क्या 13 जून का पश्चिमी विक्षोभ ही इस भीषण गर्मी का असली ब्रेक बनेगा? 

नई दिल्ली: उत्तर भारत के लोगों के लिए आने वाले कुछ दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाले हैं। अगर आप सोच रहे थे कि भीषण गर्मी का दौर बीत चुका है और मौसम सुहाना होने वाला है, तो सावधान हो जाइए। एक संक्षिप्त राहत के बाद, प्रकृति एक बार फिर अपना सबसे क्रूर रूप दिखाने के लिए तैयार है। सोमवार, 8 जून, 2026 से उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का एक ऐसा खौफनाक दौर शुरू होने जा रहा है, जो इंसानी बर्दाश्त की सीमाओं को चुनौती देगा। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस नए दौर में पारा सीधे 46 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है।

थार के रेगिस्तान से आ रही है 'मौत की हवा', वैज्ञानिक भी हैरान!

आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि मौसम ने यह जानलेवा करवट ली? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली बेहद गर्म और सूखी हवाओं का लगातार चलना है। वैज्ञानिक भाषा में इस जानलेवा प्रक्रिया को 'एडवेक्शन' (Advection) कहा जाता है। ये हवाएं थार रेगिस्तान और पाकिस्तान के तपते हुए सूखे मैदानी इलाकों से होकर भारत में प्रवेश कर रही हैं। रास्ते भर की भीषण गर्मी को अपने भीतर समेटे हुए ये कुख्यात 'लू' हवाएं जब आपकी त्वचा को छुएंगी, तो शरीर की पूरी नमी सोख लेंगी। ये हवाएं इतनी रफ्तार और ताकत से बह रही हैं कि स्थानीय स्तर पर बनने वाली किसी भी ठंडी हवा को टिकने ही नहीं दे रही हैं।

 

 

आसमान में बना 'अदृश्य ढक्कन': क्या हम 'हीट डोम' के पिंजरे में कैद हैं?

सस्पेंस सिर्फ जमीन पर चलने वाली हवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे सिर के ऊपर आसमान में एक बहुत बड़ा और खतरनाक खेल चल रहा है। इस क्षेत्र के ऊपर उच्च वायुदाब का एक क्षेत्र बन गया है, जिसे वैज्ञानिक 'एंटीसाइक्लोन' कहते हैं। कल्पना कीजिए कि आसमान में एक ऐसा अदृश्य और विशाल ढक्कन लगा दिया गया है, जो नीचे से उठने वाली गर्म हवा को बाहर नहीं जाने दे रहा। इस प्रक्रिया को 'सब्सिडेंस' (Subsidence) कहा जाता है, जिसमें हवा नीचे दबकर और ज्यादा खौफनाक तरीके से गर्म हो जाती है। इस ढक्कन ने आसमान से बादलों का नामोनिशान मिटा दिया है, जिसके कारण जून की सीधी और तीखी धूप सीधे धरती पर काल बनकर टूट रही है। इसी स्थिति को 'हीट डोम' (Heat Dome) कहा जाता है, जहाँ गर्मी एक पिंजरे की तरह जमीन के पास ही फंस जाती है।

 

 

मिट्टी की भयानक बेबसी: सूरज की 100% ऊर्जा सिर्फ हवा को जलाने में!

इस बार स्थिति इसलिए और भी ज्यादा डरावनी हो गई है क्योंकि उत्तर भारत की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। मिट्टी में नमी (Moisture) न के बराबर होने के कारण प्रकृति का कूलिंग सिस्टम फेल हो गया है। सामान्यतः सूरज की गर्मी का एक बड़ा हिस्सा जमीन की नमी को भाप बनाने में खर्च होता है, जिससे तापमान नियंत्रण में रहता है। लेकिन अब, नमी न होने के कारण सूरज की लगभग 100% ऊर्जा सिर्फ और सिर्फ हवा को भट्टी की तरह जलाने में खर्च हो रही है। यही वजह है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में तापमान 42 से 46 डिग्री के डरावने स्तर को छूने वाला है।

तो क्या इस नरक जैसी गर्मी से कभी मिलेगी राहत? जानिए तारीख!

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के कड़े पैमानों के अनुसार, यह स्थिति एक भीषण आपदा (Severe Heatwave) की श्रेणी में आती है। गर्मी का यह चरम स्तर 10 और 11 जून के आसपास अपने सबसे खतरनाक रूप में होगा। लेकिन इस खौफनाक सस्पेंस के बीच एक राहत भरी खबर भी है। 13 जून के आसपास भूमध्य सागर से उठने वाला एक शक्तिशाली 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) भारत के आसमान पर दस्तक देने वाला है। यह अपने साथ नमी से भरे बादलों का घेरा लाएगा, जिससे हवा की दिशा बदलेगी, धूल भरी आंधी चलेगी और झमाझम बारिश की बौछारें गिरेंगी। हालांकि, केरल पहुंच चुका मॉनसून अभी उत्तर भारत से बहुत दूर है, इसलिए जब तक मॉनसून नहीं आता, तब तक खुद को बचाए रखें, पानी पीते रहें और दोपहर में बाहर निकलने की भूल बिल्कुल न करें!

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