Pahalgam Attack: आतंकी हाफिज सईद को NIA कोर्ट का समन, जानिए नहीं आया तो आगे क्या होगा?

Published : Aug 22, 2026, 07:15 PM IST
Hafiz Saeed

सार

Pahalgam Terror Attack Case में NIA कोर्ट ने आतंकी हाफिज सईद को समन भेजने का फैसला किया है। अगर वह पेश नहीं होता है, तो जानिए क्या होगा और ट्रायल कैसे चलेगा?

Pahalgam Terror Attack Case: पहलगाम आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सईद की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जम्मू की स्पेशल NIA कोर्ट अब उसे ट्रायल के लिए पेश होने का समन भेजेगी। यह समन राजनयिक माध्यम से विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए पाकिस्तान भेजे जाने की प्रक्रिया में है। सईद को पहलगाम हमले के मामले में आरोपी बनाया गया है। NIA ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) में उस पर हमले की साजिश में भूमिका होने का आरोप लगाया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हाफिज सईद इस समन पर भारत आएगा? अगर वह समन के बावजूद भारत की अदालत में पेश नहीं होता तो क्या होगा? क्या उसके बिना भी मुकदमा चल सकता है? आइए जानते हैं जवाब...

हाफिज सईद को क्यों भेजा जा रहा है समन?

पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत कुल 26 लोगों की मौत हुई थी। मामले की शुरुआती जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, जिसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर जांच NIA को सौंप दी गई। NIA ने दिसंबर 2025 में मामले में अपनी मूल चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद जुलाई 2026 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित LeT/TRF के प्रमुख हाफिज सईद को भी आरोपी बनाया गया। एजेंसी ने उस पर पाकिस्तान से साजिश को अंजाम देने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।

NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में क्या है?

NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सईद को व्यक्तिगत रूप से और प्रतिबंधित LeT तथा उसके कथित प्रॉक्सी संगठन TRF (The Resistance Front) के प्रमुख के तौर पर नामजद किया गया है। उस पर BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita) और UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act) के तहत आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के हैं और इनका अंतिम निर्धारण अदालत में ट्रायल के बाद होगा।

पाकिस्तान में बैठे हाफिज सईद को समन कैसे पहुंचेगा?

हाफिज सईद पाकिस्तान में है और भारत में उसके खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया जा चुका है। ऐसे में अदालत का समन सीधे सामान्य तरीके से पहुंचाना संभव नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जम्मू की स्पेशल NIA कोर्ट का समन विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए राजनयिक चैनल से पाकिस्तान भेजा जाएगा। इसका मकसद आरोपी को अदालत के सामने पेश होने के लिए औपचारिक रूप से निर्देश देना है।

समन के बाद हाफिज सईद नहीं आया तो क्या होगा?

अगर आरोपी समन और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं होता और उसे जानबूझकर ट्रायल से बचने वाला घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) माना जाता है, तो BNSS की धारा 356 के तहत उसके खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमा (Trial in Absentia) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। आसान भाषा में समझें, तो 'Trial in Absentia' का मतलब आरोपी की गैरमौजूदगी में अदालत में मुकदमा चलाना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समन भेजते ही अदालत आरोपी की गैरमौजूदगी में फैसला सुना सकती है। कानून में इसके लिए कई जरूरी शर्तें रखी गई हैं।

Trial in Absentia से पहले क्या-क्या होगा?

BNSS की धारा 356 के तहत आरोपी की गैरमौजूदगी में ट्रायल शुरू करने से पहले अदालत को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सबसे पहले आरोपी के खिलाफ दो लगातार अरेस्ट वारंट्स जारी किए जाने होते हैं। इनके बीच कम से कम 30 दिन का अंतर होना चाहिए। इसके बाद आरोपी को अदालत के सामने पेश होने के लिए सार्वजनिक नोटिस की प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है। नोटिस लोकल या नेशनल न्यूज पेपर में पब्लिश किया जा सकता है और आरोपी के आखिरी ज्ञात पते से जुड़ी जगहों पर भी इसे प्रदर्शित करने की प्रक्रिया होती है। इसके बाद भी तुरंत ट्रायल शुरू नहीं किया जा सकता। चार्ज फ्रेम होने की तारीख से कम से कम 90 दिन का इंतजार जरूरी है। यह व्यवस्था इसलिए है ताकि आरोपी को अदालत में पेश होने का पर्याप्त मौका मिल सके।

क्या हाफिज सईद की गैरमौजूदगी में सजा भी हो सकती है?

