
Pakistan Army Chief Asim Munir: अशांत और खनिज संपदा से समृद्ध बलूचिस्तान एक बार फिर पाकिस्तानी फौज के बूटों तले रौंदा जाने वाला है। इस्लामाबाद के सत्ता गलियारों से आ रही खबरें इस बात की तस्दीक कर रही हैं कि आने वाले दिनों में पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ एक ऐसा खौफनाक सैन्य अभियान शुरू करने जा रही है, जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल 'नेशनल वर्कशॉप बलूचिस्तान' के दौरान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने खुलेआम प्रांत के लोगों और उग्रवादी गुटों को बड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी दी। मुनीर ने बलूचिस्तान को पाकिस्तान का 'गौरव' तो बताया, लेकिन उनके शब्दों के पीछे छिपा असली इरादा एक बड़े और खूनी सैन्य दमन की ओर इशारा कर रहा है।
जब-जब पाकिस्तानी सेना अपने ही देश के भीतर चौतरफा घिरती है, तब-तब वह एक पुराने और घिसे-पिटे चक्रव्यूह का सहारा लेती है—और वह है भारत विरोधी नैरेटिव। जनरल असीम मुनीर ने पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) के जरिए जारी बयान में एक बार फिर बिना नाम लिए भारत की ओर सीधा इशारा किया। मुनीर ने दावा किया कि बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी आंदोलनों को 'विदेशी-समर्थित प्रॉक्सी' हवा दे रहे हैं, जो क्षेत्र को अस्थिर करना चाहते हैं। हालांकि, भारत सरकार ने पाकिस्तान के इन सभी दावों को हमेशा की तरह पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत करार दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में चीनी हितों पर हो रहे लगातार हमलों से घबराकर मुनीर अपनी साख बचाने के लिए इस तरह के गंभीर आरोप मढ़ रहे हैं।
ISPR
Rawalpindi, 23 July, 2026;
Field Marshal Syed Asim Munir, NI (M), HJ, Chief of Army Staff and Chief of Defence Forces, interacted with participants of the 20th National Workshop Balochistan at General Headquarters, Rawalpindi.
Addressing the participants, the Field… pic.twitter.com/64OcRP9HtW— Siddique Jan SMT (@SdqJaanSMT) July 23, 2026
पाकिस्तानी सेना जिसे 'आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जंग' का नाम दे रही है, बलूचिस्तान के स्थानीय लोगों के लिए वह किसी नरक से कम नहीं है। जमीनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, BLA के लड़ाकों को खोजने के नाम पर पाकिस्तानी सेना आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को बंधक बना रही है और उनका शारीरिक उत्पीड़न कर रही है। बलूचिस्तान का यह आंदोलन इस बात को लेकर है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के हुक्मरान उनके खनिज संसाधनों (जैसे सुई गैस और तांबा) का बेरहमी से शोषण कर रहे हैं और स्थानीय समुदायों को उसका एक प्रतिशत हिस्सा भी नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस नए अभियान की आड़ में हजारों निर्दोष बलूच युवाओं को 'गायब' (Forced Disappearances) कर दिया जाएगा।
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इस पूरे सस्पेंस के पीछे एक और बड़ी महाशक्ति का हाथ है-वह है चीन। बलूचिस्तान में चल रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और ग्वादर पोर्ट की माइनिंग परियोजनाओं में शामिल चीनी इंजीनियरों और नागरिकों पर BLA ने हाल के दिनों में कई भीषण आत्मघाती हमले किए हैं। बीजिंग से मिल रहे कड़े दबाव के कारण ही जनरल मुनीर इस कदर बौखलाए हुए हैं। मुनीर ने साफ कर दिया है कि जब तक 'आतंकवाद और उसके समर्थकों' का वजूद पाकिस्तान से खत्म नहीं हो जाता, तब तक यह खूनी अभियान रुकने वाला नहीं है।
हालांकि पाकिस्तान सेना अपने अभियानों को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताती है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों और कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने समय-समय पर आरोप लगाया है कि इन अभियानों के दौरान आम नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कथित जबरन गुमशुदगी, हिरासत और नागरिकों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं। यदि सेना नया अभियान शुरू करती है तो इन चिंताओं के फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अपने संबोधन में असीम मुनीर ने एक बार फिर बलूचिस्तान में अशांति के पीछे "विदेशी ताकतों" का हाथ होने की बात कही और भारत की ओर संकेत किया। हालांकि भारत लगातार ऐसे आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताता आया है। नई दिल्ली का कहना रहा है कि पाकिस्तान को अपने आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने के बजाय घरेलू समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
मुनीर के बयान के बाद यह माना जा रहा है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा अभियान और तेज हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अलगाववादी गतिविधियों, सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक असंतोष के बीच यह भी साफ है कि केवल सैन्य कार्रवाई से स्थायी समाधान निकालना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार की रणनीति और जमीनी हालात पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।
अब सबसे बड़ा और खौफनाक सस्पेंस यह है कि क्या पाकिस्तानी सेना का यह 'ऑपरेशन ऑल आउट' बलूचिस्तान की आजादी की आवाज को हमेशा के लिए कुचल देगा, या फिर यह सैन्य कार्रवाई खुद पाकिस्तान के टूटने की नई पटकथा लिख देगी? युद्ध के इस काले बादलों के बीच पूरा दक्षिण एशिया थम कर देख रहा है!
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