गुजरात में एक स्थिर वायुमंडलीय भंवर के कारण अगले 24 घंटे में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी के बाद रात 2 बजे से शुरू होगा तबाही का वो मंजर, जो सबकुछ डुबा देगा। जानिए अगले 24 घंटों का खौफनाक सच।
Gujarat Rain Alert: गुजरात के आसमान पर एक ऐसा अदृश्य और खौफनाक खतरा मंडरा रहा है, जिसने मौसम वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। अमूमन चक्रवात या कम दबाव के क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ जाते हैं, जिससे तबाही का खतरा थोड़ा टल जाता है। लेकिन इस बार कुदरत ने गुजरात के ऊपर एक 'डेथ ट्रैप' यानी एक जगह पर लगभग स्थिर वायुमंडलीय भंवर (Atmospheric Vortex) तैयार कर दिया है। मौसम विशेषज्ञों ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह भंवर अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रहा है। एक ही जगह पर टिके होने के कारण यह आसपास के समंदर और वायुमंडल से बार-बार नमी खींच रहा है, जो अगले 24 घंटों में पूरे गुजरात को जलमग्न करने के लिए काफी है।
आखिर क्यों बढ़ गई है चिंता? रात 2 बजे के बाद शुरू होगा जलप्रलय का वो खौफनाक मंजर!
गुरुवार की शाम को कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के साथ ऐसा लगा मानो खतरा टल गया है, लेकिन मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यह सिर्फ तूफान से पहले की एक खतरनाक शांति थी। असली खौफनाक खेल रात के 2 बजे के बाद शुरू होने का अनुमान है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि रात ढलते ही बारिश की तीव्रता में अचानक एक विस्फोटक उछाल आएगा, जो शुक्रवार की सुबह तक बिना रुके जारी रहेगा। यह सिस्टम चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) की तरह व्यवहार कर रहा है, जिसकी मार सबसे पहले सौराष्ट्र पर पड़ेगी और देखते ही देखते यह तबाही अहमदाबाद सहित राज्य के मध्य हिस्सों तक फैल जाएगी।
डूब जाएंगे शहर, ठप होगी जल निकासी: अहमदाबाद और सौराष्ट्र के लिए 'रेड अलर्ट'
इस स्थिर भंवर से पैदा होने वाली बारिश सामान्य मॉनसून की बारिश जैसी बिल्कुल नहीं होगी। मौसम विभाग के अनुसार, इस सिस्टम से लगातार और मूसलाधार बारिश की ऐसी लहरें उठेंगी जो शहरों की जल निकासी प्रणालियों (Drainage Systems) को कुछ ही मिनटों में पूरी तरह ठप कर देंगी। अहमदाबाद के शहरी इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) आने का खतरा चरम पर है। सड़कों पर कई फीट पानी भरने, यातायात पूरी तरह ठप होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है और निवासियों को चेतावनी दी है कि वे आधी रात के बाद किसी भी परिस्थिति में घरों से बाहर न निकलें।
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नदियों का रौद्र रूप और ग्रामीण इलाकों में हाहाकार: ऊपरी मंजिलों पर भागने की मजबूरी
शहरी इलाकों से इतर सबसे ज्यादा भयावह स्थिति सौराष्ट्र के ग्रामीण अंचलों की होने वाली है। यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान 100% सच साबित होता है, तो सौराष्ट्र की तमाम नदियां, नाले और जलाशय कुछ ही घंटों में अपनी सीमाओं को लांघ जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ से जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को प्रशासन ने भारी बारिश शुरू होने से ठीक पहले सुरक्षित स्थानों या इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर चले जाने का सख्त निर्देश दिया है।
क्या टल पाएगा ये महा-संकट? अगले 24 घंटे क्यों हैं सबसे अहम?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह स्थिर भंवर अगले 24 घंटों तक सक्रिय बना रहता है, तो गुजरात के कई हिस्सों में मॉनसून का सबसे गंभीर दौर देखने को मिल सकता है। लगातार होने वाली बारिश सामान्य स्थिति को तेजी से बाढ़ जैसी आपदा में बदल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस मौसम प्रणाली की अगली गतिविधियों पर टिकी हैं। यदि भंवर कमजोर नहीं पड़ा, तो सौराष्ट्र और अहमदाबाद सहित कई जिलों में हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। यह 24 घंटे का समय गुजरात के लिए एक अग्निपरीक्षा जैसा है, जहां हर एक मिनट के साथ बाढ़ का खतरा विकराल होता जा रहा है! ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों दोनों के लिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।
स्थिर भंवर क्यों होता है ज्यादा खतरनाक?
मौसम विज्ञान के अनुसार, जब कोई चक्रवाती परिसंचरण या वायुमंडलीय भंवर तेजी से आगे नहीं बढ़ता, तो वह आसपास के समुद्री क्षेत्रों से लगातार नमी खींचता रहता है। परिणामस्वरूप एक ही क्षेत्र में घंटों तक मूसलाधार बारिश होती रहती है। यही कारण है कि इस बार मौसम वैज्ञानिक इस सिस्टम को सामान्य मॉनसून गतिविधि की तुलना में कहीं अधिक गंभीर मान रहे हैं। लगातार वर्षा से नदियां उफान पर आ सकती हैं और जलभराव तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।
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