'Trial in Absentia' का मतलब सीधे सजा सुनाना नहीं है। इस प्रक्रिया में अदालत आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमे की सुनवाई कर सकती है। सबूतों और गवाहों को कानून के मुताबिक देखा जाएगा और बचाव पक्ष के अधिकारों की भी व्यवस्था होगी। अगर आरोपी की तरफ से कोई वकील मौजूद नहीं है तो राज्य की ओर से उसके बचाव के लिए वकील उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके बाद अदालत मामले में उपलब्ध सबूतों के आधार पर अपना फैसला दे सकती है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि हाफिज सईद को 'सजा हो गई' या उसकी सजा तय है। फिलहाल मामला समन और आगे की कानूनी प्रक्रिया के चरण में है।

हाफिज सईद पर क्या आरोप हैं?

NIA ने जुलाई 2026 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को आरोपी बनाया। एजेंसी के मुताबिक, पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित साजिश, विदेशी आतंकियों, पाकिस्तानी हैंडलर्स और स्थानीय स्तर पर मिली कथित मदद की जांच की गई है। NIA ने सईद के खिलाफ BNS और UAPA के तहत आरोप लगाए हैं। इनमें भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और पाकिस्तान से साजिश रचने से जुड़े आरोप शामिल हैं।

NIA की मूल चार्जशीट में कौन-कौन आरोपी थे?

NIA ने 15 दिसंबर 2025 को मामले में अपनी मूल चार्जशीट दाखिल की थी। यह करीब 1,597 पन्नों की थी। इसमें पाकिस्तान स्थित LeT/TRF को भी आरोपी बनाया गया था। साथ ही पाकिस्तानी हैंडलर्स साजिद जट्ट (Sajid Jatt) समेत अन्य आरोपियों के नाम शामिल थे। चार्जशीट में तीन पाकिस्तानी आतंकियों फैसल जट उर्फ ​​सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ ​​जिब्रान और हमजा अफगानी का भी जिक्र था। ये तीनों जुलाई 2025 में 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इसके अलावा दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथद को आतंकियों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

NIA किस साजिश की जांच कर रही है?

जांच एजेंसी के मुताबिक, पहलगाम हमला सिर्फ सीमा पार से आए आतंकियों की कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक नेटवर्क की भूमिका की जांच की गई है। NIA ने आरोप लगाया है कि साजिश में पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स, विदेशी आतंकियों और स्थानीय स्तर पर मिले कथित लॉजिस्टिकल सपोर्ट का इस्तेमाल हुआ। एजेंसी ने TRF को LeT का प्रॉक्सी बताते हुए कहा है कि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान स्थित संगठन की भूमिका को छिपाने के लिए किया गया। मामले की जांच में आतंकियों को आश्रय, आवाजाही और लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने के आरोपों की भी पड़ताल की गई है।

अब आगे क्या होगा?

अब सबसे पहले हाफिज सईद को अदालत में पेश होने के लिए समन भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद अदालत यह देखेगी कि आरोपी कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है या नहीं। अगर वह पेश नहीं होता, तो कानून के तहत आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, 'Trial in Absentia' भी अपने आप शुरू नहीं हो जाता है। इसके लिए अरेस्ट वारंट, घोषणा (Proclamation) और निर्धारित वेटिंग पीरियड जैसी कानूनी शर्तें पूरी करनी होंगी।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Jaipur: कैंसिल हो गया Ayurveda PG Entrance Exam, छात्राओं ने जमकर काटा बवाल
कौन है राकेश त्रेहन? जो फ्री में बांटने जा रहे iPhone, बस एक नंबर पर करना होगा कॉल