सुप्रीम कोर्ट का आखिरी अल्टीमेटम-'गलतियों का सिलसिला बंद करो!' दिल्ली की सड़कों पर मचे हिंसक कोहराम और वांगचुक के अनशन टूटने के बाद अब 27 जुलाई को क्या होगा? जानिए।

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी अदालत ने NEET-UG परीक्षा में चल रही धांधलियों और पेपर लीक के मामलों पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई एक बेहद तनावपूर्ण सुनवाई के दौरान, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियों को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। कोर्ट रूम में पसरे सन्नाटे के बीच बेंच ने बेहद कड़े लहजे में कहा, "हम इस पूरे मामले पर बहुत बारीकी से नज़र रखेंगे और नियमित रूप से इसकी समीक्षा करेंगे।" सुप्रीम कोर्ट के इस तेवर ने साफ कर दिया है कि अब सरकार किसी भी तरह की हीला-हवाली नहीं कर पाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में एक बात दोहराई-"हम इसे ऐसे ही नहीं चलने दे सकते।"

"ऑनलाइन परीक्षा पर क्या तैयारी है?" कोर्ट ने मांगा पूरा रोडमैप

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से सबसे महत्वपूर्ण और सस्पेंस से भरा सवाल पूछा। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पेन-पेपर मोड को हमेशा के लिए दफन करके कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) यानी पूरी तरह ऑनलाइन मोड में जाने की उनकी सीक्रेट योजनाओं का पूरा ब्योरा मांगा है। अदालत ने पूछा, "कृपया हमें बताएं कि आप पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में जाने के लिए क्या कर रहे हैं? और सबसे बड़ी बात, जब देश की इतनी बड़ी परीक्षा कंप्यूटर-बेस्ड मोड पर जाएगी, तो आप डेटा की सुरक्षा कैसे करेंगे? हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सब कुछ संस्थागत (institutionalised) हो।" इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से एक 'व्यापक दृष्टिकोण' (holistic view) सामने रखने के लिए कुछ और समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 27 जुलाई की तारीख तय कर दी।

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जंतर-मंतर पर हिंसक झड़पें और 'चलो संसद' मार्च: सड़कों पर उतरा छात्रों का गुस्सा

यह पूरी कानूनी लड़ाई एक ऐसे समय में लड़खड़ा रही है जब दिल्ली की सड़कें छात्रों के आक्रोश से सुलग रही हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हज़ारों छात्र डटे हुए हैं, जिनका एकमात्र लक्ष्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इस हफ्ते की शुरुआत में यह आंदोलन तब हिंसक हो गया जब छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़कर 'चलो संसद' मार्च शुरू कर दिया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसमें पुलिसकर्मियों और छात्रों दोनों को गंभीर चोटें आईं। सड़कों पर मचे इस कोहराम ने सुप्रीम कोर्ट के भीतर की कार्यवाही में और अधिक गंभीरता ला दी है।

मेदांता अस्पताल में अनशन का अंत: सफदरजंग से गुरुग्राम तक का हाई-वोल्टेज ड्रामा

इस पूरे आंदोलन की सबसे भावुक और सस्पेंस से भरी कड़ी प्रख्यात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक रहे हैं, जो 28 जून से लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। 18 जुलाई को जब डॉक्टरों ने उनके अंगों के फेल होने की डरावनी चेतावनी दी, तो पुलिस ने उन्हें जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इसके बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सरकारी अस्पताल में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दो दिनों की हाई-वोल्टेज कानूनी लड़ाई के बाद, आखिरकार उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत मिली, जहां केंद्र सरकार से मिले बड़े लिखित आश्वासनों के बाद उन्होंने आज अपना अनशन तोड़ दिया।

अब हर किसी की नजरें 27 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली महा-सुनवाई पर टिकी हैं। क्या केंद्र सरकार डेटा सुरक्षा का वो फुलप्रूफ प्लान अदालत के सामने पेश कर पाएगी, या फिर परीक्षा प्रणाली का यह गतिरोध देश में एक नई कानूनी और सामाजिक क्रांति को जन्म देगा? सस्पेंस अभी अपने चरम पर है!

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